सुप्रीम फैसला आज : किसानों को कानून रद्द कराने से कम कुछ मंजूर नहीं, 26 को किसान परेड भी होगी 

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
Updated Tue, 12 Jan 2021 09:45 AM IST

धरने पर बैठे किसान।
– फोटो : फाइल फोटो

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कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की मंगलवार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर टिक गई हैं। सोमवार को कोर्ट के रुख को देखकर किसान कुछ संतुष्ट जरूर नजर आए। हालांकि किसान कृषि कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हैं और उन्होंने फिर साफ कर दिया है कि इसके अलावा उनको बीच का कोई रास्ता मंजूर नहीं है।

इस तरह ही आंदोलन जारी रहेगा तो 26 जनवरी की दिल्ली में किसान परेड भी जरूर निकाली जाएगी। उसके लिए 24 जनवरी को बॉर्डर पर किसानों के जत्थे ट्रैक्टर के साथ पहुंच जाएंगे। अब किसान अन्य कोई रणनीति सुप्रीम कोर्ट का फैसला देखने के बाद बनाएंगे। 

कृषि कानूनों व आंदोलन को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जिस तरह की टिप्पणी की गई। उसको देखते हुए अभी तक किसान नेता संतुष्ट दिख रहे हैं, लेकिन वह मंगलवार को आने वाले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। उस फैसले के बाद ही किसान आगे की रणनीति तय करेंगे। 

भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पहले दिन से एक ही मांग है और वह कानून रद्द करने के साथ ही एमएसपी पर कानून बनाया जाए। सरकार के इस तरह का एलान करते ही किसान आराम से अपने घर लौट जाएंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार यह नहीं सोचे कि किसान यहां से लौट जाएगा। 

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट कमेटी गठित करके इन कानूनों को फिलहाल टाल दे। लेकिन उनका एक ही नारा है कि कानून पूरी तरह से वापस हो। किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि 26 जनवरी की किसान परेड की तैयारियां पूरी हो चुकी है।

सभी ट्रैक्टर-ट्राली 24 जनवरी की रात तक हर बार्डर पर पहुंच जाएंगे। इसके बाद पूरी रणनीति के साथ दिल्ली में कूच किया जाएगा। इससे पहले 13 को लोहडी और 18 को महिला किसान पंचायत के कार्यक्रम भी होंगे। इसके साथ ही कहा कि सरकार से 15 जनवरी की बातचीत में कुछ नहीं होगा, लेकिन सरकार की पोल खोलने के लिए बातचीत के लिए जरूर जाएंगे।

कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों की मंगलवार के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर टिक गई हैं। सोमवार को कोर्ट के रुख को देखकर किसान कुछ संतुष्ट जरूर नजर आए। हालांकि किसान कृषि कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हैं और उन्होंने फिर साफ कर दिया है कि इसके अलावा उनको बीच का कोई रास्ता मंजूर नहीं है।

इस तरह ही आंदोलन जारी रहेगा तो 26 जनवरी की दिल्ली में किसान परेड भी जरूर निकाली जाएगी। उसके लिए 24 जनवरी को बॉर्डर पर किसानों के जत्थे ट्रैक्टर के साथ पहुंच जाएंगे। अब किसान अन्य कोई रणनीति सुप्रीम कोर्ट का फैसला देखने के बाद बनाएंगे। 

कृषि कानूनों व आंदोलन को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जिस तरह की टिप्पणी की गई। उसको देखते हुए अभी तक किसान नेता संतुष्ट दिख रहे हैं, लेकिन वह मंगलवार को आने वाले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। उस फैसले के बाद ही किसान आगे की रणनीति तय करेंगे। 

भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि पहले दिन से एक ही मांग है और वह कानून रद्द करने के साथ ही एमएसपी पर कानून बनाया जाए। सरकार के इस तरह का एलान करते ही किसान आराम से अपने घर लौट जाएंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार यह नहीं सोचे कि किसान यहां से लौट जाएगा। 

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट कमेटी गठित करके इन कानूनों को फिलहाल टाल दे। लेकिन उनका एक ही नारा है कि कानून पूरी तरह से वापस हो। किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि 26 जनवरी की किसान परेड की तैयारियां पूरी हो चुकी है।

सभी ट्रैक्टर-ट्राली 24 जनवरी की रात तक हर बार्डर पर पहुंच जाएंगे। इसके बाद पूरी रणनीति के साथ दिल्ली में कूच किया जाएगा। इससे पहले 13 को लोहडी और 18 को महिला किसान पंचायत के कार्यक्रम भी होंगे। इसके साथ ही कहा कि सरकार से 15 जनवरी की बातचीत में कुछ नहीं होगा, लेकिन सरकार की पोल खोलने के लिए बातचीत के लिए जरूर जाएंगे।

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