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हिमाचल: उपचुनावों में जीत पर हाईकमान ने थपथपाई प्रदेश कांग्रेस की पीठ

Himachal Pradesh

प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा कि हाईकमान ने प्रदेश में चल रही पार्टी गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर संतोष जताया है। 

कांग्रेस हाईकमान ने मंडी संसदीय सीट सहित जुब्बल-कोटखाई, फतेहपुर और अर्की विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जीत के लिए प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की पीठ थपथपाई है। संगठन की मजबूती के लिए हिमाचल में चलाए जा रहे पार्टी के कार्यक्रमों को लेकर भी सराहना मिली है। केंद्रीय नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर से प्रदेश की ऑनलाइन रिपोर्ट ली। 

हाईकमान ने हिमाचल कांग्रेस की गतिविधियों और कार्यक्रमों की रविवार को दोपहर बाद चार बजे समीक्षा की। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला भी मौजूद रहे। इन नेताओं ने प्रदेश में पार्टी के जन जागरण अभियान को लेकर संतोष जताया। कहा कि प्रदेश कांग्रेस सराहनीय कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी 13 संगठनात्मक जिलों के तहत यह अभियान 66 विधानसभा क्षेत्रों में चलाया गया है। इसके अलावा प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने 110 किलोमीटर तक पदयात्रा की। 

केंद्रीय नेताओं को बताया गया कि प्रदेशों में चलाए जा रहे सदस्यता अभियान के लिए अभी तक 1 लाख 54 हजार फार्म बांटे गए हैं। मार्च के अंत तक सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। पार्टी दफ्तर से अभी भी सदस्यता फार्म भेजे जा रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा कि हाईकमान ने प्रदेश में चल रही पार्टी गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर संतोष जताया है। 

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अध्ययन में खुलासा: खतरनाक काला अजार रोग फैला रही हिमाचल की सैंड फ्लाई

काला अजार को काला ज्वर भी कहते हैं। यह सैंड फ्लाई के काटने से होता है। यह धीरे-धीरे पनपने वाला स्थानिक रोग है। यह जीशमेनिया जींस के प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होता है। 

हिमाचल प्रदेश की सैंड फ्लाई खतरनाक काला अजार रोग फैला रही है। यह बात भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अध्ययन से सामने आई है। शिमला जिले के रामपुर, कुल्लू के निरमंड और किन्नौर के निचार से एकत्र किए गए नमूनों से यह खुलासा हुआ है। इन क्षेत्रों में मौजूद रेत मक्खियों में 7.69 फीसदी पॉजिटिव पाई गई हैं।

आईसीएमआर के भारतीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों सुमन लता, गौरव कुमार, वीपी ओझा और रमेश सी धीमान ने इस रेत मक्खी से निपटने की रणनीतिक योजना बनाने की भी सलाह दी है। विशेषज्ञों ने इस अध्ययन के लिए काला अजार से पूर्व में प्रभावित रहे क्षेत्रों के विभिन्न गांवों से साल 2017 से 2019 तक अप्रैल और सितंबर के दौरान रेत मक्खियों को एकत्र किया।

इन रेत मक्खियों की पहचान फ्लेबोटोमस, लांगिडक्टस और फ्लेबोटोमस मेजर के रूप में की गई। इनमें लांगिडक्टस का घनत्व सर्वाधिक पाया गया। जिन गांवों से मक्खियों के ये नमूने इकट्ठा किए गए, उनकी समुद्र तल से ऊंचाई 947 से 2,130 मीटर है। हालांकि ये भूमिगत जल की उपस्थिति से दूर थीं।

सैंड फ्लाई के काटने से होता है काला अजार रोग 
काला अजार को काला ज्वर भी कहते हैं। यह सैंड फ्लाई के काटने से होता है। यह धीरे-धीरे पनपने वाला स्थानिक रोग है। यह जीशमेनिया जींस के प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होता है। इन क्षेत्रों में यह लीशमैनिया डोनोवनी परजीवी के कारण होता है।

रोग के परजीवी आंतरिक अंगों जैसे यकृत, प्लीहा, अस्थि मज्जा आदि में प्रवास करते हैं। उसके बाद यह बुखार शुरू होता है। इलाज न होने पर मरीज की मौत भी हो जाती है। इससे बुखार, वजन में कमी, एनीमिया, यकृत, प्लीहा आदि में सूजन होती है।

पर्यटन: ट्राउट का आखेट करेंगे सैलानी, काष्ठकुणी शैली में बने होम स्टे में रहेंगे

पर्यटन विभाग चौहारघाटी के प्रमुख स्थलों को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर पर्यटन व्यवसाय को पंख लगाने का खाका खींच चुका है। यदि कवायद सिरे चढ़ी तो चौहारघाटी के झटिंगरी और बरोट में पर्यटन कारोबार विकसित होने से बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।

