Trending News

हिमाचल: चुनावी वर्ष के बजट के लिए विधायकों से मांगी दो-दो प्राथमिकताएं

Himachal Pradesh

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में 27 और 28 जनवरी, 2022 को वार्षिक बजट 2022-23 के लिए विधायक प्राथमिकताओं के निर्धारण के लिए दो दिवसीय बैठकें तय हुई हैं। ये बैठकें हिमाचल प्रदेश सचिवालय आर्म्सडेल भवन के सम्मेलन कक्ष में होंगी। 

चुनावी साल के बजट अनुमानों को बनाने से पहले राज्य सरकार के योजना विभाग ने सभी विधायकों से अपने-अपने क्षेत्र की दो-दो प्राथमिकताएं मांग ली हैं। इन पर चर्चा के लिए बैठकें भी बुला ली हैं। सड़क, पेयजल और सिंचाई की प्राथमिकताओं के अलावा इस बार सीवरेज की प्राथमिकताएं भी इनमें शुमार हैं।  मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में 27 और 28 जनवरी, 2022 को वार्षिक बजट 2022-23 के लिए विधायक प्राथमिकताओं के निर्धारण के लिए दो दिवसीय बैठकें तय हुई हैं। ये बैठकें हिमाचल प्रदेश सचिवालय आर्म्सडेल भवन के सम्मेलन कक्ष में होंगी। 

27 जनवरी 2022 को पूर्वाह्न 10.30 बजे से 1.30 बजे तक सोलन, बिलासपुर, शिमला तथा अपराह्न 2 बजे से 5 बजे तक मंडी, कुल्लू और सिरमौर जिले के विधायकों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। 28 जनवरी को पूर्वाह्न 10.30 बजे से 1.30 बजे तक कांगड़ा और किन्नौर जिलों तथा अपराह्न 2 से 5 बजे तक चंबा, ऊना, हमीरपुर और लाहौल व स्पीति जिले के विधायकों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में वार्षिक बजट 2022-23 की विधायक प्राथमिकताओं के निर्धारण के लिए विचार-विमर्श किया जाएगा। विधायकों से वर्ष 2022-23 के लिए मित्तव्ययता उपायों, वित्तीय संसाधन जुटाने और बेहतर प्रशासन के संदर्भ में प्राप्त सुझावों पर भी चर्चा होगी। 

ऑनलाइन पढ़ाई ने बिगाड़ी आदत: मोबाइल फोन न मिलने से चिड़चिड़े हो रहे बच्चे

सार

मनोचिकित्सकों के अनुसार जागरूक अभिभावक तो काउंसलिंग करवा रहे हैं, लेकिन कुछ इन लक्षणों को अनदेखा कर रहे हैं। स्कूल बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई का फायदा हुआ था, लेकिन अब मोबाइल की लत नुकसानदायक है। इससे आंखों पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है, मानसिक विकार भी आ रहे हैं। 

मोबाइल फोन(सांकेतिक)

मोबाइल फोन(सांकेतिक)

newsreportinglive.com

विस्तार

कोरोना महामारी के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई ने बच्चों को मोबाइल फोन का गुलाम बना दिया। अब बच्चों की आदत इतनी बिगड़ गई है कि कुछ देर के लिए उन्हें मोबाइल फोन न मिले तो उनमें चिड़चिड़ापन, बेचैनी, घबराहट, गुस्सा, व्यवहार में आक्रामकता, बातचीत ही बंद कर देना या खाना छोड़ देने जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। स्मार्ट फोन के हाथ में आते ही उनका मूड ठीक हो रहा है। इससे परेशान कई अभिभावक बच्चों को लेकर नेरचौक मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। स्कूल से आते ही बच्चे मोबाइल फोन में ही लगे रहते हैं। इससे आंखों पर बुरा असर तो पड़ ही रहा है, मानसिक विकार भी आ रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार जागरूक अभिभावक तो काउंसलिंग करवा रहे हैं, लेकिन कुछ इन लक्षणों को अनदेखा कर रहे हैं। स्कूल बंद होने से ऑनलाइन पढ़ाई का फायदा हुआ था, लेकिन अब मोबाइल की लत नुकसानदायक है। 

