मुल्तानी हत्याकांड: सुमेध सैनी के कागजों में कमी के कारण सुप्रीम कोर्ट में नहीं लग पाई जमानत याचिका

Published by Razak Mohammad on

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29 साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण और हत्या के मामले में भूमिगत चल रहे पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सैनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। लेकिन उनके वकीलों की ओर से लगाई गई याचिका में कुछ दस्तावेजों की कमी रह गई थी। इस कारण उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग केसों (डिफेक्ट सूची) में डाल दिया गया है।

शनिवार-रविवार को छुट्टी के कारण सोमवार को ही सैनी की याचिका लगेगी। ऐसे में अब पंजाब पुलिस द्वारा गठित एसआईटी को उन्हें गिरफ्तारी करने के लिए और समय मिल गया है। मिली जानकारी के मुताबिक बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण केस में पूर्व डीजीपी सैनी के खिलाफ हत्या की धारा अगस्त के अंत में जोड़ी थी। उसी समय से वह भूमिगत चल रहे हैं। यहां तक कि उनके सुरक्षा कर्मियों को भी उनकी जानकारी नहीं है कि वह कहां हैं।

हालांकि उनके वकील उन्हें सलाखों के पीछे जाने से बचाने को पूूरी जंग लड़ रहे हैं। जब हत्या की धारा जुड़ने के बाद सैनी की अग्रिम जमानत याचिका मोहाली जिला अदालत में थी। इसी बीच एसआईटी ने छापामारी कर दी थी। जैसे ही उनके वकीलों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने तुरंत याचिका लगाकर उन्हें बचाने की कोशिश की। अदालत ने सैनी की गिरफ्तारी पर दो दिन की रोक तक लगा दी।

इसके बाद जैसे ही अदालत में सुनवाई हुई तो अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई और जमानत याचिका खारिज करते समय बड़ी ही तलख टिप्पणी की थी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से भी सैनी को निराशा ही हाथ लगी है।

बता दें कि शुक्रवार को सैनी की तलाश में पुलिस टीमों ने दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और सैनी के पैतृक गांव होशियारपुर में भी दबिश दी। वहां उनके करीबी लोगों से भी पूछताछ की है। लेकिन पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लग रहा है। हालांकि सैनी के मोबाइल, ईमेल और व्हाट्सएप नंबर पर भी पुलिस की नजर है। पुुलिस का कहना है कि जल्दी ही सैनी काबू कर लिए जाएंगे।

29 साल पुराना है मामला

यह मामला 29 साल पुराना 1991 का है। जब पूर्व डीजीपी सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। इस दौरान उन पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें सैनी बच गए थे, जबकि उनके तीन गनमैन मारे गए थे। उन पर आरोप है कि इसके बाद सैनी ने मोहाली से बलवंत सिंह मुल्तानी को घर से जबरदस्ती तरीके से उठाया था। जिसके बाद वह घर नहीं आया और यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका है।

सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने डिफेक्ट केसों की सूची में रखा सैनी पर हत्या का केस, सोमवार को सुनवाई
  • एसआईटी को मिले दो और दिन, पुलिस टीमें सैनी को दबोचने के लिए कर रहीं छापामारी

विस्तार

29 साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण और हत्या के मामले में भूमिगत चल रहे पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सैनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। लेकिन उनके वकीलों की ओर से लगाई गई याचिका में कुछ दस्तावेजों की कमी रह गई थी। इस कारण उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग केसों (डिफेक्ट सूची) में डाल दिया गया है।

शनिवार-रविवार को छुट्टी के कारण सोमवार को ही सैनी की याचिका लगेगी। ऐसे में अब पंजाब पुलिस द्वारा गठित एसआईटी को उन्हें गिरफ्तारी करने के लिए और समय मिल गया है। मिली जानकारी के मुताबिक बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण केस में पूर्व डीजीपी सैनी के खिलाफ हत्या की धारा अगस्त के अंत में जोड़ी थी। उसी समय से वह भूमिगत चल रहे हैं। यहां तक कि उनके सुरक्षा कर्मियों को भी उनकी जानकारी नहीं है कि वह कहां हैं।

हालांकि उनके वकील उन्हें सलाखों के पीछे जाने से बचाने को पूूरी जंग लड़ रहे हैं। जब हत्या की धारा जुड़ने के बाद सैनी की अग्रिम जमानत याचिका मोहाली जिला अदालत में थी। इसी बीच एसआईटी ने छापामारी कर दी थी। जैसे ही उनके वकीलों को इसकी भनक लगी तो उन्होंने तुरंत याचिका लगाकर उन्हें बचाने की कोशिश की। अदालत ने सैनी की गिरफ्तारी पर दो दिन की रोक तक लगा दी।

इसके बाद जैसे ही अदालत में सुनवाई हुई तो अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई और जमानत याचिका खारिज करते समय बड़ी ही तलख टिप्पणी की थी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से भी सैनी को निराशा ही हाथ लगी है।


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दिल्ली से होशियारपुर तक छापामारी

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