लोहड़ी पर्व पर पांवटा के मुख्य बाजार और बद्रीपुर क्षेत्रों में खूब हुई खरीदारी

Published by Razak Mohammad on

पांवटा में लोहड़ी पर्व पर सजी दुकान।
– फोटो : NAHAN

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

पांवटा साहिब (सिरमौर)। लोहड़ी पर्व पर पांवटा साहिब के मुख्य बाजार और बद्रीपुर क्षेत्रों में जमकर खरीदारी की गई। सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजे गए। सड़कों के किनारे सजे मूंगफली, गजक, रेवड़ियां, चिड़वे, बिस्कुट और मिठाइयों की खूब खरीदारी की गई। शाम ढलते ही पांवटा की अधिकतर गलियों से सुंदर मुंदरिए… पारंपरिक गीतों की आवाज गूंजती रही। कई जगहों पर ढोल की थाप पर लोग झूमते रहे।
कोविड-19 के बीच भी लोहड़ी पर्व पर बाजार में खूब चहल-पहल नजर आई। बुधवार को लोहड़ी पर्व पर बाजार और सड़कों के किनारे स्टॉल सजे थे जिसमें मूंगफली, गजक, रेवड़ियां, पॉपकॉर्न, चिड़वे, बिस्कुट तथा मिठाइयों की भी खूब खरीदारी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ जाने वाले मार्गों पर भी जगह-जगह मूंगफली, रेवड़ियों और गजक के स्टाल थे। लोग भी खरीदारी करने के लिए खूब बाजार में आ रहे हैं। लोहड़ी पर्व के लिए रेवड़ी, गजक और अन्य चीजों की जमकर खरीदारी की गई।
लोहड़ी पर्व को लेकर दिन भर बाजार भी सजे रहे। अधिकतर दुकानों में लोहड़ी का सामान सजा था। पांवटा के बद्रीपुुर, जामनीवाला मार्ग, देवीनगर, मुख्य बाजार और कॉलेज मार्ग पर दिन भर लोगों की चहल-पहल नजर आई। स्थानीय निवासी मनिंदर सिंह, सुखविंदर सिंह, हरदीप सिंह, परविंदर कौर, हरबंस, अमन, रेखा और दिनेश शर्मा का कहना है कि लोहड़ी पर्व पर आधुनिक युग में इंटरनेट संस्कृति का भी असर देखने को मिल रहा है। इस पर्व पर हर गली में जहां सुंदर मुंदरिए… जैसे गीतों का पहले प्रचलन होता रहा है। लोहड़ी पर्व से हफ्ता पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती थीं।
आज के आधुनिक दौर में यह सब एक सपना बनकर रह गई हैं। वर्तमान में न तो कोई गीत सुनाते नजर आते हैं, और न ही पहले की तरह का उत्साह दिखाई देता है। केवल सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बधाई संदेश दिए में पर्व सिमटते जा रहे हैं। आधुनिकता की इस दौड़ में लोग अपनी पुरानी संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और तीज-त्योहारों को भूलते नजर आ रहे हैं। हालांकि, पांवटा शहरी और आसपास पंचायतों में सिख बाहुल क्षेत्र होने पर काफी हद तक इस पर्व को संजोये हुए हैं।

पांवटा साहिब (सिरमौर)। लोहड़ी पर्व पर पांवटा साहिब के मुख्य बाजार और बद्रीपुर क्षेत्रों में जमकर खरीदारी की गई। सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजे गए। सड़कों के किनारे सजे मूंगफली, गजक, रेवड़ियां, चिड़वे, बिस्कुट और मिठाइयों की खूब खरीदारी की गई। शाम ढलते ही पांवटा की अधिकतर गलियों से सुंदर मुंदरिए… पारंपरिक गीतों की आवाज गूंजती रही। कई जगहों पर ढोल की थाप पर लोग झूमते रहे।

कोविड-19 के बीच भी लोहड़ी पर्व पर बाजार में खूब चहल-पहल नजर आई। बुधवार को लोहड़ी पर्व पर बाजार और सड़कों के किनारे स्टॉल सजे थे जिसमें मूंगफली, गजक, रेवड़ियां, पॉपकॉर्न, चिड़वे, बिस्कुट तथा मिठाइयों की भी खूब खरीदारी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ जाने वाले मार्गों पर भी जगह-जगह मूंगफली, रेवड़ियों और गजक के स्टाल थे। लोग भी खरीदारी करने के लिए खूब बाजार में आ रहे हैं। लोहड़ी पर्व के लिए रेवड़ी, गजक और अन्य चीजों की जमकर खरीदारी की गई।

लोहड़ी पर्व को लेकर दिन भर बाजार भी सजे रहे। अधिकतर दुकानों में लोहड़ी का सामान सजा था। पांवटा के बद्रीपुुर, जामनीवाला मार्ग, देवीनगर, मुख्य बाजार और कॉलेज मार्ग पर दिन भर लोगों की चहल-पहल नजर आई। स्थानीय निवासी मनिंदर सिंह, सुखविंदर सिंह, हरदीप सिंह, परविंदर कौर, हरबंस, अमन, रेखा और दिनेश शर्मा का कहना है कि लोहड़ी पर्व पर आधुनिक युग में इंटरनेट संस्कृति का भी असर देखने को मिल रहा है। इस पर्व पर हर गली में जहां सुंदर मुंदरिए… जैसे गीतों का पहले प्रचलन होता रहा है। लोहड़ी पर्व से हफ्ता पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती थीं।

आज के आधुनिक दौर में यह सब एक सपना बनकर रह गई हैं। वर्तमान में न तो कोई गीत सुनाते नजर आते हैं, और न ही पहले की तरह का उत्साह दिखाई देता है। केवल सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बधाई संदेश दिए में पर्व सिमटते जा रहे हैं। आधुनिकता की इस दौड़ में लोग अपनी पुरानी संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और तीज-त्योहारों को भूलते नजर आ रहे हैं। हालांकि, पांवटा शहरी और आसपास पंचायतों में सिख बाहुल क्षेत्र होने पर काफी हद तक इस पर्व को संजोये हुए हैं।

Source link

Categories: Sirmour

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *