सीएनएन ने लिखा: अमेरिका के लिए आने वाले 13 दिन खतरनाक

Published by Razak Mohammad on

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Jan 2021 08:20 PM IST

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अमेरिका के एक बड़े और विश्व विख्यात समाचार समूह सीएनएन ने अपने ही देश के लिए अगले 13 दिनों को बेहद खतरनाक बताया है। दरअसल सात जनवरी को अमेरिकी संसद भवन कैपिटल बिल्डिंग ने जो देखा, उसकी निंदा पूरी दुनिया में हो रही है। ट्रंप ने अपने समर्थकों को उकसाया और नतीजतन बेकाबू भीड़ ने संसद भवन पर हमला बोल दिया। गोलियां चलीं, तोड़फोड़ हुई और दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के मुंह पर कालिख पुती। व्हाइट हाउस की इज्जत पर काले दाग लग गए।

सीएनएन का यह शीर्षक पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है। यह बता रहा है कि कैसे एक सत्तालोलुप शख्स देश के लिए खतरा बनता जा रहा है। 20 जनवरी तक ट्रंप ही अमेरिका के राष्ट्रपति रहेंगे और इस दौरान वो कोई भी आदेश जारी कर सकते हैं। अमेरिकी फौजों का सुप्रीम कमांडर होने के नाते वो सत्ता में बने रहने के लिए फौज का सहारा भी ले सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। फिर परिणामों को मानने से भी इनकार कर रहे थे। लेकिन हठ इस पर भी शांत नहीं हुआ। जब सही तरीके से सत्ता बचती नहीं दिखी तो दंगे फसाद का सहारा लेने से भी नहीं चूके हैं। यह दुर्गति उस अमेरिका की है, जो दुनिया को लोकतंत्र की दुहाई देता फिरता है।

अमेरिका के एक बड़े और विश्व विख्यात समाचार समूह सीएनएन ने अपने ही देश के लिए अगले 13 दिनों को बेहद खतरनाक बताया है। दरअसल सात जनवरी को अमेरिकी संसद भवन कैपिटल बिल्डिंग ने जो देखा, उसकी निंदा पूरी दुनिया में हो रही है। ट्रंप ने अपने समर्थकों को उकसाया और नतीजतन बेकाबू भीड़ ने संसद भवन पर हमला बोल दिया। गोलियां चलीं, तोड़फोड़ हुई और दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के मुंह पर कालिख पुती। व्हाइट हाउस की इज्जत पर काले दाग लग गए।

सीएनएन का यह शीर्षक पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है। यह बता रहा है कि कैसे एक सत्तालोलुप शख्स देश के लिए खतरा बनता जा रहा है। 20 जनवरी तक ट्रंप ही अमेरिका के राष्ट्रपति रहेंगे और इस दौरान वो कोई भी आदेश जारी कर सकते हैं। अमेरिकी फौजों का सुप्रीम कमांडर होने के नाते वो सत्ता में बने रहने के लिए फौज का सहारा भी ले सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। फिर परिणामों को मानने से भी इनकार कर रहे थे। लेकिन हठ इस पर भी शांत नहीं हुआ। जब सही तरीके से सत्ता बचती नहीं दिखी तो दंगे फसाद का सहारा लेने से भी नहीं चूके हैं। यह दुर्गति उस अमेरिका की है, जो दुनिया को लोकतंत्र की दुहाई देता फिरता है।

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