फोन लेने के लिए बेटी बनाती बहाने

मां-बाप अच्छे ओहदे पर हैं। उनकी इकलौती बेटी निजी स्कूल में नौवीं की छात्रा है। मेडिकल कॉलेज नेरचौक में काउंसलिंग के लिए पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि स्कूल जाने से पहले और आने के बाद कभी पढ़ाई तो कभी किसी अन्य बहाने से उनकी बेटी फोन पर लगी रहती है। टोकने पर चिड़चिड़ेपन के साथ उसका व्यवहार आक्रामक हो जाता है। 

फोन न दें तो बेटा छोड़ देता खाना

एक शिक्षक दंपती भी अपने बेटे की मोबाइल की लत से परेशान है। इन्होंने नेरचौक मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग ली है। अभिभावकों के अनुसार उनका बेटा आठवीं में पढ़ता है। मोबाइल उससे छूट नहीं रहा। व्हाट्सएप में चेटिंग, इंस्टाग्राम और गेमिंग के लिए फोन किसी न किसी बहाने ले लेता है। फोन न दो तो खाना छोड़ देता है और चुप्पी साध लेता है। 

मोबाइल ज्यादा इस्तेमाल करने से बच्चों में डिप्रेशन, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों में सिर और आंखों में दर्द, भूख न लगना, आंखों की रोशनी कम होना, गर्दन में दर्द जैसी शारीरिक बीमारियां हो रहीं हैं। इसलिए बच्चों को फोन से दूर रखें। -डॉ. देवेंद्र शर्मा, सीएमओ मंडी

www.newreportinglive.com/

अभिभावक बच्चों के सामने मोबाइल इस्तेमाल कम करें : डॉ. रमेश

नेरचौक मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ. रमेश कुमार का कहना है कि मोबाइल का कम इस्तेमाल ठीक है, अन्यथा यह लत है। मूड ठीक करने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल भी ऐसा ही है, जैसे ड्रग्स व्यवहार को प्रभावित करती है। बच्चों का स्क्रीन समय घटाएं और अभिभावक रोल मॉडल हैं, इसलिए वे भी मोबाइल का कम ही इस्तेमाल करें।

अभिभावक यह करें

  1. – अभिभावक बच्चे के साथ अधिक समय बिताएं
  2. – खाली समय में बच्चों से घर के कामों में सहयोग लें
  3. – बच्चे को आउटडोर गेम्स, पेंटिंग, डांस, म्यूजिक और अन्य कक्षाओं में भेजें
  4. यह है स्क्रीन टाइम : अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार
  5. -18 महीने से कम उम्र के बच्चे स्क्रीन का इस्तेमाल न करें
  6. -18 से 24 महीने के बच्चे को माता-पिता उच्च गुणवत्ता वाले प्रोग्राम दिखाएं
  7. – 2 से 5 साल के बच्चे एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल न करें
  8. – छह साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों के स्क्रीन देखने का समय दो घंटे तक सीमित हो

https://www.amarujala.com/shimla/online-studies-spoiled-the-habit-children-are-becoming-irritable-due-to-non-availability-of-mobile-phones?pageId=1

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Posts

Himachal Pradesh Kullu Mandi Shimla

Himachal : ऊपरी शिमला(Upper Shimla), मंडी(Mandi) के ऊंचे इलाके, कुल्लू (Kullu) कटा |

Himachal (Shimla) :

Himachal : ऊपरी शिमला(Upper Shimla) क्षेत्र और मंडी(Mandi) और कुल्लू(Kullu) जिलों के ऊंचे इलाकों से संपर्क टूट गया है, जबकि राज्य के अधिकांश

Himachal Pradesh Solan

Himachal : कसौली(Kasauli), सोलन(Solan), बरोग(Barog), दगशाई में सीजन की पहली बर्फबारी |

Himachal (Solan) :

Himachal : सोलन जिले के कसौली(Kasauli), सोलन(Solan), बरोग(Barog) और डगशाई में शुक्रवार को सीजन की पहली बर्फबारी हुई।

इन हिल स्टेशनों पर

Himachal Pradesh Kangra

Himachal : कांगड़ा( Kangra ) में 100 पूर्व भूस्खलन चेतावनी प्रणालियां होंगी |

Himachal :

Himachal( Kangra ) : कांगड़ा के जिला प्रशासन ने कांगड़ा जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए उपग्रह आधारित सबसिडेंस सिस्टम प्रोफाइल के