’21वीं सदी में स्कूली शिक्षा’ पर बोले पीएम मोदी, नए भारत, नई उम्मीदों और नई आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति

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23 मिनट पहले

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  • 29 जुलाई, 2020 को केंद्र सरकार ने 34 साल बाद नई शिक्षा नीति को दी मंजूरी
  • इससे पहले 7 अगस्त और 7 सितंबर को हुए वेबिनार को भी संबोधित कर चुके हैं पीएम

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत ’21वीं सदी में स्कूली शिक्षा’ पर होने वाले दो दिवसीय एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति नए भारत, नई उम्मीदों और नई आवश्यकताओं की पूर्ति का एक माध्यम है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के बारे में देश भर के शिक्षकों से #MyGov पर उनके सुझाव मांगे थे। इसके लिए एक हफ्ते में 15 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं। ये सुझाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति को और ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद करेंगे।

प्रधानमंत्री सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक बयान में कहा था कि, शिक्षा मंत्रालय एक सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, जो गुरुवार को “शिक्षा पर्व” के पहले भाग के रूप में शुरू हो चुका है।

8 से 25 सितंबर तक मनाया जा जाएगा “शिक्षा पर्व”

शिक्षकों को सम्मानित करने और नई शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने के लिए 8 से 25 सितंबर तक यह “शिक्षा पर्व” (शिक्षा पर्व) मनाया जा रहा है। पीएमओ ने कहा कि एनईपी के कई पहलुओं पर वर्चुअल कॉन्फ्रेंस, विभिन्न वेबिनार​​​​​​ और कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है, जिसे पिछली शिक्षा नीति 1986 के 34 साल बाद घोषित किया गया है। 34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति के तहत देशभर में विभिन्न पहलुओं पर वेबिनार और वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।

इससे पहले 7 सितंबर को भी किया था संबोधित

इससे पहले मोदी ने 7 अगस्त को “NEP 2020 के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधार पर आयोजित एक कॉन्क्लेव पर उद्घाटन भाषण” और 7 सितंबर को नई नीति पर हुई “गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस” को भी संबोधित किया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा था कि शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से केंद्र, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, सभी जुड़े होते हैं, लेकिन शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए।

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