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यूपी का रण : मंच आभासी, जंग असली, सियासी दल हाईटेक वॉर रूम से पैनी कर रहे मुद्दों की धार

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भाजपा ने ऐसा सिस्टम खड़ा किया है जिससे 1.74 लाख बूथों पर तैनात बूथ समितियों से लेकर जिलों और क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर मिल जाती है। योजनाओं का लाभ पाने वालों से भी वॉर रूम के जरिए संपर्क कर वोट देने की अपील की जा रही है।

2022 का चुनाव अनोखा है। इस अनोखे समर के हम-आप साक्षी हैं। आने वाली पीढ़ियों को बता सकेंगे कि हमने ऐसी जंग देखी है जो थी तो असली, पर लड़ी गई आभासी। योद्धा मैदान में न होकर वॉर रूम में थे।

आप बता पाएंगे कि हमने डिजिटल मोर्चेबंदी देखी है। हमने सियासत का रुख टॉप ट्रेंड में रहने वाली खबरों से भांपा है। कैसे भूल जाएंगे वो मीम्स…जिसे देखते ही मुंह से निकलता है, ये वाला तो बहुत जोरदार है। कैसे भूल जाएंगे वो ग्राफिक्स जो हमारी यादों में पैबस्त हो गए। ये बदलाव का दौर है। सियासत भी अपने पारंपरिक चोले से बाहर निकल रही है। है न ये सब अनोखा! वाॅर रूम की ऐसी ही झांकियां दिखा रहे हैं राजन परिहार…

चुनावी घमासान शुरू है। योद्धा मैदान में आते जा रहे हैं। पर, लड़ाई परदे के पीछे से चल रही है। जहां एक पोस्ट के बाद उसकी ताकत परखी जाती है। इसके पैमाने हैं-कितने व्यूज आए, कितने लाइक्स आए, कितने री-शेयर हुए…। लोगों को क्या पसंद आ रहा है, इसे परखने के भी अलग पैमाने हैं। हवा का रुख कैसा है,

विपक्षी खेमे के पोस्ट पर कैसे कमेंट आ रहे हैं, उससे परखा जा रहा है। पहली बार पूर्णतया आभासी मंच से लड़ी जा रही लड़ाई बेहद खास है। पर, इसे खास बना रहे हैं सियासी दलों के वॉर रूम। वो वॉर रूम जो लगातार मतदाताओं की नब्ज टटोलने में जुटे हैं। वो वॉर रूम जो रणनीति को धार दे रहे हैं।

किसने क्या बोला, उसकी काट क्या है, कैसे मोर्चेबंदी की जाए, कैसे प्रहार किया जाए, कैसे विपक्षी खेमे के गुरिल्ला हमले को बेअसर किया जाए, यह सब  वॉर रूम से तय हो रहे हैं।
कोरोना के बढ़ते खतरों के साथ ही सियासी पार्टियों ने खुद को आभासी मोर्चे पर जंग के लिए तैयार कर लिया था। हाईटेक वॉर रूम बनाए गए। पेशेवर और राजनीतिक समझ वाले लोगों की फौज खड़ी की गई। फौज में बेहतर तालमेल हो, इसकी व्यवस्थाएं की गईं। नेता किस क्षेत्र में किस मुद्दे को उठाएंगे, क्या बोलने से बचना है, ये सारी पटकथा ेवॉर रूम तैयार कर रहे हैं। 

भाजपा : गुरिल्ला हमले के लिए तैयार भाजपा का वॉर रूम

भाजपा ने अपने वॉर रूम को हर तरीके के हमले के लिए तैयार किया है। सौ से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ दो सौ से अधिक कर्मचारियों की फौज को वॉर रूम में तैनात किया गया है। वॉर रूम की एक टीम का काम सिर्फ योजनाओं और रणनीतियों को धरातल पर उतारना है। तो दूसरी टीम का ध्यान चुनावी रणनीति और डिजिटल प्रचार पर ही केंद्रित रहता है।

आईटी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक कामेश्वर मिश्रा बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के चलते 50 प्रतिशत पदाधिकारियों और स्टाफ को ही बुलाया जा रहा है। ऐसी व्यवस्थाएं की गईं जिससे मोबाइल से काम करने में भी सहूलियत हो। इससे आसानी से घर से या होटल से भी काम जारी है।

