सुरक्षा मिशन: हिंद-प्रशांत महासागर में मजबूत होगी सेना, मिलकर काम करेंगे भारत और फ्रांस

Published by Razak Mohammad on

मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 11 Sep 2020 02:39 AM IST

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह।
– फोटो : अमर उजाला

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देश की थल सीमा ही नहीं बल्कि जल सीमा की सुरक्षा अब और भी पुख्ता होगी। विभिन्न रक्षा सौदों के साथ फ्रांस जहां पहले ही भारत की मदद कर रहा है। वहीं अब समुद्री सुरक्षा मिशन पर भी फ्रांस भारत के साथ मिलकर काम करेगा। देश के रक्षामंत्री का भी मानना है कि मैरीटाइम ट्रैफिक सिक्युरिटी आज एक बड़ी चुनौती है। इसी के मद्देनजर भारत ने इंडो-पैसिफिक (भारतीय-प्रशांत क्षेत्र) क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

बता दें कि देश की थल सीमाओं के साथ-साथ समुद्री सीमाओं की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। यहां समुद्री डकैतों, तस्करों व अन्य तरह की कई सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना देश कर रहा है। इन सीमाओं को कैसे सुरक्षित किया जाए। इसके लिए भारत पिछले कुछ सालों से प्रयासरत है। इसकी बड़ी जिम्मेदारी नौसेना के कंधों पर रहती है।

लिहाजा सूचना संलयन केंद्रों (आईएफसी) के जरिए समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने को हिंद महासागरीय देशों के साथ व्हाइट शिपिंग या वाणिज्यिक शिपिंग संबंधी जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है। इसमें भारत के साथ करीब 21 देश सूचना साझा करते हैं, जिनकी सीमा हिंद महासागर से लगी है।

इसके अलावा हाल ही में भारत ने ट्रांस-रीजनल मैरीटाइम नेटवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नेटवर्क का संचालन इटली द्वारा किया जाता है और इसमें भी करीब 30 देश शामिल है। यह समझौता समुद्रों में होने वाली वाणिज्यिक यातायात संबंधी गतिविधियों के बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है। जो कि समुद्री रास्तों से तस्करी जैसी गंभीर चुनौतियों को पार पाने में सहायक साबित होती हैं। मगर अब फ्रांस का मानना है कि भारत और फ्रांस के बीच मैरीटाइम ट्रैफिक सिक्युरिटी और तस्करी जैसी चुनौतियां सामान्य है। लिहाजा अब इस काम को भी दोनों मिलकर करेंगे।

मैरीटाइम ट्रैफिक सिक्युरिटी पर दोनों देशों बीच एमओयू संभव
देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि हमारी जिम्मेदारी सिर्फ क्षेत्रीय बार्डर की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह सकती। हम भारतीय-प्रशांत और हिंद महासागर रीजन में भी लगातार एक जिम्मेदार देश के रूप में विश्व शांति व अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ परस्पर सहयोग के लिए वचनबद्ध है। 

उन्होंने बताया कि हमारी भूमिका इन क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है और इसकी सराहना भी हो रही है। इसी मसले पर रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने भी कहा कि समुद्री क्षेत्र के सुरक्षा संबंध में भारत और फ्रांस का दृष्टिकोण एक ही है। इसलिए हम इन तमाम सामान्य चुनौतियों को डील करने में एक-दूसरे का पूरा सहयोग करेंगे। आने वाले समय में इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच समझौतों की भी प्रबल संभावना है।

देश की थल सीमा ही नहीं बल्कि जल सीमा की सुरक्षा अब और भी पुख्ता होगी। विभिन्न रक्षा सौदों के साथ फ्रांस जहां पहले ही भारत की मदद कर रहा है। वहीं अब समुद्री सुरक्षा मिशन पर भी फ्रांस भारत के साथ मिलकर काम करेगा। देश के रक्षामंत्री का भी मानना है कि मैरीटाइम ट्रैफिक सिक्युरिटी आज एक बड़ी चुनौती है। इसी के मद्देनजर भारत ने इंडो-पैसिफिक (भारतीय-प्रशांत क्षेत्र) क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

बता दें कि देश की थल सीमाओं के साथ-साथ समुद्री सीमाओं की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। यहां समुद्री डकैतों, तस्करों व अन्य तरह की कई सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना देश कर रहा है। इन सीमाओं को कैसे सुरक्षित किया जाए। इसके लिए भारत पिछले कुछ सालों से प्रयासरत है। इसकी बड़ी जिम्मेदारी नौसेना के कंधों पर रहती है।

लिहाजा सूचना संलयन केंद्रों (आईएफसी) के जरिए समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने को हिंद महासागरीय देशों के साथ व्हाइट शिपिंग या वाणिज्यिक शिपिंग संबंधी जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है। इसमें भारत के साथ करीब 21 देश सूचना साझा करते हैं, जिनकी सीमा हिंद महासागर से लगी है।



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