श्रद्धालुओं ने गर्भगृह के बाहर से ही किए मां भीमाकाली के दर्शन

Published by Razak Mohammad on

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ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। कोरोना संक्रमण के खौफ के बीच करीब छह माह से बंद मंदिरों के कपाट वीरवार को खुल गए। हालांकि, मंदिरों में भक्त कम संख्या में पहुंचे। इसका एक कारण श्राद्ध भी माने जा रहे हैं। वीरवार को सराहन स्थित मां भीमाकाली मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल गए। संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रशासन और भीमाकाली मंदिर न्यास ने व्यापक प्रबंध कर रखे हैं। कई पाबंदियों के साथ सरकार ने मंदिरों को खोलने की अनुमति दी है।
वीरवार को सुबह मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु धीरे-धीरे मंदिर पहुंचना शुरू हो गए। मंदिर में पहुंचने वाले सभी भक्तों का पंजीकरण और सैनिटाइजेशन के बाद ही मंदिर में प्रवेश हुआ। न्यास के पुजारी और कर्मचारी भी कोरोना से बचाव के लिए फेस शील्ड, मास्क और दस्ताने लगा कर मुस्तैद दिखे। किसी को भी मंदिर में प्रसाद और भोग नहीं ले जाने दिया गया। मंदिर में दर्शन के लिए न्यास ने किसी को भी टोपी नहीं दी। सभी श्रद्धालुओं को अपने सिर ढकने को रुमाल, मफलर और पटके लेने पड़े। मुख्य मंदिर में एक-एक व्यक्ति को ही अंदर जाने दिया गया। मंदिर के गर्भगृह के बाहर से ही सभी को दर्शन करवाए गए। वहीं, श्राईकोटी माता, मर्दिनी महालक्ष्मी माता, उन्नू महादेव सहित अन्य देवी देवताओं के मंदिरों में भी अब भक्तों को दर्शन करने की अनुमति मिल गई है।
भीमाकाली मंदिर के मुख्य पुजारी पूर्ण शर्मा ने बताया कि पहले दिन मंदिर में दर्शन को कम संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर न्यास ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता प्रबंध कर रखे हैं।
प्रसाद, धूप और चुन्नी चढ़ाने पर रोक के कारण बंद रहीं दुकानें
वीरवार को मां भीमाकाली मंदिर तो श्रद्धालुओं के लिए खुल गया, लेकिन मंदिर के आसपास भोग और पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदारों की दुकानें बंद रहीं। मंदिर में भोग और पूजा सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध होने के कारण दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोलना उचित नहीं समझा। दुकानदार हेम लता, प्रेम कुमार सोनी, प्रताप अग्रवाल, बलदेव और संतोष सोनी ने बताया मंदिर तो सरकार ने खोल दिए हैं, लेकिन भोग और पूजा सामग्री चढ़ाने पर प्रतिबंध के चलते उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। आमदनी तो दूर, दुकानों का किराया देने में भी दुकानदारों को मुश्किलें पेश आ रही हैं।

ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। कोरोना संक्रमण के खौफ के बीच करीब छह माह से बंद मंदिरों के कपाट वीरवार को खुल गए। हालांकि, मंदिरों में भक्त कम संख्या में पहुंचे। इसका एक कारण श्राद्ध भी माने जा रहे हैं। वीरवार को सराहन स्थित मां भीमाकाली मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल गए। संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रशासन और भीमाकाली मंदिर न्यास ने व्यापक प्रबंध कर रखे हैं। कई पाबंदियों के साथ सरकार ने मंदिरों को खोलने की अनुमति दी है।

वीरवार को सुबह मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु धीरे-धीरे मंदिर पहुंचना शुरू हो गए। मंदिर में पहुंचने वाले सभी भक्तों का पंजीकरण और सैनिटाइजेशन के बाद ही मंदिर में प्रवेश हुआ। न्यास के पुजारी और कर्मचारी भी कोरोना से बचाव के लिए फेस शील्ड, मास्क और दस्ताने लगा कर मुस्तैद दिखे। किसी को भी मंदिर में प्रसाद और भोग नहीं ले जाने दिया गया। मंदिर में दर्शन के लिए न्यास ने किसी को भी टोपी नहीं दी। सभी श्रद्धालुओं को अपने सिर ढकने को रुमाल, मफलर और पटके लेने पड़े। मुख्य मंदिर में एक-एक व्यक्ति को ही अंदर जाने दिया गया। मंदिर के गर्भगृह के बाहर से ही सभी को दर्शन करवाए गए। वहीं, श्राईकोटी माता, मर्दिनी महालक्ष्मी माता, उन्नू महादेव सहित अन्य देवी देवताओं के मंदिरों में भी अब भक्तों को दर्शन करने की अनुमति मिल गई है।

भीमाकाली मंदिर के मुख्य पुजारी पूर्ण शर्मा ने बताया कि पहले दिन मंदिर में दर्शन को कम संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर न्यास ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता प्रबंध कर रखे हैं।

प्रसाद, धूप और चुन्नी चढ़ाने पर रोक के कारण बंद रहीं दुकानें
वीरवार को मां भीमाकाली मंदिर तो श्रद्धालुओं के लिए खुल गया, लेकिन मंदिर के आसपास भोग और पूजा सामग्री बेचने वाले दुकानदारों की दुकानें बंद रहीं। मंदिर में भोग और पूजा सामग्री ले जाने पर प्रतिबंध होने के कारण दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोलना उचित नहीं समझा। दुकानदार हेम लता, प्रेम कुमार सोनी, प्रताप अग्रवाल, बलदेव और संतोष सोनी ने बताया मंदिर तो सरकार ने खोल दिए हैं, लेकिन भोग और पूजा सामग्री चढ़ाने पर प्रतिबंध के चलते उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। आमदनी तो दूर, दुकानों का किराया देने में भी दुकानदारों को मुश्किलें पेश आ रही हैं।

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Categories: Rampur Bushahar

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