Indian airline companies need Rs 11,000 crore interest-free, local traffic down 80% in five months, Indian Aviation Industry, Aviation Sector in India, Aviation India, | भारतीय एयरलाइन कंपनियों को ब्याज मुक्त 11 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता, पांच माह में लोकल ट्रैफिक 80% नीचे गिरा

Published by Razak Mohammad on

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नई दिल्ली15 मिनट पहले

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इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने बताया कि भारत में इस साल एविएशन और उससे जुड़े क्षेत्र से करीब 30 लाख नौकरियां गईं हैं। जबकि इंडस्ट्री रेवेन्यू में 80.97 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

  • कोरोना महामारी के पहले से ही भारत में एक के बाद एक एयरलाइन कंपनियां दम तोड़ती जा रही हैं।
  • अमेरिका एकमात्र देश जिसने एविएशन सेक्टर को राहत पैकेज देने का एलान किया है।

कोरोना महामारी के कारण हवाई उड़ानों पर बुरा असर पड़ा है। जुलाई तक बीते पांच महीनों में लोकल ट्रैफिक करीब 80 फीसदी नीचे गिरा है। ऐसे में एयरलाइन कंपनियां सरकार से 1.5 बिलियन डॉलर (11.04 हजार करोड़ रु.) की ब्याज मुक्त कर्ज की मांग की है। यह जानकारी सिविल एविएशन मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने आज संसद में दी।

लोकल ट्रैफिक 80 फीसदी तक नीचे गिरा

एयरलाइन कंपनियों की बिगड़ते हालात से सरकार की भी चिंताएं भी बढ़ी हैं। सरकार एयरलाइन कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है, जिससे स्थिति सामान्य बनी रहे। बता दें कि 31 जुलाई तक 5 माह में केवल 120 लाख यात्रियों ने ट्रैवल किया। यानी लोकल ट्रैफिक करीब 80 फीसदी नीचे गिरा है।

एविएशन और उससे जुड़े क्षेत्र से करीब 30 लाख नौकरियां गईं

उधर इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने बताया कि भारत में इस साल एविएशन और उससे जुड़े क्षेत्र से करीब 30 लाख नौकरियां गईं हैं। जबकि इंडस्ट्री रेवेन्यू में 11 बिलियन डॉलर ( 80.97 हजार करोड़ रु.) का घाटा हुआ है। सिडनी बेस्ड एविएशन क्षेत्र की संस्थान सीएपीए (CAPA) के मुताबिक कोरोना के पहले से ही भारत में एक के बाद एक एयरलाइन कंपनियां दम तोड़ती जा रही हैं।

इसकी वजह सरकार या उनके ओनर द्वारा एयरलाइंस को आर्थिक मदद न मिलना है। संस्थान के मुताबिक महामारी से पहले भी भारत में एविएशन कारोबार करना मुश्किल हो गया था। इसकी वजह फ्यूल पर लगने वाली ऊंची दरें हैं, जो अन्य देशों के मुकाबले अधिक है।

राहत पैकेज की आवश्यकता

सीएपीए ने कहा कि भारतीय एयरलाइंस की हालत स्थिर बनाए रखने के लिए 2.5 बिलियन डॉलर (18.42 हजार करोड़ रु.) के राहत पैकेज की आवश्यकता है। वहीं दूसरी ओर घरेलू एयरलाइन कंपनियां सरकार से एविएशन टरबाइन फ्यूल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी को खत्म करने की मांग कर रही हैं। इसके अलावा जेट फ्यूल को दक्षिण एशियाई देशों के गुड्स एंड सर्विसेज में शामिल करने की भी मांग की है।

कोरोना से बिगड़ी स्थिति

संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले एविएशन मार्केट में भी एयरलाइन कंपनियां कर्ज भुगतान में राहत की मांग कर रही हैं। कंपनियां कर्ज को नॉन-परफॉर्मिंग कर्ज में तब्दील करने की मंशा रखती हैं। उन्होंने बताया कि वायरस बढ़ते प्रकोप से अफ्रीका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक एयरलाइंस प्रभावित हुईं हैं। दरअसल महामारी के चलते कंपनियों ने हवाई उड़ानों में कटौती की है। इसकी वजह बॉर्डर पर लगे प्रतिबंध और महामारी से बनी स्वास्थ्य चिंता है।

अमेरिका ने किया है पैकेज का एलान

ऐसे हालात में सिर्फ अमेरिका ही एकमात्र देश है, जिसने एविएशन सेक्टर को राहत पैकेज देने का एलान किया है। जबकि भारतीय एयरलाइंस के लिए सरकार द्वारा अभी तक किसी भी प्रकार के मॉनेटरी पैकेज का एलान नहीं किया गया है। इस पर जानकारों का कहना है कि देश अबतक के सबसे खराब आर्थिक हालात से गुजर रहा है। ऐसे राहत पैकेज के एलान में देरी हो सकती है।

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