एक क्लिक से मिलती है बूथ से लेकर जिले तक की पूरी जानकारी
भाजपा ने ऐसा सिस्टम खड़ा किया है जिससे 1.74 लाख बूथों पर तैनात बूथ समितियों से लेकर जिलों और क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी एक क्लिक पर मिल जाती है। योजनाओं का लाभ पाने वालों से भी वॉर रूम के जरिए संपर्क कर वोट देने की अपील की जा रही है।

मीडिया वॉच
मीडिया वॉच के जरिए भाजपा के कार्यकर्ता दिनभर राजनीतिक खबरों पर नजर रखते हैं। विपक्षी दलों की ओर से जारी बयान की सूचना तुरंत पार्टी के नेताओं को दी जाती है, ताकि उसके हिसाब से रणनीति तय हो सके।

कांग्रेस : 500 से ज्यादा योद्धा मोर्चे पर डटे

कांग्रेस के वॉर रूम में 500 से ज्यादा पेशेवर योद्धा दिन-रात डटे हुए हैं। ये योद्धा बूथ से लेकर हाईकमान के बीच सेतु का काम भी कर रहे हैं। महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अपनी कोर टीम के माध्यम से इनसे सीधे जुड़ी हैं। पार्टी के दो वॉर रूम में एक 300 सीटों वाला प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में, तो दूसरा 200 से 250 सीटों वाला यूथ कांग्रेस की पुरानी बिल्डिंग में है।

प्रत्येक 10 विधानसभा सीटों पर एक प्वॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट यानी संपर्क अधिकारी तैनात है। हर संपर्क अधिकारी की देखरेख में 5-8 लोगों की पेशेवर टीम कार्यरत है। ये टीमें न्याय व ग्राम पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से संपर्क करती हैं। उन सब तक पार्टी की रीति-नीति से जुड़े संदेशों के साथ अन्य निर्देश पहुंचाती हैं। 

नेताओं की सक्रियता और कार्यक्रमों के बारे में फीडबैक भी लेती हैं। यह टीम उन नेताओं पर भी नजर रख रही है, जो पार्टी से चुनाव मैदान में हैं। उम्मीदवार कितना सक्रिय है, उसकी पूरी मॉनिटरिंग इनके जरिए हो रही है। यह टीम बूथ स्तर की कमेटी से लगातार संपर्क में रहती है ताकि जमीनी हकीकत के हिसाब से रणनीति तय की जा सके।

कार्यकर्ताओं के अलावा पार्टी के आम सदस्यों, विभिन्न सामाजिक व व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी ये टीम फीडबैक जुटाती है। प्रियंका के वर्चुअल संवाद में भी यही टीम मुख्य भूमिका निभा रही है। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि वॉर रूम के कार्यों को सार्वजनिक नहीं करने की भी रणनीति बनाई गई है। 

व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिये तीन करोड़ लोगों को जोड़ा 
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू कहते हैं, कोरोना के मद्देनजर रैलियों को निरस्त करने की मांग सबसे पहले कांग्रेस ने ही की थी। हमने डेढ़ लाख व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से तीन करोड़ लोगों को जोड़ने का काम किया है। सदस्यता अभियान के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में 40-50 हजार नए लोगों को जोड़ा गया है।

सपा : प्रचार से लेकर प्रहार तक में माहिर

समाजवादी पार्टी ने त्रिस्तरीय वॉर रूम बनाया है। सबके काम बंटे हुए हैं। एक टीम अखबारों में सियासी समाचारों और बयानों को जुटाती है। विपक्षी नेता कौन सी चाल चल रहे हैं, यह टीम उसका पता लगाती है। पार्टी की रीति-नीति के हिसाब से यह टीम उसकी काट के लिए रणनीति भी तैयार करती है। वहीं, दूसरी ओर डिजिटल टीम है जिसकी कमान आशीष यादव संभाले हुए हैं।

इसमें करीब 50 पेशेवर लोग शामिल हैं। ये लोग अलग-अलग पालियों में कार्य करते हैं। इनके साथ एक टीम चुनिंदा पांच लोगों की है। यह टीम सिर्फ और सिर्फ रणनीतियां बनाती है। खासकर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर अपनी बात कैसे रखी जाए, इसकी रणनीति तैयार कर यह टीम दूसरी टीमों को निर्देश देती है।  

