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Himachal : स्कूल से शुरू हॉकी के जुनून ने पद्मश्री चरणजीत(Charnjit Singh) को पहुंचा दिया ओलंपिक, उनके नक्शे कदम पर कई युवा |

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Himachal : परिजनों की मानें तो चरणजीत सिंह(Charnjit Singh) के कोच ने शुरूआती समय में ही उनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाने की बात कह दी थी। पंजाब के जालंधर में उन्होंने हॉकी के गुर सीखे। चरणजीत सिंह के सिर हॉकी का जादू चढ़कर बोलता था। वह हॉकी की कोई भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वह आतुर रहते थे। 

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पद्मश्री दिवंगत चरणजीत सिंह को स्कूल से हॉकी खेलना का जुनून था। यही जुनून उन्हें यूनिवर्सिटी से राष्ट्रीय स्तर और ओलंपिक तक ले गया। पाकिस्तान (उस समय) के लायलपुर से शिक्षा लेने के साथ हॉकी के गुर सीखे और ओलंपिक तक का सफर तय किया। परिजनों की मानें तो चरणजीत सिंह के कोच ने शुरूआती समय में ही उनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाने की बात कह दी थी।

पंजाब के जालंधर में उन्होंने हॉकी के गुर सीखे। चरणजीत सिंह के सिर हॉकी का जादू चढ़कर बोलता था। वह हॉकी की कोई भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वह आतुर रहते थे। मौसम कैसा भी हो, सुबह मैदान में हॉकी स्टीक लेकर पहुंचते और अभ्यास में डट जाते। लग्न और मेहनत से ही वह पंजाब यूनिवर्सिटी की टीम में जगह बना पाए। इसके बाद फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

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यूनिवर्सिटी के बाद उन्होंने 1953 के बाद नेशनल खेलना शुरू किया। यह सफरनामा लगातार चलता रहा। हॉकी खिलाड़ी और उनके छोटे भाई भूपिंद्र सिंह ने बताया कि करीब एक दर्जन नेशनल खुले चुके चरणजीत सिंह ने कई मेडल अपने नाम किए। ओलंपिक में उनकी एंट्री 1960 में हुई। जबकि गोल्ड मेडल का सपना उनकी कप्तानी में 1964 में पूरा हुआ।

उन्होंने बताया कि पारिवारिक पृष्ठभूमि खेल जगत से न होने के बावजूद उनकी हॉकी के प्रति काफी लग्न थी। इसी लग्न ने उन्हें मुकाम तक पहुंचाया। एशियन गेम्स और ओलंपिक दोनों स्पर्धाएं उनके जीवन में टर्निंग प्वाइंट रहे हैं। ऊना जिला उनकी पैतृक भूमि रही है, लेकिन अधिकतर पंजाब में ही वह हॉकी को लेकर आगे बढ़े। 1963 में अर्जुन अवार्ड और 1964 में पद्मश्री की घोषणा हुई। जबकि दोनों चरणजीत सिंह को 1964 में ही मिले। उनके लिए और परिजनों के लिए यह लम्हे बेहद खास रहे।

ऊना में आज भी युवा हॉकी को मानते हैं पहली पसंद

राष्ट्रीय खेल हॉकी ऊना जिले के युवाओं के लिए आज भी पहली पसंद है। इसका कारण चरणजीत सिंह और दीपक ठाकुर जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। आज भी युवाओं के लिए दोनों खिलाड़ी प्रेरणास्रोत हैं। चरणजीत सिंह के प्रति युवाओं का खासा लगाव है। देश को अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में तीन-तीन मेडल दिलाना हर युवाओं के लिए प्रेरणा देने के लिए काफी है। बीते वर्ष जिले से 31 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की हॉकी की विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी अपने खेल का लोहा मनवा चुके हैं। प्रदेश सरकार का इकलौता एस्ट्रो टर्फ भी ऊना में स्थित है। इस मैदान में 12 महीने प्रदेश भर से हॉकी खिलाड़ी अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए पहुंचते हैं।

जिले में वर्तमान में 50 से अधिक  विभिन्न वर्गों के खिलाड़ी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। बीते साल में सब जूनियर वर्ग में 12, जूनियर वर्ग में 6, वरिष्ठ वर्ग पुरुष में तीन, वरिष्ठ महिला वर्ग में तीन, जूनियर महिला वर्ग में दो और इंटर कॉलेज में पांच खिलाड़ी वर्ष 2021 में देश भर में विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। ऊना बीते तीन वर्षों से लगातार इंटर कॉलेज प्रतियोगिता विजेता रहा है। इस संबंध में हॉकी कोच आशीष सेन ने बताया कि ऊना जिले के युवाओं में हॉकी को लेकर काफी रुचि है। 

चरणजीत सिंह, दीपक के नक्शे कदम पर कई युवा

जिले से पूर्व ओलंपियन पद्मश्री चरणजीत सिंह, ओलंपियन दीपक ठाकुर खिलाड़ियों के आदर्श हैं। जिले में तनिश कुमार, सतविंद्र, दलजीत सिंह, हर सिंह राष्ट्रीय स्तर पर खेल का दमखम दिखा चुके हैं। इसके अलावा पवन बस्सी, सरबजीत सिंह, जगतार सिंह, गगनदीप सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। दूसरी तरफ लड़कियों में प्रियंका, तनू और रितिका ने विभिन्न हॉकी खेल प्रतियोगिताओं में खेलकर जिले का नाम रोशन कर चुकी हैं।

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