मंडी जिले के द्रंग क्षेत्र की चौहारघाटी में पर्यटन को पंख लगेंगे। पर्यटन विभाग ने इसके लिए खास योजना तैयार की है। जिसमें पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए बरोट में सैलानियों के लिए ट्राउट एंगलिंग का इंतजाम किया जाएगा। मत्स्य विभाग के फार्म में यह व्यवस्था की जाएगी।  वहीं हर्बल विलेज का निर्माण किया जाएगा। जिसमें काष्ठकुणी शैली में निर्मित होम स्टे में सुकून के पल बिता सकेंगे और आर्गेनिक विधि से तैयार फल, सब्जियों का स्वाद सैलानी चख सकेंगे। 

नर्गू वन्यजीव अभ्यारण्य को भी निहार सकेंगे
बरोट 278 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले नर्गू वन्यजीव अभ्यारण्य का गेटवे भी है। यह मोनल, जंगली बिल्लियों, बंदरों और काले भालू का घर है। सैलानी इस अभ्यरण्य के निहार सकें, इसके लिए भी विशेष प्रबंध किए जाएंगे।  बरोट, कुल्लू और कांगड़ा घाटी के ट्रैकिंग मार्ग का भी आधार है। यह क्षेत्र सब्जियों और दालों के उत्पादन के लिए भी प्रसिद्ध है। इसमें चारों ओर खूबसूरत दृश्य हैं जो हर किसी को आकर्षित करते हैं। हर साल हजारों पर्यटक इस जगह पर आते हैं।

https://www.amarujala.com/shimla/tourism-activities-in-barot-mandi-himachal-pradesh

कुल्लू से लेकर चंबा तक ट्रैक उपलब्ध
चौहारघाटी के सिल्हबुधाणी से कुल्लू के लिए वाया भुभु जोत और बरोट से चंबा के लिए वाया छोटा बड़ा भंगाल भी ट्रैकिंग रूट उपलब्ध है। यहां विदेशी पर्यटक ट्रैकिंग का आनंद लेते हैं। पर्यटन विभाग इन रूट को भी विकसित करने की योजना बना रहा है। बरोट, झटिंगरी, फुलाधार, घोघरधार, बधौणधार और पराशर घाटी में पर्यटन व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में सरकार अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए बल दे रही है।

शानन जलाशय सुंदरता को लगाता है चार चांद
बरोट 1835 मीटर की ऊंचाई पर स्थित उहल नदी के तट पर रमणीय नगर है। जो अपने ट्राउट फिश फार्म के लिए प्रसिद्ध है। यह मत्स्यपालन विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है। अंग्रेजों द्वारा निर्मित शानन पावर प्रोजेक्ट का जलाशय यहां स्थित है जो बरोट की सुंदरता बढ़ाता है।

धार्मिक पर्यटन से जुड़ेगा देव पशाकोट मंदिर
पर्यटन विभाग बरोट वैली को धार्मिक पर्यटन से भी जोड़ेगा। देव पशाकोट मंदिर से सैलानियों को जोड़ा जाएगा। जहां सैलानी अध्यात्म की अनुुभूति भी पा सकेंगे। यह मंदिर एक पहाड़ी की तलहटी में उहल नदी के तट पर स्थित है, मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 15 मिनट का समय लगता है। जिस मार्ग को संवारे जाने की भी योजना है।

लपास गांव झरने को पिकनिक स्पॉट में संवारा जाएगा
लपास गांव में स्थित झरने को पिकनिक स्पॉट में संवारा जाएगा। यह गांव बरोट से करीब 13 किमी दूूूूर है। बरोट से 6 किलोमीटर दूर झटिंगिरी मार्ग पर सड़क से एक कच्चे लिंक रोड़ से लपास गांव पहुंचा जा सकता है। गांव में बहुत ही पुराने लकड़ी के पारंपरिक घर विद्यमान है। गांव के साथ लगती घाटी में एक सुंदर सा झरना है, जिसे पिकनिक स्पॉट के रूप में स्थानीय लोगों द्वारा विकसित किया गया है और अब इसे पर्यटन विभाग चार चांद लगाएगा। 

करेरी झील को बनाया जाएगा मुख्य आकर्षण
बरोट से 10 किमी की दूरी पर स्थित, करेरी झील भी मुख्य दर्शनीय पर्यटन स्थलों में से एक है। जहां ट्रेकिंग की जाती है। साल भर अद्भुत ग्लेशियर और पहाड़ की धाराओं के साथ, यहां का बहता हुआ पानी बिल्कुल साफ है। चारों ओर शांत वातावरण और खूबसूरती से भरा हुआ यह स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा। 

चौहारघाटी को पर्यटन की दृष्टि से निखारने की कवायद शुरू है। यहां विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है, ताकि पर्यटन की दृष्टि से क्षेत्र को निखारा जा सके। कुछ अनछुए पर्यटन स्थलों को नई मंजिल नई राहें से जोड़े जाने की योजना है। साहसिक और धार्मिक पर्यटन को यहां बढ़ावा दिया जाएगा। ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मुहैया हों।

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