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Himachal(Economist) राकेश बोले: केंद्रीय बजट में प्रदेश के लिए चुनौतियां भी और अवसर भी |

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Himachal(Economist) : एसोसिएट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) डॉ. राकेश शर्मा के अनुसार इस केंद्रीय बजट में 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राज्यों को राजकोषीय घाटे की अनुमति अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद के चार प्रतिशत की होगी जो एक चुनौती के रूप में सामने होगी। 

हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान(हिप्पा) में एसोसिएट प्रोफेसर (अर्थशास्त्र) डॉ. राकेश शर्मा के अनुसार इस केंद्रीय बजट में 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राज्यों को राजकोषीय घाटे की अनुमति अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद के चार प्रतिशत की होगी जो एक चुनौती के रूप में सामने होगी।

यह वित्तीय अनुशासन के बारे में अलर्ट करेगी, क्योंकि पिछले बजट में प्रदेश का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 4.52 प्रतिशत रहा है। अच्छी बात यह है कि ‘पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता की योजना’ के अंतर्गत 15,000 करोड़ रुपये पूंजी परिव्यय के रूप में दिए जाएंगे, जो सभी राज्यों के विकास के लिए अत्यधिक मददगार साबित होंगे।

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वर्ष 2022-23 के लिए अर्थव्यवस्था में सभी निवेशों को प्रेरित करने के लिए राज्यों की मदद करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह पचास-वर्षीय ब्याज-मुक्त ऋ ण राज्यों को दिए जाने वाले सामान्य कर्ज के अलावा है। इस प्रकार के आवंटन का प्रयोग पीएम गति-शक्ति से जुड़े निवेशों और राज्यों के अन्य उत्पादपरक पूंजी निवेश में किया जा सकेगा।

प्रदेश के लिए एक चुनौती यह भी रहेगी कि केंद्रीय बजट की भिन्न मदों से वित्तीय संसाधन कैसे खींचे, जो हमेशा इस बात पर अधिक निर्भर रहते हैं कि हमारे विभिन्न विभाग केंद्रीय मंत्रालयों के आगे अपने प्रस्ताव कितनी सशक्तता से पेश करते हैं। देशभर में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे हिमाचल की मुहिम को आवश्यक बल मिलेगा।

कृषि और ग्रामीण उद्यमों के लिए स्टार्ट-अप्स, जो कृषि उत्पाद मूल्य शृंखला के लिए संगत होंगे, उन्हें वित्तपोषित किया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव होंगे, जो कोरोना काल में महसूस जरूरतों को ध्यान में रखेंगे। विशेषकर हिमाचल राज्य जैसे दुर्गम क्षेत्रों का। ‘हर घर नल से जल’ के अंतर्गत बजट  में 3.8 करोड़ परिवारों को कवर करने के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

वर्ष 2022-23 में ग्रामीण और शहरी, दोनों ही क्षेत्रों में 80 लाख मकान बनाए जाएंगे। 2022 में शत प्रतिशत 1.5 लाख डाकघरों में कोर बैंकिंग सिस्टम चालू हो जाएगा, जो ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सुविधाजनक होगा।

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सस्ते ब्राडबैंड और मोबाइल सेवा प्रसार को सुदृढ़ करने का प्रयोजन बजट में है। दूर-दराज के क्षेत्र सहित सभी ग्रामों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के लिए संविदाएं वर्ष 2022-23 में पीपीपी के माध्यम से भारत नेट परियोजना के तहत ठेके दिए जाएंगे जो कि वर्ष 2025 में पूरी होगी। विशेष आर्थिक जोन अधिनियम को एक नए विधान से प्रतिस्थापित किया जाएगा जो राज्यों को ‘उद्यमों और सर्विस हबों के विकास’ में भागीदार बनने के लिए समर्थ होंगे।

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