Economy News In Hindi : Bidding deadline for Air India increased by two months, now bidding till August 31 | एअर इंडिया के लिए बोली लगाने की अंतिम तिथि दो महीने बढ़ी, अब 31 अगस्त तक लगा सकते हैं बोली

Published by Razak Mohammad on

  • दीपम ने जारी किया नोटिफिकेशन, कोविड-19 को बताया वजह
  • एअर इंडिया पर 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज

दैनिक भास्कर

Jun 28, 2020, 10:51 AM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 के असर को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर सरकारी विमान सेवा कंपनी एअर इंडिया के लिए बोली लगाने की अंतिम तारीख में बढ़ोतरी कर दी है। डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (दीपम) की ओर से शनिवार को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब एअर इंडिया के लिए 31 अगस्त तक बोली लगाई जा सकती है। नोटिफिकेशन के मुताबिक, तकनीकी बोली के आधार पर पात्र बोली प्रदाताओं की सूचना 14 सितंबर तक दी जाएगी। 

अंतिम तारीख में तीसरी बार बदलाव

सरकार ने एअर इंडिया के लिए बोली लगाने की समय सीमा में तीसरी बार बदलाव किया है। इस साल 27 जनवरी को जारी आरंभिक सूचना पत्र (पीआईएम) में 17 मार्च तक निविदा मंगाई थी। बाद में इसे बढ़ाकर 30 अप्रैल और फिर 30 जून किया गया था। सरकार ने कर्ज के बोझ तले दबी एयर इंडिया की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के लिए निविदा जारी की है। साथ ही एअर इंडिया की एअर इंडिया एक्सप्रेस में शत-प्रतिशत और एअर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी भी इसी बोली प्रक्रिया के तहत बेची जा रही है।

एअर इंडिया पर करीब 60,074 करोड़ रुपए का कर्ज

पीआईएम के मुताबिक, एअर इंडिया पर कुल 60,074 करोड़ रुपए का कर्ज है। इस बिक्री से एअर इंडिया का 23,286.5 करोड़ रुपए का कर्ज निपटाया जाएगा। जबकि 37 हजार करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ सरकार खुद उठाएगी। डील के मुताबिक सफल खरीदार को एअर इंडिया का मैनेजमेंट कंट्रोल भी सौंप दिया जाएगा।

88 साल पहले टाटा ने शुरू की थी यह एयरलाइन

एअर इंडिया की शुरुआत साल 1932 में टाटा ग्रुप ने की थी। 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने कराची से मुंबई की फ्लाइट खुद उड़ाई थी। वे देश के पहले लाइसेंसी पायलट थे। 1946 में इसका नाम बदलकर एअर इंडिया हुआ था। आजादी के बाद 1953 में इसका नेशनलाइजेशन हुआ। घरेलू उड़ानों के लिए इंडियन एयरलाइन्स और इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए एअर इंडिया बनाई गई। दोनों कंपनियों के ज्वाइंट एंटरप्राइज के तौर पर वायुदूत कंपनी शुरू हुई जो रीजनल फीडर कनेक्टिविटी देती थी। 1993 में वायुदूत का इंडियन एयरलाइन्स में मर्जर हो गया जिससे पूरे ग्रुप पर कर्ज बढ़ गया।

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