लापता पावन स्वरूप मामला: अमृतसर में निहंग सिंहों और टास्क फोर्स के बीच टकराव, लाठीचार्ज

Published by Razak Mohammad on

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लापता पावन स्वरूप मामले में आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग पर एसजीपीसी मुख्यालय तेजा सिंह समुंद्री हाल के बाहर लगे मोर्चे के समर्थन में आए निहंगों, सिख संगठनों और एसजीपीसी टास्क फोर्स के बीच मंगलवार सुबह टकराव हो गया। टकराव में एक निहंग सिंह सहित कई सिख संगठनों के सदस्यों को चोटें आईं। 

लगभग आधा घंटे तक टास्क फोर्स के कर्मचारियों ने लाठीचार्ज कर मोर्चे के समर्थन में आए सिखों व निहंगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। श्री गुरु राम दास सराए की तरफ के रास्ते में पुलिस की कई गाड़ियां खड़ीं थीं। सादी वर्दी में पुलिस अधिकारी व जवान भी इस टकराव के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे लेकिन वह दूर खड़े रहे।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को एसजीपीसी परिसर से सचखंड श्री हरमंदिर साहिब जी तक जाने वाले तीन रास्तों में टीन की ऊंची-ऊंची दीवारों के अवरोध खड़े कर दिए गए थे, ताकि मोर्चे के समर्थन में आने वाले सिख संगठनों के समर्थकों को रोका जा सके।

सुबह करीब 11 बजे निहंग सिंह और कई सिख एसजीपीसी द्वारा खड़े किए अवरोधों को गिराकर एसजीपीसी मुख्यालय के बाहर लगाए गए मोर्चा में शामिल होना चाहते थे। टास्क फोर्स ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो निहंग सिंहों ने सड़क पर बैठकर सतनाम वाहेगुरु का जाप करना शुरू कर दिया। इसके बाद टास्क फोर्स ने उन्हें धरना उठाने को कहा।

इसी बात को लेकर सिख संगठनों के समर्थन में आए सिखों और टास्क फोर्स के बीच तीखी बहसबाजी हुई। धरने पर बैठे निहंग सिंहों ने टास्क फोर्स का विरोध किया तो टास्क फोर्स ने लाठीचार्ज कर दिया। इस दौरान एक निहंग सिंह टास्क फोर्स की तरफ भागा तो दूसरी तरफ खड़े फोर्स के एक दूसरे सदस्य ने उस पर ईंट दे मारी। 



इसके बाद टास्क फोर्स के जवानों ने उस निहंग सिंह को पकड़ कर घसीटना शुरू कर दिया, जिसने लाठीचार्ज का विरोध किया था। इस निहंग ने अपनी परंपरागत शैली से तलवार को चलाते हुए टास्क फोर्स को खदेड़ने की कोशिश की लेकिन उन्होंने निहंग सिंह को घेर लिया और उससे तलवार छीन ली। 

सिख संगठनों के पक्के धरने से बौखलाए एसजीपीसी प्रबंधन ने गुरुद्वारा अटल राय साहिब, गुरु रामदास सराए के नजदीक व गुरुद्वारा मंजी साहिब दीवान हाल की तरफ जाने वाले सभी रास्तों में टीन की दीवारों के अवरोध लगा दिए थे ताकि इन रास्तों से सचखंड आने वाली संगत धरने पर बैठे सिख संगठनों के सदस्यों के संपर्क में न आ सके। 

यह पहला अवसर था जब एसजीपीसी परिसर से सचखंड की तरफ जाने वाले रास्तों पर अवरोध खड़े किए गए। एसजीपीसी ने एक रणनीति के अंतर्गत मोर्चा लगाकर बैठे सिख संगठनों के सदस्यों को घेरे में लिया। यह सदस्य एसजीपीसी मुख्यालय के बाहर बैठने तक सीमित हो गए। इस मोर्चे में शामिल होने के लिए जो निहंग सिख व अन्य सदस्य आ रहे थे, एसजीपीसी ने उनको जब रोका तो टकराव हो गया। 

निहंग बाणे में एक महिला इस टीन की दीवार को फांदने का प्रयास करने लगी तो टास्क फोर्स ने उसका विरोध किया। इस महिला ने चेतावनी दी यदि उसको हाथ भी लगाया तो अंजाम ठीक न होगा। इसके बाद यह महिला टीन की ऊंची दीवार फांद कर एसजीपीसी मुख्यालय के बाहर लगे मोर्चे में शामिल हो गई।   