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर क्या ट्रेंड कर रहा है, उसको कैसे अपने पक्ष में इस्तेमाल किया जाए, कैसे विपक्षी हमले का जवाब देना है, यह सब इस टीम के योद्धा करते हैं। पांच लोगों की एक तीसरी टीम भी है, जो समाजवादी पार्टी की ओर से लॉन्च किए गए एप का संचालन करती है। इस एप के जरिए हर विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग ग्रुपों में जुड़ा जा सकता है।

एप में जिला और विधानसभा का ऑप्शन है। उस ऑप्शन में जाने पर अपना मोबाइल नंबर देना होता है। नंबर देते ही संबंधित विधानसभा के ग्रुप में वह शख्स जुड़ जाता है। उस ग्रुप में सपा कार्यालय से भेजे जाने वाले संदेश पहुंचने लगते हैं। इसके अलावा भी अन्य रणनीतियां भी तय करने का काम वॉर रूम से हो रहा है।

बसपा : डिजिटल वॉर रूम से ही बन रही रणनीति
बसपा भी डिजिटल मोड में चुनाव लड़ने के लिए कमर कस चुकी है। प्रत्येक जिले में प्रत्येक प्रत्याशी ने डिजिटल वॉर रूम बनवाया है। इनमें चार से पांच लोगों की टीम लगाई गई है। प्रदेश कार्यालय पर अलग वॉर रूम है।

सबसे अहम वॉर रूम पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के लखनऊ कार्यालय पर काम कर रहा है। यह 24 घंटे चलता है और इसमें छह-छह लोगों की पालियों में ड्यूटी लगाई गई है। यह टीम व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर लगातार लोगों को जोड़ती रहती है। यहीं से प्रत्याशियों के वॉर रूम से संपर्क किया जाता है। 

कौन को-ऑर्डिनेटर कहां है, इस पर भी डिजिटल वॉर रूम से नजर रखी जा रही है। टीमों की ग्राउंड रिपोर्ट इसी के जरिए भेजी जाती है। अहम बात यह है कि बसपा सुप्रीमो मायावती प्रदेश कार्यालय के वॉर रूम से स्वयं भी नजर रखती हैं।

सबसे ज्यादा ग्राफिक्स का प्रयोग 
बसपा के डिजिटल वॉर रूम में सबसे ज्यादा प्रयोग ग्राफिक्स पर किया जा रहा है। सबसे ज्यादा जोर इन्हें प्रभावी और मारक बनाने पर है। ग्राफिक्स फाइनल होते ही उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाता है। इनमें कई ग्राफिक्स तो टॉप ट्रेंड में शामिल रह चुके हैं।

आप : लाइव प्रसारण कराने से लेकर सोशल मीडिया तक पर नजर

आम आदमी पार्टी की आईटी सेल की टीम विधानसभा क्षेत्र, जिला व प्रदेश स्तर पर अलग-अलग है। प्रदेश के केंद्रीय वॉर रूम में करीब 25 लोगों की टीम लैपटॉप के साथ प्रदेश व राजनीतिक दलों की हर प्रतिक्रिया, अपडेट पर नजर रखती है। इसके साथ ही लाइव सभाओं के लिए एक मंच का सेटअप तैयार है। यहीं से वरिष्ठ नेता भाषण या संदेश देते हैं।

लाइव संदेश प्रसारित करने के लिए जिला व विधानसभा स्तर की टीम को जोड़ा जाता है। क्षेत्र के हिसाब से ऑनलाइन सभाएं हो रही हैं, जिन्हें सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाता है। विधानसभा क्षेत्रों व जिलों में मूविंग लाइव सभाएं एलईडी के जरिए कराने की भी योजना है। पार्टी के वरिष्ठ नेता वैभव बताते हैं कि स्टेट टीम नेशनल वॉर रूम से भी जुड़ी है। 

वॉर रूम की टीमों में यह खास
क्रिएटिव कंटेंट टीम : यह टीम तय करती है कि पार्टी सुप्रीमो या नेता को क्या बोलना है, कौन से स्लोगन, कौन से नारे कहां दिए जा सकते हैं। कौन सा नया गीत कहां गाया जा सकता है। टीम ऐसे रोचक कंटेंट भी तैयार करती है, जो आमजन के मन पर असर करे।

