हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- शांतिपूर्वक प्रदर्शन ठीक, परंतु आमजन का रास्ता रोकना बर्दाश्त नहीं

Published by Razak Mohammad on

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसानों के शांतिपूर्वक प्रदर्शन पर रोक नहीं है, लेकिन आमजन का रास्ता बाधित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को अब अनलॉक 4 से जुड़े दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिया है।

ऑल इंडिया किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के आह्वान पर पंजाब के 10 किसान संगठनों ने 15 सितंबर को अमृतसर, मोगा, फगवाड़ा (कपूरथला), बरनाला और पटियाला में नेशनल हाईवे पर रोष-प्रदर्शन और चक्का जाम का एलान किाय था। इसी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बुधवार को उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की।

याचिका पर पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि अब यह प्रदर्शन और धरने हट चुके हैं। इस मामले में किसान संगठनों के नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ जो मामले दर्ज किए गए थे, वह वापस ले लिए गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है, उनकी कोई दखल नहीं है।

किसान संगठन के वकील  एडवोकेट चरणपाल सिंह बागड़ी ने कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन उनका सांविधानिक अधिकार है जो कोरोना की आड़ में नहीं छीना जा सकता। उच्च न्यायालय ने कहा यह सही है, लेकिन दिशानिर्देशों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकता। फिर भी कोई प्रदर्शन करना हो तो दिशा- निर्देशों का सख्ती से पालन आवश्यक है।

पंजाब के 10 किसान संगठनों ने 15 सितंबर को राज्य के पांच जिलों के नेशनल हाईवे पर चक्का जाम और प्रदर्शन करने का एलान किया था। याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया था कि पंजाब सरकार ने अनलॉक 4 के तहत जारी दिशा निर्देश में राज्य में किसी भी तरह के राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जमावड़े पर पूरी तरह से रोक लगाई है। लेकिन इन दस किसान संगठनों ने रोष प्रदर्शन का एलान कर दिया है जिसमें 2 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का अनुमान है। कोरोना जैसी महामारी में यह बेहद ही घातक होगा। इसलिए इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

सार

  • किसानों के प्रदर्शन को लेकर दाखिल याचिका पर अदालत की तल्ख टिप्पणी
  • पंजाब सरकार को अनलॉक 4 से जुड़े दिशानिर्देश सख्ती से पालन कराने का आदेश

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसानों के शांतिपूर्वक प्रदर्शन पर रोक नहीं है, लेकिन आमजन का रास्ता बाधित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार को अब अनलॉक 4 से जुड़े दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिया है।

ऑल इंडिया किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के आह्वान पर पंजाब के 10 किसान संगठनों ने 15 सितंबर को अमृतसर, मोगा, फगवाड़ा (कपूरथला), बरनाला और पटियाला में नेशनल हाईवे पर रोष-प्रदर्शन और चक्का जाम का एलान किाय था। इसी के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बुधवार को उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी की।

याचिका पर पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि अब यह प्रदर्शन और धरने हट चुके हैं। इस मामले में किसान संगठनों के नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ जो मामले दर्ज किए गए थे, वह वापस ले लिए गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है, उनकी कोई दखल नहीं है।

किसान संगठन के वकील  एडवोकेट चरणपाल सिंह बागड़ी ने कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन उनका सांविधानिक अधिकार है जो कोरोना की आड़ में नहीं छीना जा सकता। उच्च न्यायालय ने कहा यह सही है, लेकिन दिशानिर्देशों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकता। फिर भी कोई प्रदर्शन करना हो तो दिशा- निर्देशों का सख्ती से पालन आवश्यक है।


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