पत्रकारों के साथ की गई बदसलूकी

एसजीपीसी टास्क फोर्स की अगुवाई मीत सचिव प्रताप सिंह कर रहे थे। टास्क फोर्स ने वहां मौजूद पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। लाठीचार्ज के बावजूद कई निहंग सिंह सड़क पर बैठक कर सतनाम वाहेगुरु का जाप करते रहे। बाद में एसजीपीसी के सीनियर उपाध्यक्ष रजिंदर सिंह मेहता ने पत्रकारों को मुख्यालय में बुलाकर खेद जताया। 

एसजीपीसी के प्रवक्ता कुलविंदर सिंह रमदास ने कहा कि मंगलवार को कुछ निहंग सिंह राम दास सराए के बाहर आकर बैठ गए थे। उनके पास हथियार थे। इनके साथ कुछ अन्य हथियार बंद सिख भी थे। इन लोगों ने एसजीपीसी के विरुद्ध भद्दी शब्दावली का प्रयोग किया। इसी स्थान पर उन्होंने एक बोर्ड लगाने की कोशिश की। उनको ऐसा करने से रोका गया और टास्क फोर्स ने उनका बोर्ड उतार दिए। इन्होंने तैश में आकर एसजीपीसी की टास्क फोर्स पर हमला किया जिसको रोकने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल और अन्य पदाधिकारी धरने पर बैठे सतिकार कमेटी और अन्य पंथक संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। इस विवाद को निपटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। एसजीपीसी का मानना है कि कोई भी मसला बातचीत से ही हल हो सकता है। जल्द ही इस मसले का भी हल निकाल लिया जाएगा। कुछ पंथ विरोधी एसजीपीसी के अध्यक्ष व पदाधिकारियों के विरुद्ध अभद्र शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं। एसजीपीसी इसकी निंदा करती है।   

तख्त श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह गोहर ने कहा कि सचखंड परिसर में धरना-प्रदर्शन लगाना गुरमति मर्यादा के विरुद्ध है। लापता पावन स्वरूप मामले की जांच अभी चल रही है। किसी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदर्शन गुरु मर्यादा के अनुसार ठीक नहीं है।

एसजीपीसी की कार्रवाई की चौतरफा निंदा 

यह दुखदायी व शर्मनाक घटना है। सिख संगठनों व एसजीपीसी के बीच बातचीत टूट गई थी, इसका यह अर्थ नहीं कि विरोधी विचारधारा के सिखों पर जुल्म किया जाए। मंगलवार सुबह जो हुआ, उसकी योजना सोमवार रात को ही बना दी गई थी। टीन की ऊंची दीवारों के अवरोध खड़े कर एसजीपीसी ने अपने ही सिद्धांतों पर प्रहार किया है। एसजीपीसी की वर्तमान लीडरशिप कमजोर है। लौंगोवाल बादल परिवार के हाथों में खेल रहे हैं। लापता स्वरूप मामले में एसजीपीसी अध्यक्ष पर एफआईआर दर्ज की जाए। जसविंदर सिंह एडवोकेट, पूर्व सदस्य, एसजीपीसी 

एसजीपीसी के प्रबंधन के अधीन 328 पावन स्वरूप लापता हो गए हैं। संगत एसजीपीसी से हिसाब मांग रही है। एसजीपीसी ने इस संदर्भ में फैसले किए हैं, वह सिख संगठनों को मंजूर नहीं है। एसजीपीसी इस मामले से पल्ला झाड़ रही है। पंथक संगठन एसजीपीसी के विरुद्ध शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन उन पर लाठीचार्ज किया गया। – समानांतर जत्थेदार ज्ञानी अमरीक सिंह अजनाला 

लापता पावन स्वरूप मामले में आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग पर एसजीपीसी मुख्यालय तेजा सिंह समुंद्री हाल के बाहर लगे मोर्चे के समर्थन में आए निहंगों, सिख संगठनों और एसजीपीसी टास्क फोर्स के बीच मंगलवार सुबह टकराव हो गया। टकराव में एक निहंग सिंह सहित कई सिख संगठनों के सदस्यों को चोटें आईं। 

लगभग आधा घंटे तक टास्क फोर्स के कर्मचारियों ने लाठीचार्ज कर मोर्चे के समर्थन में आए सिखों व निहंगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। श्री गुरु राम दास सराए की तरफ के रास्ते में पुलिस की कई गाड़ियां खड़ीं थीं। सादी वर्दी में पुलिस अधिकारी व जवान भी इस टकराव के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे लेकिन वह दूर खड़े रहे।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को एसजीपीसी परिसर से सचखंड श्री हरमंदिर साहिब जी तक जाने वाले तीन रास्तों में टीन की ऊंची-ऊंची दीवारों के अवरोध खड़े कर दिए गए थे, ताकि मोर्चे के समर्थन में आने वाले सिख संगठनों के समर्थकों को रोका जा सके।

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Categories: Punjab

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