लोहड़ी पर्व को लेकर सजे जिला के बाजार

Published by Razak Mohammad on

लोहड़ी पर्व को लेकर मालरोड की एक दुकान में खरीददारी करते हुए लोग।

लोहड़ी पर्व को लेकर मालरोड की एक दुकान में खरीददारी करते हुए लोग।
– फोटो : SOLAN

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

सोलन। कोविड के बीच भी लोहड़ी पर्व को लेकर जिला के बाजारों में मंगलवार को खूब चहल-पहल रही। इस दौरान लोगों ने लोहड़ी पर्व के लिए रेवड़ी, गजक व अन्य चीजों की जमकर खरीदारी की। लोहड़ी पर्व को लेकर दिन भर जिला के बाजार सजे रहे और अधिकतर दुकानों में लोहड़ी का सामान सजा रहा। जिला मुख्यालय की बात करें तो सोलन शहर में दिन भर लोगों की चहल-पहल रही। लोहड़ी पर्व की बात की जाए तो आधुनिक युग में इंटरनेट संस्कृति पर्वों पर भारी नजर पड़ती जा रही है। लोहड़ी पर्व पर जहां सुंदर मुंदरिए… जैसे गीतों का पहले प्रचलन होता था और लोहड़ी पर्व से हफ्ता पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती थी, आज के आधुनिक दौर में यह सब एक सपना बनकर रह गई हैं। स्थानीय बुजुर्ग जयराम, गीता राम, राजेंद्र, बृजमोहन शर्मा कहा कहना है कि वर्तमान में न तो कोई गीत सुनाते नजर आते हैं और न ही इसको लेकर अधिक उत्साह दिखाई देता है। वर्तमान में केवल सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बधाई संदेश दिए जाते हैं। आधुनिकता की इस दौड़ में लोग अपनी पुरानी संस्कृति, प्राचीन परंपराओं व तीज-त्योहारों को भूलते नजर आ रहे हैं।

सोलन। कोविड के बीच भी लोहड़ी पर्व को लेकर जिला के बाजारों में मंगलवार को खूब चहल-पहल रही। इस दौरान लोगों ने लोहड़ी पर्व के लिए रेवड़ी, गजक व अन्य चीजों की जमकर खरीदारी की। लोहड़ी पर्व को लेकर दिन भर जिला के बाजार सजे रहे और अधिकतर दुकानों में लोहड़ी का सामान सजा रहा। जिला मुख्यालय की बात करें तो सोलन शहर में दिन भर लोगों की चहल-पहल रही। लोहड़ी पर्व की बात की जाए तो आधुनिक युग में इंटरनेट संस्कृति पर्वों पर भारी नजर पड़ती जा रही है। लोहड़ी पर्व पर जहां सुंदर मुंदरिए… जैसे गीतों का पहले प्रचलन होता था और लोहड़ी पर्व से हफ्ता पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती थी, आज के आधुनिक दौर में यह सब एक सपना बनकर रह गई हैं। स्थानीय बुजुर्ग जयराम, गीता राम, राजेंद्र, बृजमोहन शर्मा कहा कहना है कि वर्तमान में न तो कोई गीत सुनाते नजर आते हैं और न ही इसको लेकर अधिक उत्साह दिखाई देता है। वर्तमान में केवल सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बधाई संदेश दिए जाते हैं। आधुनिकता की इस दौड़ में लोग अपनी पुरानी संस्कृति, प्राचीन परंपराओं व तीज-त्योहारों को भूलते नजर आ रहे हैं।

Source link

Categories: Solan

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *