10 हजार पन्नों के आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस का दावा, 25 व्हाट्सएप ग्रुप से फैलाया गया था दंगा

Published by Razak Mohammad on


इस साल फरवरी में हुए उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के सिलसिले में पुलिस ने बुधवार को सफूरा जरगर, नताशा नरवाल, देवांगना कलीता और ताहिर हुसैन समेत 15 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। चार्जशीट में सबूत के तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप चैट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को शामिल किया गया है। आरोप पत्र के मुताबिक, व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर दिल्ली में दंगे भड़काए गए।

आरोपियों के खिलाफ अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और आईपीसी की विभिन्न धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई है। 10 हजार पन्नों से ज्यादा के आरोप पत्र में 747 गवाहों के नाम हैं। इनमें से 51 गवाहों ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान दर्ज करवाए हैं। मामले की जांच अभी चल रही है और आने वाले समय में एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। 

कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कहा, जांच में सीडीआर और व्हाट्सएप चैट को शामिल किया गया है। आरोप पत्र में दंगों की साजिश का सिलसिलेवार ब्योरा और अहम घटनाओं की जानकारी दी गई है। पुलिस ने साक्ष्य के तौर पर सीलमपुर और जाफराबाद इलाकों में दंगों के दौरान 24 फरवरी की व्हाट्सएप चैट का जिक्र किया है। साजिशकर्ता मौके पर मौजूद लोगों को हिंसा के लिए उकसा रहे थे। साजिशकर्ता सीधे दंगाइयों के संपर्क में थे।

25 धरनास्थल के लिए 25 व्हाट्सएप ग्रुप

पुलिस के अनुसार, सीएए और एनआरसी के खिलाफ 25 शहरों में 25 धरनास्थल थे। प्रत्येक शहर के लिए 25 व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। इससे यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि ये सीएए विरोधी ग्रुप हैं, लेकिन इनके जरिये लोगों को उकसाया गया। 23 से 26 फरवरी के बीच हुए दंगों में 53 लोगों की जान गई थी, जबकि 200 से ज्यादा घायल हुए थे।

चार्जशीट में इन्हें बनाया आरोपी

आरोप पत्र में ताहिर हुसैन के साथ मोहम्मद परवेज अहमद, मोहम्मद इलियास, खालिद सैफी, पूर्व पार्षद इशरत जहां, मीरान हैदर, सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तन्हा, शादाब अहमद, नताशा नरवाल, देवांगना कलीता, तसलीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान और अतहर खान को नामजद किया गया है।

उमर खालिद से मिला था ताहिर

चार्जशीट के मुताबिक, ताहिर शाहीन बाग धरने में 8 जनवरी को उमर खालिद और खालिद सैफी से मिला था। इसके बाद पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के जामिया कार्यालय में भी मीटिंग हुई थी। खालिद सैफी ने ताहिर को भड़काया था। उमर खालिद ने पीएफआई से मदद उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था।



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