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स्पैनिश फ्लू यानी जब मौत के तांडव ने हिंदी के महान कवि को जन्म दिया

निराशा के बाद आशा का समय होता है। जीवन की गति यही है कि मृत्यु के बाद फिर से बनाना है। पहले विश्व युद्ध के उतार के समय स्पैनिश फ्लू (स्पेनिश फ्लू 1918) ने दुनिया भर में मौत का तांडव किया। भारत में केवल एक अनुमान के हिसाब से 1 करोड़ 80 लाख लोग मारे