SC का केंद्र को निर्देश, कहा- सोशल मीडिया पर परेशानी शेयर करने वालों पर न हो कार्रवाई

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न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की शीर्ष वाली एक पीठ देश में को विभाजित -19 प्रबंधन से संबंधित एक स्वचालित: संज्ञान मामले पर परीक्षण कर रही थी। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बगैर ऑक्सीजन के छटपटा रही जनता को हम सुनना चाहते हैं। केंद्र की ओर से जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली को 400 मिलियन टन ऑक्सीजन दिया गया है, लेकिन इसमें अनंत करने की क्षमता उनके पास नहीं है।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में कोरोना महामारी केंद्र द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर सुनवाई की गई। परीक्षण के दौरान कोर्ट ने केंद्र से टेस्टिंग, ऑक्सीजन और वैक्सीनेशन को लेकर उठाए गए कदमों से जुड़े सवाल किए। साथ ही सोशल मीडिया पर दर्द बयां करते हुए लोग व डॉ। नूर का भी मुद्दा उठा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘लगातार सेवा दे रही डॉ और नर्स बहुत बुरी स्थिति में हैं। चाहे प्राथमिक हो या सरकारी अस्पताल उन्हें उचित आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। अंतिम वर्ष के 25,000 मेडिकल छात्र और 2 लाख नर्सिंग छात्रों की भी मदद लेने पर विचार होना चाहिए। ‘ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान पर विचार करें। सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीनेशन की सुविधा दी जाए। यह वैक्सीन निर्माता कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता है कि वह किस राज्य को बहुत वैक्सीन उपलब्ध करवाए। यह केंद्र के नियंत्रण में होना चाहिए, कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन के लिए आने से नहीं रोका जाए हमें लोगों की आवाज सुनानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछले 70 वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ नहीं हुआ है जो महामारी के कारण उत्पन्न हुई परिस्थितियों में अभी भी बहुत काम करने की जरूरत है। छटपटा रही जनता को हम सुनना चाहते हैं कोर्ट ने कहा कि बगैर ऑक्सीजन के छटपटा रही जनता को हम सुनना चाहते हैं। केंद्र की ओर से जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दिल्ली को 400 मिलियन टन ऑक्सीजन दिया गया है, लेकिन इसमें अनंत करने की क्षमता उनके पास नहीं है। एक और निर्माता ऑक्सीजन देना चाहता है लेकिन दिल्ली के पास क्षमता नहीं है यह बढ़ाना होगा। ज्ञानवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने ऑक्सीजन सप्लाई के आवंटन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पक्ष की हम समीक्षा करेंगे ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर ऐसी व्यवस्था बने कि लोगों को पता चल सके कि ऑक्सीजन की सप्लाई इतनी की गई और कौन से अस्पताल में यह कैसे है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को लेकर सवाल किया था। कोर्ट ने पूछा कि वैक्सीन की कीमत में अंतर क्यों रखा गया और निरक्षर लोग जो कोविन ऐप इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, वे वैक्सीनेशन के लिए कैसे पंजीकरण करवा सकते हैं। वैक्सीन के पास संसाधन हैं कोर्ट ने कहा वैक्सीन विकसित करने में सरकार का भी पैसा लगा दिया गया है। इसलिए, यह सार्वजनिक संसाधन है। साथ ही सवाल किया केंद्र सरकार 100 फीसद वैक्सीन क्यों नहीं खरीद रही है। एक हिस्सा खरीद कर बाकी बिक्री के लिए वैक्सीन निर्माता कंपनियों को स्वतंत्र रूप से क्यों दिया गया है? जस्टिस चंद्रचूड़ ने सोशल मीडिया पर सिरदर्द का इजहार करने वाले यूजर्स का मुद्दा भी उठाया और कहा कि अगर लोग सोशल मीडिया के जरिए अपने हालात बयां कर रहे हैं तो उस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

अस्पताल में भर्ती को लेकर क्या नीति है? केंद्र से कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि राष्ट्रीय स्तर पर अस्पताल में भर्ती को लेकर क्या नीति है और जो संक्रमण के मामले में आरटीपीआर से पता नहीं चल रहा है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘केंद्र को वैक्सीन के निर्माण में तेजी लाने के लिए किए गए निवेश का निवेशरा भी देना चाहिए। यह निजी वैक्सीन निर्माताओं को किए गए फंडिंग में केंद्र का महत्वपूर्ण हस्तक्षेप होगा। बता दें कि महामारी के संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई राष्ट्रीय योजना पर विचार किया जाना है। कोर्ट ने केंद्र से स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या कोरोना से सामना के लिए सेना का इस्तेमाल किया जा सकता है और टीकाकरण के अलग-अलग कीमतों का आधार और तर्क क्या हैं। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस रवींद्र भट की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए ट्रायल शुरू की है।








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