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हिमाचल: भव्य दिव्य शिव धाम मंडी में दिखेगी काष्ठकुणी शैली की झलक, नौ हेक्टेयर में हो रहा निर्माण, देखें तस्वीरें

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शिवधाम का थ्री डी डिजाइन। – फोटो : अमर उजालाहिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी में विकास को नए आयाम देने वाले भव्य दिव्य शिव धाम में मंडी कलम चित्रशैली और काष्ठकुणी शैली की झलक भी दिखेगी। इन प्राचीन कलाओं के साथ धाम के दोनों मुख्य द्वार तैयार किए जाएंगे। शिवधाम में प्रवेश के लिए तैयार हो रहे कैलाश द्वार में भी इसकी झलक देखने को मिलेगी।

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विलुप्त हो रही मंडी कलम और काष्ठकुणी शैली से सैलानियों को रूबरू करवाकर इसे संजोया जाएगा। कांगणीधार में साढ़े नौ हेक्टेयर क्षेत्र में 150 करोड़ से बन रहा दिव्य शिवधाम भव्यता में किसी अजूबे से कम नहीं होगा। पहले चरण में 40 करोड़ रुपये खर्चे जा रहे हैं। इसमें पहाड़ी की कटिंग और जमीन को समतल बनाने के अलावा मंदिरों के स्तंभ खड़े का काम तेजी से चल रहा है।

मंडी में निर्माणाधीन शिवधाम।

2 of 7मंडी में निर्माणाधीन शिवधाम। – फोटो : संवादमंडी कलम चित्रशैली
मंडी कलम चित्रशैली के रूप में एक लोककला है, जो रियासतकाल में फली-फूली। यह पहाड़ी चित्रकला प्राकृतिक रंगों से अपने चित्रण की बारीकियों के लिए मशहूर रही है। इसमें गणेश, सूर्य, पांडवों, दुर्गा, काली जैसे धार्मिक चरित्रों के अलावा सैनिक, यमराज, नारी, जलकुंभ आदि का चित्रण किया गया है। यह कला जनमानस के हाथों संवरी और कुशल चितेरों के संरक्षण में बढ़ी है।

मंडी में निर्माणाधीन शिवधाम।

3 of 7मंडी में निर्माणाधीन शिवधाम। – फोटो : संवादकाष्ठकुणी शैली 
काष्ठकुणी शैली के मकान, भवन, मुख्य द्वारों के निर्माण की प्राचीन कला है। इसमें अधिकतर लकड़ी का इस्तेमाल होता है। उस पर नक्काशी भी की जाती है। इस शैली के निर्माण में सीमेंट का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं किया जाता है। दीवारों पर मिट्टी और गोबर के मिश्रण से बने पदार्थ का पलस्तर किया जाता है। साथ में लकड़ी इस्तेमाल की जाती है।

शिमला का थ्री डी डिजाइन।

4 of 7शिमला का थ्री डी डिजाइन। – फोटो : अमर उजालाशिव धाम से विकास को नए आयाम
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट शिवधाम का 27 फरवरी, 2021 को मंडी में शिलान्यास किया था। मंडी में शिव धाम से विकास को नए आयाम मिलेंगे। लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। शिवधाम को रोपवे और उड़ान के तहत हवाई सेवाओं से भी जोड़ा जा रहा है। विज्ञापन

शिवधाम मंडी का डिजाइन।

5 of 7शिवधाम मंडी का डिजाइन। – फोटो : अमर उजालाभव्य दिव्य शिव धाम, बेजोड़ होगा स्वरूप
उपायुक्त अरिंदम चौधरी और पर्यटन विभाग मंडी के उपनिदेशक एसके पराशर ने बताया कि शिवधाम में प्रवेश के लिए कैलाश द्वार होगा। यहां भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा स्थापित होगी। गंगा कुंड होगा, शिव वंदना के नाम से ओरिएंटेशन सेंटर होगा। रुद्रा मंडल और डमरू मंडल होगा। यहां भगवान शिव के डमरू के दर्शन और डमरू मंडल के पास खाने-पीने की वस्तुएं मिलेंगी।

शिवधाम का थ्री डी डिजाइन।

6 of 7शिवधाम का थ्री डी डिजाइन। – फोटो : अमर उजालाभोले की नगरी में शिव धाम की सार्थकता
शैव मत से प्रभावित इस पहाड़ी रियासत की आधुनिक राजधानी की स्थापना बाबा भूतनाथ के मंदिर के निर्माण के साथ ही हुई है। शिव नगरी मंडी में त्रिलोकीनाथ, महामृत्युंजय, पंचवक्त्र, अर्धनारीश्वर, नीलकंठ, शिव शंभू महादेव, एकादश रुद्र महादेव, रुद्र महादेव आदि अनेक शिव मंदिर हैं, जो बाबा भूतनाथ की नगरी को छोटी काशी के रूप में पहचान दिलाते हैं। 

शिवधाम का थ्री डी डिजाइन।

7 of 7शिवधाम का थ्री डी डिजाइन। – फोटो : अमर उजालाइतिहास की करवटें
मंडी रियासत का इतिहास सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से प्रारंभ होता है। जब सुकेत के राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहूसेन ने अपने भाई से रुष्ट होकर कुछ विश्वास पात्र सैनिकों को साथ लेकर लोहारा जो तत्कालीन सुकेत रियासत की राजधानी थी, छोड़कर बल्ह के ही हाट में अपनी राजधानी बसाई थी।  इसी के साथ मंडी रियासत की स्थापना हुई थी। बाहूसेन ने ही हाटेश्वरी माता के मंदिर की स्थापना की थी। इसके पश्चात बाहूसने मंगलौर में जा बसा था।

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