हिसार पहुंचा देश का सबसे शक्तिशाली इंजन, खींचेगा डेढ़ किमी लंबी ट्रेन, ट्रायल हुआ सफल

Published by Razak Mohammad on

अश्वनी कुमार, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)

Updated Tue, 15 Sep 2020 09:31 AM IST

डब्ल्यूएजी-12 इंजन।
– फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

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अब देश का सबसे शक्तिशाली इंजन डब्ल्यूएजी-12 मालगाड़ियां दौड़ाएगा। इसको लेकर ट्रायल भी सफल हो चुका है। खास बात यह है कि दो इलेक्ट्रिक इंजन मिलाकर एक यूनिट बनाया गया है, जिसमें मालगाड़ी के ज्यादा डिब्बे खींचने की शक्ति होगी। छह हजार हॉर्सपावर यानी एक इंजन की बात करें तो वह मालगाड़ी के 58 से 60 डिब्बे खींच सकता है, मगर दो इंजन से तैयार किया गया यह डब्ल्यूजी-12 इंजन मालगाड़ी के 150 डिब्बे खींचने की क्षमता रखता है।

यह देश का सबसे शक्तिशाली इंजन है। यह इंजन 11 सितंबर रात को हिसार भी पहुंचा और अगले दिन सुबह ही वापस चला गया। हिसार पहुंचने पर लोको पायलट को भी इंजन की ट्रेनिंग दी गई। खास बात है कि डब्ल्यूएजी-12 इंजन अकेला डेढ़ किलोमीटर तक लंबी मालगाड़ी को खींचने की क्षमता रखता है। 

इस इंजन की सामान्य गति 100 किलोमीटर प्रतिघंटा है, मगर इसे 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से भी चलाया जा सकता है। इसकी लंबाई 35 मीटर है। इसमें एक हजार लीटर हाई कंप्रेसर कैपिसिटी के दो टैंक है। यह इंजन मालगाड़ियों को दौड़ाने में कारगर सिद्ध होगा। इससे जहां एक ओर समय की बचत होगी, वहीं इस इंजन में लोको पायलट को भी बेहतरीन सुविधाएं मिलेगी।

इंजन की यह है खासियत

  • दो इलेक्ट्रिक इंजन को मिलाकर बनाया गया।
  • एक इंजन छह हजार हॉर्सपावर का है, यानी दो इंजन मिलाकर बनने से 12 हजार हॉर्सपावर का हो गया।
  • इस इंजन में शौचालय की भी सुविधा।
  • यह इंजन मेक इन इंडिया की तर्ज पर बिहार के मधेपुरा में बनाया गया। 
  • इंजन में एसी भी लगा हुआ है। 
  • हिसार पहुंचा था इंजन
अब देश का सबसे शक्तिशाली इंजन डब्ल्यूएजी-12 मालगाड़ियां दौड़ाएगा। इसको लेकर ट्रायल भी सफल हो चुका है। खास बात यह है कि दो इलेक्ट्रिक इंजन मिलाकर एक यूनिट बनाया गया है, जिसमें मालगाड़ी के ज्यादा डिब्बे खींचने की शक्ति होगी। छह हजार हॉर्सपावर यानी एक इंजन की बात करें तो वह मालगाड़ी के 58 से 60 डिब्बे खींच सकता है, मगर दो इंजन से तैयार किया गया यह डब्ल्यूजी-12 इंजन मालगाड़ी के 150 डिब्बे खींचने की क्षमता रखता है।

यह देश का सबसे शक्तिशाली इंजन है। यह इंजन 11 सितंबर रात को हिसार भी पहुंचा और अगले दिन सुबह ही वापस चला गया। हिसार पहुंचने पर लोको पायलट को भी इंजन की ट्रेनिंग दी गई। खास बात है कि डब्ल्यूएजी-12 इंजन अकेला डेढ़ किलोमीटर तक लंबी मालगाड़ी को खींचने की क्षमता रखता है। 

इस इंजन की सामान्य गति 100 किलोमीटर प्रतिघंटा है, मगर इसे 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से भी चलाया जा सकता है। इसकी लंबाई 35 मीटर है। इसमें एक हजार लीटर हाई कंप्रेसर कैपिसिटी के दो टैंक है। यह इंजन मालगाड़ियों को दौड़ाने में कारगर सिद्ध होगा। इससे जहां एक ओर समय की बचत होगी, वहीं इस इंजन में लोको पायलट को भी बेहतरीन सुविधाएं मिलेगी।

इंजन की यह है खासियत

  • दो इलेक्ट्रिक इंजन को मिलाकर बनाया गया।
  • एक इंजन छह हजार हॉर्सपावर का है, यानी दो इंजन मिलाकर बनने से 12 हजार हॉर्सपावर का हो गया।
  • इस इंजन में शौचालय की भी सुविधा।
  • यह इंजन मेक इन इंडिया की तर्ज पर बिहार के मधेपुरा में बनाया गया। 
  • इंजन में एसी भी लगा हुआ है। 
  • हिसार पहुंचा था इंजन

इंजन डब्ल्यूएजी-12 देश का सबसे शक्तिशाली इंजन है। यह इंजन मालगाड़ियां दौड़ाने में कारगर सिद्ध होगा। यह इंजन हिसार भी पहुंचा था, मगर अगले ही दिन चला गया। दो इलेक्ट्रिक इंजन से तैयार किया गया। यह काफी ताकतवर है। – जितेंद्र कमल, चीफ लोको इंस्पेक्टर, रेलवे



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