Coronavirus Vaccine Update: वैज्ञानिकों ने कोरोना को फैलने में मदद करने वाले जीन का पता लगाया, वैक्सीन बनाने में मिलेगी मदद

Published by Razak Mohammad on


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 29 Jun 2020 11:03 AM IST

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जीन-एडिटिंग टूल सीआरआईएसपीआर-सीएएस9 का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे जीन का पता लगाया है जो वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में सार्स-सीओवी-2 को फैलने में सहायता करते हैं। सार्स-सीओवी-2 की वजह से ही कोरोना वायरस बीमारी होती है। 

ऐसे जीन की स्क्रीनिंग करने के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे उन्हें यह समझने में मदद मिल सकती है कि मानव शरीर में रोगजनक की प्रतिकृति कैसे बनती है। साथ ही उन्हें संभावित उपचार और वैक्सीन बनाने के बारे में जानकारी मिल सकती है, जिससे वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।

अमेरिका में येल स्कूल ऑफ मेडिसिन, ब्रॉड इंस्टीट्यूट ऑफ एमआईटी और हार्वर्ड के शोधकर्ताओं द्वारा एक अध्ययन में कहा गया कि संक्रमण के लिए आवश्यक कारकों की पहचान कोविड-19 रोगजनन के तंत्र को सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण है। ये कारक संवेदनशीलता में भिन्नता प्रकट करते हैं।

यह भी पढ़ें: भारत में केवल 4.16 फीसदी कोरोना मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत, रिकवरी रेट भी बढ़ा

अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने सुसंस्कृत अफ्रीकी हरे बंदर की कोशिकाओं में विशिष्ट जीन को एकत्र किया और उन जीन-एडिटेड कोशिकाओं को संक्रमित किया, जो सार्स-सीओवी-2 के साथ उस जीन की पहचान करते हैं जो ‘प्रो वायरल’ या ‘एंटी वायरल’ थे।

इस अध्ययन को 17 जून को बायोरेक्सिव में प्रकाशित किया गया। इसमें दावा किया गया कि एसीई2 रिसेप्टर और कैथेप्सिन एल ने संक्रमण पैदा करने में वायरस को सहायता प्रदान की।  

जीन-एडिटिंग टूल सीआरआईएसपीआर-सीएएस9 का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे जीन का पता लगाया है जो वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में सार्स-सीओवी-2 को फैलने में सहायता करते हैं। सार्स-सीओवी-2 की वजह से ही कोरोना वायरस बीमारी होती है। 

ऐसे जीन की स्क्रीनिंग करने के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे उन्हें यह समझने में मदद मिल सकती है कि मानव शरीर में रोगजनक की प्रतिकृति कैसे बनती है। साथ ही उन्हें संभावित उपचार और वैक्सीन बनाने के बारे में जानकारी मिल सकती है, जिससे वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।

अमेरिका में येल स्कूल ऑफ मेडिसिन, ब्रॉड इंस्टीट्यूट ऑफ एमआईटी और हार्वर्ड के शोधकर्ताओं द्वारा एक अध्ययन में कहा गया कि संक्रमण के लिए आवश्यक कारकों की पहचान कोविड-19 रोगजनन के तंत्र को सूचित करने के लिए महत्वपूर्ण है। ये कारक संवेदनशीलता में भिन्नता प्रकट करते हैं।

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अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने सुसंस्कृत अफ्रीकी हरे बंदर की कोशिकाओं में विशिष्ट जीन को एकत्र किया और उन जीन-एडिटेड कोशिकाओं को संक्रमित किया, जो सार्स-सीओवी-2 के साथ उस जीन की पहचान करते हैं जो ‘प्रो वायरल’ या ‘एंटी वायरल’ थे।

इस अध्ययन को 17 जून को बायोरेक्सिव में प्रकाशित किया गया। इसमें दावा किया गया कि एसीई2 रिसेप्टर और कैथेप्सिन एल ने संक्रमण पैदा करने में वायरस को सहायता प्रदान की।  



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