रिसर्च टीम : यह टीम युवाओं, महिलाओं, बेरोजगारों, बुजुर्गों की स्थिति के साथ ही धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक स्थिति से जुड़े आंकड़ों का डाटाबेस तैयार करती है। कब क्या अच्छा, कब बुरा हुआ, घटनाओं का पूरा इतिहास, भूगोल विभिन्न माध्यमों से जुटाकर पार्टी को उसकी जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराती है।

कैंपेन टीम : यह टीम तय करती है कि लोगों का ध्यान खींचने के लिए कौन-कौन से अभियान चलाए जा सकते हैं। कहां वर्चुअल संगोष्ठी की जरूरत है। संगोष्ठी को कैसे प्रभावी बनाया जा सकता है, यह सब कैंपेन टीम तय करती है।

सर्वे, डाटा एनालिसिस टीम : यह टीम अलग-अलग क्षेत्रों में सर्वे कराने के साथ ही डाटा जुटाने का काम देखती है। जातिगत समीकरणों पर भी यही टीम नजर रखती है।

मॉनिटरिंग टीम :  जिसको जो जिम्मेदारी दी गई है, वह पूरी हो रही है या नही, अभियान तय प्रक्रिया के हिसाब से चल रहे हैं कि नहीं, प्रत्याशी की सक्रियता कितनी है, इन सब पर मॉनिटरिंग टीम ही नजर रखती है।

मीडिया व सोशल मीडिया वॉच : यह टीम प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आने वाली सियासी खबरों पर निगाह रखती है। साथ ही नेताओं को उसकी जानकारी देकर जवाब तैयार कराती है।

परदे के पीछे के सुल्तान थामे हैं चुनाव की कमान

आज कहानी उनकी जोे परदे के पीछे के सुल्तान हैं। जो चाणक्य हैं चुनावी समर में अपने दल के। जो मुद्दों को धार देते हैं। नारों को हथियार बनाते हैं। समीकरणों का चौसर बिछाते हैं। पूरे दल में तालमेल बिठाते हैं। ताकि हर नजर लक्ष्य पर बनी रहे। जो दांवपेंच मेंे माहिर हैं। जो हवा के रुख को मोड़ने के लिए न केवल फॉर्मूले गढ़ते हैं, बल्कि सलीके से उसे अमली जामा भी पहनाते हैं।

ये अपनी पार्टी के ऐसे सिपाही हैं, जिन्हें न अपना नाम चमकाने की चाह है और न चेहरा दिखाने की ललक। बस एक ही धुन है, अपनी पार्टी को जीत दिलाना। आइए, आपको इस चुनावी समर में दलों के रिमोट कंट्रोल से रूबरू कराते हैं… 
कहानी उनकी जो अपने दलों के रिमोट कंट्रोल हैं

भाजपा : ये हैं चुनावी समर के रणनीतिकार
धर्मेंद्र प्रधान : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भाजपा ने यूपी का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। कुर्मी जाति से आने वाले प्रधान का लंबा राजनीतिक अनुभव है। महाराष्ट्र और बिहार में भी भाजपा के चुनाव प्रभारी रहे हैं। सरकार व संगठन में सामंजस्य बनाकर पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं। चुनाव की घोषणा से पहले वोट बैंक बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कराने के साथ ही प्रदेश में भाजपा के नेताओं, सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों में तालमेल बिठाने में इनकी अहम भूमिका है।


अनुराग ठाकुर : केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को भाजपा ने प्रदेश में सह चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। हिमाचल प्रदेश से आने वाले अनुराग ठाकुर बिरादरी के हैं। दो बार भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अनुराग प्रदेश के युवाओं को भाजपा के पक्ष में लामबंद कर रहे हैं। पार्टी के प्रचार-प्रसार की रणनीति तैयार करते हैं।


सुनील बंसल : 2013 में अमित शाह के साथ सह प्रभारी के रूप में यूपी आए सुनील बंसल पिछले सात वर्षों से प्रदेश में भाजपा के महामंत्री संगठन हैं। 2017 का विधानसभा चुनाव हो या फिर 2019 का लोकसभा चुनाव, इनकी अहम भूमिका रही। प्रदेश में चुनाव से पहले माहौल बनाने के लिए ‘100 दिन 100 काम’ की योजना तैयार की।

चुनावी रणनीति तैयार करने के साथ उसे अमली जामा पहनाने में माहिर हैं। 
अंकित सिंह चंदेल : सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार की कमान सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के संयोजक अंकित सिंह चंदेल संभाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर ‘फर्क साफ  है’, ‘सोच ईमानदार-काम दमदार’ जैसे अभियान चलाने के साथ विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। तीन लाख से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप पर प्रचार कराने के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लाइव प्रचार में पार्टी को मजबूत बनाया है।

