विधानसभा सत्र: कोरोना संकट में ट्यूशन फीस से ज्यादा नहीं ले सकते निजी स्कूल

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Updated Thu, 10 Sep 2020 06:39 PM IST

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकु
– फोटो : अमर उजाला

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शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि कोरोना संकट में स्कूल शिक्षा बोर्ड और सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के लिए कहा गया है। ट्यूशन फीस तीन माह की जगह मासिक आधार पर लेने को कहा है। शिक्षण संस्थान शुल्क केवल उन वर्गों से ले सकते हैं, जिन्हें ऑनलाइन शिक्षण सामग्री या कक्षाएं लगाई जा रही हैं। नालागढ़ से कांग्रेस विधायक लखविंदर राणा के सवाल के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि लॉकडाउन में उत्पन्न वित्तीय संकट के कारण ट्यूशन फीस का भुगतान न करने पर ऑनलाइन कक्षाओं या पठन सामग्री से किसी बच्चों को वंचित नहीं किया जा सकता। किसी अभिभावक के ट्यूशन फीस जमा न करने की स्थिति में जुर्माना नहीं लगेगा। न ही विद्यार्थी का नाम स्कूल से हटाया जाएगा।

कहा कि मामले में उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त को विस्तृत आदेश भी जारी किए हैं। बताया कि निजी स्कूलों की फीस का निर्धारण सरकार नहीं करती है। सरकार ने प्रतिवर्ष फीस को नियंत्रित करने के उद्देश्य से निजी स्कूलों के प्रबंधकों को स्कूल में सामान्य सभा का आयोजन कर अभिभावकों की सहमति से फीस व फंड निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों की तर्ज पर छुट्टियां दिलवाने का सरकार का कोई विचार नहीं है। प्रदेश में सरकारी पाठशालाओं के लिए शिक्षा कोड 2012 लागू किया गया है, जबकि पूरे देश में सीबीएसई से संबंध निजी स्कूलों में केंद्रीय शिक्षा बोर्ड नई दिल्ली से जारी नियम लागू होते हैं। 

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि कोरोना संकट में स्कूल शिक्षा बोर्ड और सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के लिए कहा गया है। ट्यूशन फीस तीन माह की जगह मासिक आधार पर लेने को कहा है। शिक्षण संस्थान शुल्क केवल उन वर्गों से ले सकते हैं, जिन्हें ऑनलाइन शिक्षण सामग्री या कक्षाएं लगाई जा रही हैं। नालागढ़ से कांग्रेस विधायक लखविंदर राणा के सवाल के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि लॉकडाउन में उत्पन्न वित्तीय संकट के कारण ट्यूशन फीस का भुगतान न करने पर ऑनलाइन कक्षाओं या पठन सामग्री से किसी बच्चों को वंचित नहीं किया जा सकता। किसी अभिभावक के ट्यूशन फीस जमा न करने की स्थिति में जुर्माना नहीं लगेगा। न ही विद्यार्थी का नाम स्कूल से हटाया जाएगा।

कहा कि मामले में उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त को विस्तृत आदेश भी जारी किए हैं। बताया कि निजी स्कूलों की फीस का निर्धारण सरकार नहीं करती है। सरकार ने प्रतिवर्ष फीस को नियंत्रित करने के उद्देश्य से निजी स्कूलों के प्रबंधकों को स्कूल में सामान्य सभा का आयोजन कर अभिभावकों की सहमति से फीस व फंड निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों की तर्ज पर छुट्टियां दिलवाने का सरकार का कोई विचार नहीं है। प्रदेश में सरकारी पाठशालाओं के लिए शिक्षा कोड 2012 लागू किया गया है, जबकि पूरे देश में सीबीएसई से संबंध निजी स्कूलों में केंद्रीय शिक्षा बोर्ड नई दिल्ली से जारी नियम लागू होते हैं। 

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