हिमाचल में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सदन में रखे तीन विधेयक

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Updated Thu, 10 Sep 2020 05:00 AM IST

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

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उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने इन्वेस्टर्स मीट के बाद हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने को तीन संशोधन विधेयक सदन में प्रस्तुत किए। हिमाचल प्रदेश ठेका श्रम विनियमन और उत्सादन अधिनियम संशोधन विधेयक सदन में रखा गया। इसमें सरकार ने व्यवस्था की है कि अब राज्य के उद्योगों में उत्पादन की जरूरत अनुसार कामगार रखे जा सकेंगे। बीस या बीस से अधिक कामगारों को अनुबंध पर रखा जा सकेगा। ये कामगार एक साल तक अनुबंध में रख सकेंगे। 

हिमाचल प्रदेश औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक 2020 में व्यवस्था की है कि राज्य में निवेशकों को अधिक आकर्षित किया जाएगा। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में लंबे समय से संशोधन नहीं किया गया था। सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों को आकृष्ट करने में बाधा आ रही थी। उद्योगों के विवादों को सुलझाने को सरल कर दिया है। सरकार मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अनुसार देश और प्रदेश में कारोबार करने की सुगमता की जरूरत महसूस कर रही है। औद्योगिक संस्थान के साथ कामगारों को एक सहायक और कारोबार अनुकूल वातावरण देने के लिए यह संशोधन विधेयक लाया है। 

हिमाचल प्रदेश कारखाना संशोधन विधेयक 2020 में संशोधन भी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किया गया है। किसी कारखाने में दस से अधिक काम करते हैं और बिजली का इस्तेमाल सामान तैयार नहीं होता है तो वहां बीस मजदूरों को रखा जा सकेगा। जिन कारखानों में बिजली का उपयोग किया जाता है  और बीस कामगार काम करते हैं तो ऐसे कारखानों में चालीस कामगार रखे जा सकेंगे। ऐसी लघु इकाइयां भी कारखाने की परिभाषा में आती हैं। मजदूरों को 115 दिनों का ओवर टाइम और दोगुनी मजदूरी दी जा सकेगी। 

उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने इन्वेस्टर्स मीट के बाद हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने को तीन संशोधन विधेयक सदन में प्रस्तुत किए। हिमाचल प्रदेश ठेका श्रम विनियमन और उत्सादन अधिनियम संशोधन विधेयक सदन में रखा गया। इसमें सरकार ने व्यवस्था की है कि अब राज्य के उद्योगों में उत्पादन की जरूरत अनुसार कामगार रखे जा सकेंगे। बीस या बीस से अधिक कामगारों को अनुबंध पर रखा जा सकेगा। ये कामगार एक साल तक अनुबंध में रख सकेंगे। 

हिमाचल प्रदेश औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक 2020 में व्यवस्था की है कि राज्य में निवेशकों को अधिक आकर्षित किया जाएगा। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में लंबे समय से संशोधन नहीं किया गया था। सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों को आकृष्ट करने में बाधा आ रही थी। उद्योगों के विवादों को सुलझाने को सरल कर दिया है। सरकार मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अनुसार देश और प्रदेश में कारोबार करने की सुगमता की जरूरत महसूस कर रही है। औद्योगिक संस्थान के साथ कामगारों को एक सहायक और कारोबार अनुकूल वातावरण देने के लिए यह संशोधन विधेयक लाया है। 

हिमाचल प्रदेश कारखाना संशोधन विधेयक 2020 में संशोधन भी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए किया गया है। किसी कारखाने में दस से अधिक काम करते हैं और बिजली का इस्तेमाल सामान तैयार नहीं होता है तो वहां बीस मजदूरों को रखा जा सकेगा। जिन कारखानों में बिजली का उपयोग किया जाता है  और बीस कामगार काम करते हैं तो ऐसे कारखानों में चालीस कामगार रखे जा सकेंगे। ऐसी लघु इकाइयां भी कारखाने की परिभाषा में आती हैं। मजदूरों को 115 दिनों का ओवर टाइम और दोगुनी मजदूरी दी जा सकेगी। 

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