Covid-19 affected budget, no printed documents this year | वित्त मंत्री के हाथों में इस बार नहीं होगा कागज वाला बही-खाता, आजादी के बाद पहली बार नहीं छपेगा बजट दस्तावेज

Published by Razak Mohammad on

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12 मिनट पहले

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  • संसद सदस्यों को दिए गए थे दो विकल्प: सभी को सॉफ्ट कॉपी दी जाए या किसी को नहीं
  • जो संसद सदस्य टेक सैवी नहीं, उनके लिए सीमित संख्या में कॉपी छापना मुमकिन नहीं था

आजादी के बाद 1947 से हर साल छपते आ रहे बजट दस्तावेज पर भी कोविड-19 का ग्रहण लग गया है। इस महामारी के डर से केंद्रीय बजट 2021-22 के दस्तावेज नहीं छापे जा रहे हैं। सरकार को इसके लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई है। सभी संसद सदस्यों को इस बार बजट के दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी मुहैया कराई जाएगी।

प्रिंटिंग प्रेस से संसद तक कोविड-19 के संक्रमण का डर

ऐसे में इस बार बजट के दिन संसद के बाहर उसके दस्तावेज पहुंचाने वाले ट्रक नजर नहीं आएंगे। केंद्रीय बजट की छपाई हर साल वित्त मंत्रालय के अपने प्रिंटिंग प्रेस में होती रही है। वित्त मंत्रालय का कहना था कि बजट के दस्तावेजों की छपाई के लिए 100 से ज्यादा लोगों को दो हफ्ते तक एक ही जगह रखना होता है। कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए सरकार इतने लोगों को इतने लंबे समय तक प्रिंटिंग प्रेस में नहीं रख सकती।

सॉफ्ट कॉपी पर संसद सदस्यों को मनाने के लिए हुई बड़ी मशक्कत

सूत्रों के मुताबिक, संसद सदस्यों को मनाने में लोकसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बजट के डॉक्यूमेंट्स को लेकर दो विकल्प रखे गए थे: सभी संसद सदस्यों को सॉफ्ट कॉपी दी जाए या किसी को नहीं। जो संसद सदस्य टेक सैवी नहीं हैं उनके लिए सीमित संख्या में कॉपी छापना मुमकिन नहीं था। दलील दी गई कि दस्तावेज छापे गए तो उसको लाने ले जाने में कोविड-19 के संक्रमण का जोखिम हो सकता है।

एक पखवाड़ा पहले हलवा सेरेमनी से छपाई प्रक्रिया की शुरुआत

स्वतंत्र भारत में केंद्रीय बजट पहली बार 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसके दस्तावेज तब से हर साल छापे जाते रहे हैं। वित्त मंत्रालय बजट दस्तावेजों की छपाई प्रक्रिया की शुरुआत के मौके पर हर साल हलवा सेरेमनी करता है। सेरेमनी का आयोजन संसद में बजट पेश किए जाने से एक पखवाड़ा पहले नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता है। अब जबकि बजट ही नहीं छप रहा है तो प्रसाद वाला हलवा सेरेमनी कहां से होगी।

चमड़े के ब्रीफकेस से पारंपरिक बही-खाते में बदला बजट दस्तावेज

वित्त मंत्री केंद्रीय बजट के दिन बजट दस्तावेज आमतौर पर चमड़े के ब्रीफकेस में ले जाते रहे हैं। इस परंपरा की शुरुआत देश के पहले वित्त मंत्री (1947-1949) आर के शणमुखम चेट्टी ने की थी। 2019 और 2020 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट दस्तावेज लाल रंग के पारंपरिक बही खाते में ले गई थीं। वित्त मंत्री 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2021-22 पेश करने जा रही हैं।

1999 के बाद से शाम 5 बजे के बजाय सुबह 11 बजे पेश हो रहा है बजट

बजट पेश किए जाने के समय में भी समय के साथ बदलाव हुआ है। 1999 तक बजट फरवरी के अंतिम कामकाजी दिन को शाम पांच बजे पेश किया जाता रहा। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदल दिया और बजट को सुबह 11 बजे पेश करना शुरू किया।

92 साल से अलग आ रहा रेल बजट 2016 में केंद्रीय बजट में समाहित

2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ऐलान किया कि अब से केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश होगा। इसके अलावा 92 साल से अलग पेश होते आ रहे रेल बजट को केंद्रीय बजट में समाहित कर दिया गया।

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