The big oil companies that once ruled the whole world are now worried about shrinking business, looking for future in other fields | कभी पूरी दुनिया पर राज करने वाली दिग्गज तेल कंपनियां अब सिकुड़ते बिजनेस से चिंतित, तलाश रहीं दूसरे क्षेत्रों में भविष्य

Published by Razak Mohammad on

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मुंबई (जेवियर ब्लास)34 मिनट पहले

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  • विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रीन एनर्जी की तरफ देख रही दुनिया में अब तेल का अपने पुराने गोल्डन एज में वापस जाना मुमकिन नहीं

पिछली सदी में तेल सबसे ताकतवर बिजनेस में से एक था। बल्कि यूं कहें कि पावर सेंटर बना हुआ था। बदलते वक्त और जरूरतों के साथ अब इस सेक्टर का सूरज डूबने लगा है। ब्रिटिश पेट्रोलियम के सीईओ ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अब तेल के बिजनेस का ग्रोथ पूरा हो चुका है। ग्रीन एनर्जी की तरफ देख रही दुनिया में अब तेल का अपने पुराने गोल्डन एज में वापस जाना मुमकिन नहीं।

तेल के बड़े खिलाड़ी अब नए आशियाने तलाश रहे हैं

बिजनेस के इस बदलाव को समझते हुए तेल के बड़े खिलाड़ी अब नए आशियाने तलाश रहे हैं। यह परिवर्तन और इसका दबाव कितना मजबूत है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि बीपी के सीईओ तेल के बिजनेस के साथ जुड़ी दूसरी कमोडिटी के मुनाफे के बारे आजकल बताते पाए जाते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग नहीं जानते कि ब्रिटिश पेट्रोलियम कॉफी भी बेचता है। पिछले साल हमने 15 करोड़ कप कॉफी बेची। सीईओ लूनी कंपनी के फ्यूल स्टेशन पर बेचे जाने वाले अपने पेय पदार्थ कियोस्क के बारे में जिक्र करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह बहुत मजबूत और विकासमान बिजनेस है।

तेल जैसी एनर्जी का दौर अब जा रहा है

ऑयल के बड़े अधिकारियों को अपने फ्यूचर बिजनेस प्लान को बेचने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। तेल इतिहासकार और एएचएस मार्किट कंसल्टेंट के वाइस चेयरमैन डेनियल यार्गिन कहते हैं कि यह समय ऊर्जा के लिए संक्रमण काल है। तेल जैसी एनर्जी का दौर अब जा रहा है और सौर ऊर्जा व दूसरी ग्रीन एनर्जी का समय आ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण जैसे मुद्दे को अब सरकारें इग्नोर नहीं कर सकती हैं।

जीवनशैली ने तेल को ग्लोबल पावर बना दिया

20वीं सदी में ऑटो इंडस्ट्री, नए रूप लेते शहर और आधुनिक होती जीवनशैली ने तेल को ग्लोबल पावर बना दिया था। तेल इंटरेस्ट एक मजबूत राजनीतिक ताकत बन गई। 1970 के तेल संकट के बाद ओपेक का जन्म हुआ, मध्य एशिया में युद्ध हुआ और 80 के दशक में इससे विभिन्न आंदोलन उपजे। एक समय देश की टॉप—5 कंपनियों से से चार तेल की कंपनियां थीं। हालांकि अब वक्त अलग है और परिस्थितियां बदल गई हैं। इस सेक्टर की पांचों बड़ी कंपनियां एक्सॉन, सेवरॉन, शेल, टोटल और बीपी अब पूरी तरह से कुछ अलग करने का रास्ता तलाश रही हैं।

सोलर एनर्जी में निवेश किया जा रहा

शेवरॉन ने जुलाई में अपने शेयर होल्डर्स से कहा कि हम नए फ्यूल स्टेशन खरीद रहे हैं और सोलर एनर्जी में निवेश कर रहे हैं। हम नए रास्ते तलाश रहे हैं। बीपी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगले 30 सालों में तेल की खपत लगातार कम होगी। बीपी भी विंड और सोलर पावर में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। बीपी ने साल 2030 तक 50 गीगावाट रिन्यूएबल इलेक्ट्रिसिटी पैदा करने का लक्ष्य रखा है जो अभी 2.5 गीगावाट है।

बीपी का 26 लाख बैरल प्रतिदिन का ऑयल और गैस का प्रोडक्शन है। कंपनी ने अपने निवेशकों से बोला है कि साल 2030 तक इसे 15 लाख बैरल प्रतिदिन पर लाएंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक यह तेल के गोल्डेन इरा के ढलान की तरफ जाने का स्पष्ट संकेत है। सभी बड़ी कंपनियों ने अपने बिजनेस का नया क्षेत्र तलाशना शुरू कर दिया है।

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