रूस-उज्बेकिस्तान में अमर उजाला की चर्चा, विदेशी महिला प्रोफेसरों ने बताया- क्यों खास है ये अखबार

Published by Razak Mohammad on

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

Updated Sun, 13 Sep 2020 05:21 PM IST

डॉ. कोस्तिना और डॉ. निलुफर।
– फोटो : अमर उजाला

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देश ही नहीं विदेश के विश्वविद्यालयों में भी हिंदी के विद्यार्थी भाषा सीखने के लिए अमर उजाला पढ़ते हैं। रूस व उज्बेकिस्तान में हिंदी का प्रचार-प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। वहां के शिक्षक विद्यार्थियों को यही सलाह देते हैं कि वह भाषा सीखने के लिए यह अखबार पढ़ें। इसके लिए वह अमर उजाला ई-पेपर का सहारा लेते हैं। 

यही नहीं विद्यार्थी एक या दो माह तक लगातार अखबार पढ़ते हैं तो उनकी भाषा में काफी अंतर देखने को मिलता है। उनके सीखने व लिखने की कला में निखार आता है। उनकी वर्तनी भी पहले की अपेक्षा काफी ठीक होती है और उच्चारण भी। यह बात रविवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में सेंट पीटर्सबर्ग राजकीय विश्वविद्यालय रूस की प्राध्यापिका डॉ. एकतेरीना कोस्तिना व उज्बेकिस्तान के ताशकंद राजकीय प्राच्य विश्वविद्यालय के अनुवाद विज्ञान और पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. निलुफर खोजाएवा ने कही। वेबिनार का विषय ‘विदेश में हिंदी’ रहा।

भाषाई दृष्टि से निरंतर मजबूत होता रहा अमर उजाला

रूस से प्राध्यापिका डॉ. एकतेरीना कोस्तिना कहती हैं कि 20 साल पहले वह आगरा आई थी। यहां उन्होंने हिंदी के कई अखबार देखे और अमर उजाला भी पढ़ने को मिला। इस अखबार के शब्दों में लय, ताल दिखी और वर्तनी की दृष्टि से मजबूत दिखा। यहां से अपने देश लौटी तो मैंने अमर उजाला ऑनलाइन पढ़ना शुरू किया।

धीरे-धीरे अखबार ने अपने आपको भाषाई दृष्टि से और मजबूत किया। शुरूआत में मैं शिक्षण से जुड़ी थी और यह अखबार पढ़ती रही। उसके बाद मैंने अपने विश्वविद्यालय के हिंदी विद्यार्थियों को अमर उजाला पढ़ने के लिए कहा और विद्यार्थी खुद भी हर रोज सुबह ई-पेपर पढ़ते हैं। भाषाई दृष्टि से मजबूत हुआ यह अखबार आज भारतीय प्रेस का प्रतीक बन गया।

हिंदी सिखाने के लिए छात्रों को पढ़कर सुनाते हैं अमर उजाला की खबरें

उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद के विश्वविद्यालय में तैनात अनुवाद विज्ञान और पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. निलुफर खोजाएवा कहती हैं कि उनके विश्वविद्यालय से हर साल 30 से 35 विद्यार्थी हिंदी सीखकर पासआउट होते हैं। आने वाले विद्यार्थियों को हिंदी सिखाने, उनकी भाषा को मजबूत करने के लिए अमर उजाला की खबरें पढ़कर सुनाते हैं। यह समाचार पत्र विद्यार्थियों को बता रहा है कि भाषा कैसे सीख सकते हैं। आगे भी अखबार को अपनी यह कला जारी रखनी चाहिए। हिंदी के अखबार में हिंदी के ही शब्दों का अधिकाधिक प्रयोग होना चाहिए।

देश ही नहीं विदेश के विश्वविद्यालयों में भी हिंदी के विद्यार्थी भाषा सीखने के लिए अमर उजाला पढ़ते हैं। रूस व उज्बेकिस्तान में हिंदी का प्रचार-प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। वहां के शिक्षक विद्यार्थियों को यही सलाह देते हैं कि वह भाषा सीखने के लिए यह अखबार पढ़ें। इसके लिए वह अमर उजाला ई-पेपर का सहारा लेते हैं। 

यही नहीं विद्यार्थी एक या दो माह तक लगातार अखबार पढ़ते हैं तो उनकी भाषा में काफी अंतर देखने को मिलता है। उनके सीखने व लिखने की कला में निखार आता है। उनकी वर्तनी भी पहले की अपेक्षा काफी ठीक होती है और उच्चारण भी। यह बात रविवार को अमर उजाला की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में सेंट पीटर्सबर्ग राजकीय विश्वविद्यालय रूस की प्राध्यापिका डॉ. एकतेरीना कोस्तिना व उज्बेकिस्तान के ताशकंद राजकीय प्राच्य विश्वविद्यालय के अनुवाद विज्ञान और पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. निलुफर खोजाएवा ने कही। वेबिनार का विषय ‘विदेश में हिंदी’ रहा।

भाषाई दृष्टि से निरंतर मजबूत होता रहा अमर उजाला

रूस से प्राध्यापिका डॉ. एकतेरीना कोस्तिना कहती हैं कि 20 साल पहले वह आगरा आई थी। यहां उन्होंने हिंदी के कई अखबार देखे और अमर उजाला भी पढ़ने को मिला। इस अखबार के शब्दों में लय, ताल दिखी और वर्तनी की दृष्टि से मजबूत दिखा। यहां से अपने देश लौटी तो मैंने अमर उजाला ऑनलाइन पढ़ना शुरू किया।

धीरे-धीरे अखबार ने अपने आपको भाषाई दृष्टि से और मजबूत किया। शुरूआत में मैं शिक्षण से जुड़ी थी और यह अखबार पढ़ती रही। उसके बाद मैंने अपने विश्वविद्यालय के हिंदी विद्यार्थियों को अमर उजाला पढ़ने के लिए कहा और विद्यार्थी खुद भी हर रोज सुबह ई-पेपर पढ़ते हैं। भाषाई दृष्टि से मजबूत हुआ यह अखबार आज भारतीय प्रेस का प्रतीक बन गया।

हिंदी सिखाने के लिए छात्रों को पढ़कर सुनाते हैं अमर उजाला की खबरें

उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद के विश्वविद्यालय में तैनात अनुवाद विज्ञान और पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. निलुफर खोजाएवा कहती हैं कि उनके विश्वविद्यालय से हर साल 30 से 35 विद्यार्थी हिंदी सीखकर पासआउट होते हैं। आने वाले विद्यार्थियों को हिंदी सिखाने, उनकी भाषा को मजबूत करने के लिए अमर उजाला की खबरें पढ़कर सुनाते हैं। यह समाचार पत्र विद्यार्थियों को बता रहा है कि भाषा कैसे सीख सकते हैं। आगे भी अखबार को अपनी यह कला जारी रखनी चाहिए। हिंदी के अखबार में हिंदी के ही शब्दों का अधिकाधिक प्रयोग होना चाहिए।



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