कांग्रेस के ये हैं चाणक्य
सचिन नायक : मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले सचिन नायक राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन के महासचिव रह चुके हैं। यूथ कांग्रेस के आंतरिक चुनाव के दौरान चुनाव आयुक्त की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई। वर्तमान में राष्ट्रीय सचिव हैं। यूपी में 388 विधानसभा क्षेत्रों में 86 हजार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। अब प्रचार अभियान में जुटे हैं।


धीरज गुर्जर : दो बार राजस्थान में विधायक चुने गए। एनएसयूआई राजस्थान के अध्यक्ष भी रहे हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय सचिव रहते हुए मेरठ और आसपास के जिलों में संगठन का काम देख रहे हैं। राजस्थान के भीलवाड़ा के मिल मजदूर परिवार से ताल्लुक रखने वाले धीरज गुर्जर सीएए-एनआरसी आंदोलन के दौरान राहुल और प्रियंका गांधी को दोपहिया वाहन से गंतव्य तक ले जाने के कारण भी चर्चा में रहे।

सपा : ये हैं सियासी सिपहसालार
राजेंद्र चौधरी : गाजियाबाद निवासी एमएलसी राजेंद्र चौधरी पार्टी के पुराने सिपहसालार हैं। साये की तरह अखिलेश यादव के साथ रहते हैं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता हैं। पार्टी के नेताओं का संदेश सपा अध्यक्ष तक पहुंचाने से लेकर नीतिगत फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं।
उदयवीर सिंह : फिरोजाबाद निवासी उदयवीर एमएलसी हैं।

जब अखिलेश यादव धौलपुर के मिलिट्री स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे तो उसी स्कूल में उदयवीर भी थे। जेएनयू से एमए, एमफिल करने के बाद राजनीति में उतरे। सियासी गणित बैठाने में माहिर हैं। विभिन्न दलों के नेताओं को सपा में शामिल कराने में इनकी अहम भूमिका रही।


सुनील सिंह यादव साजन : उन्नाव निवासी एमएलसी सुनील सिंह यादव की पकड़ युवाओं पर मजबूत है। लखनऊ में केकेसी डिग्री कॉलेज के छात्र संघ से निकलने के बाद सपा छात्रसभा के  प्रदेश अध्यक्ष रहे। 2012 चुनाव के पहले चली रथयात्रा में अखिलेश यादव के साथ साये की तरह रहे। अब भी विभिन्न यात्राओं में पहले से संबंधित जिले में पहुंच कर रोडमैप से लेकर अन्य नीतिगत फैसले लेते हैं।

बसपा : ये हैं अहम किरदार, निभा रहे जिम्मेदारी
मेवा लाल गौतम : पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मेवालाल गौतम पूरी तरह से परदे के पीछे रहकर काम करते हैं। उन पर सभी को-आर्डिनेटर, जिलाध्यक्ष को  संदेश भेजने की जिम्मेदारी है।

इसके अलावा कौन कहां से आ रहा है, यह भी वही देखते हैं। बैठकों से लेकर चरणवार पदाधिकारियों को बुलाने, उनको बसपा सुप्रीमो का संदेश भेजने की जिम्मेदारी भी वह बड़ी गंभीरता से निभा रहे हैं। यहां तक कि उम्मीदवारों की सूची भी उन्हीं के हस्ताक्षर से जारी होती है।


आरए मित्तल : प्रदेश कार्यालय प्रभारी आरए मित्तल बैठकों की व्यवस्थाओं का जिम्मा बखूबी निभाते हैं। पार्टी के पदाधिकारियों में तालमेल बिठाने में भी उनकी अहम भूूमिका होती है। प्रतिदिन बैठक लेतेे हैं।


कपिल मिश्रा : राष्ट्रीय महासचिव के बेटे कपिल मिश्रा खास तौर से युवा ब्राह्मणों को बसपा से जोड़ने का अभियान चलाए हुए हैं। प्रतिदिन बैठकों के जरिये कार्यकर्ताओं को भी साधते हैं। जिलों में भी उनकी सक्रियता रहती है। इसी तरह परेश मिश्रा भी परदे के पीछे रहकर काम कर रहे हैं। 

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