महाराष्ट्र सरकार से मेरा कोई टकराव नहीं, बोले राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी

Published by Razak Mohammad on

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी
– फोटो : Amar Ujala (File)

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राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शुक्रवार को कहा कि मेरा महाराष्ट्र सरकार से कोई टकराव नहीं है। मैं किसी के काम में हस्तक्षेप नहीं करता। अगर एक साल और यहां रह गया तो मैं मराठी भी बोलने लगूंगा। राज्यपाल के रूप में अपने एक साल के कार्यकाल पर आधारित कॉफी टेबल बुक “जन राज्यपालः भगत सिंह कोश्यारी” के विमोचन के दौरान उन्होंने यह बात कही।

कंगना मामले में नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर राज्यपाल ने कहा कि मैंने तो कहीं नाराजगी नहीं जताई। बीते पांच सितंबर को महाराष्ट्र के राज्यपाल के तौर पर एक साल का कार्यकाल पूरा करने वाले राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि इन एक सालों के दौरान मैंने राज्य के हर कोने में जाने का प्रयास किया।

महाराष्ट्र के 35 जिलों में से 20 जिलों का दौरा किया। महाराष्ट्र में राज्यपाल के रूप में आने पर देखा कि यहां अतिवृष्टि से किसानों का भारी नुकसान हुआ था। विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई जिसकी वजह से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। मेरी हालत सिर मुंडाते ही ओले पड़ने वाली हो गई। इस दौरान सरकारी खजाने की हालत ठीक होने के बावजूद मैंने किसानों के लिए 8 हजार करोड़ की राहत राशि घोषित की और किसानों को तुरंत राहत राशि बांटने का निर्देश दिया।

‘मुद्दई चुस्त, गवाह सुस्त’

शुक्रवार को राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में राज्यपाल कोश्यारी ने विधान परिषद की राज्यपाल मनोनित रिक्त 12 सीटों पर नियुक्ति में हो रहे देरी के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यहां तो स्थिति ‘मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त’ वाली है। जिनको नाम भेजना है, वे नाम ही नहीं भेज रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना कहा कि मैं दो महीने से नाम आने का इंतजार कर रहा हूं।

मुझे लोगों से मिलना-जुलना पसंद है

राज्यपाल ने कहा कि मुझे लोगों से मिलना-जुलना अच्छा लगता है। मैं घूमंतू प्रवृत्ति का आदमी हूं। एक साल में 225 से अधिक कार्यक्रमों में शामिल हुआ। जब मैं कोल्हापुर विश्वविद्यालय में गया तो वहां के लोगों ने मुझे बताया कि आप 16 साल बाद यहां आने वाले राज्यपाल हैं। मुझे आश्चर्य हुआ कि इतने वर्षों तक इस विश्वविद्यालय का कोई कुलाधिपति यहां आया ही नहीं। इस दौरान मैं गड़चिरौली व  नंदुरबार के दूरदराज के गांवों में गया और गांव में ही रात्रि विश्राम किया। मुझे गांव के लोगों से मिल कर अच्छा लगा।

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शुक्रवार को कहा कि मेरा महाराष्ट्र सरकार से कोई टकराव नहीं है। मैं किसी के काम में हस्तक्षेप नहीं करता। अगर एक साल और यहां रह गया तो मैं मराठी भी बोलने लगूंगा। राज्यपाल के रूप में अपने एक साल के कार्यकाल पर आधारित कॉफी टेबल बुक “जन राज्यपालः भगत सिंह कोश्यारी” के विमोचन के दौरान उन्होंने यह बात कही।

कंगना मामले में नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर राज्यपाल ने कहा कि मैंने तो कहीं नाराजगी नहीं जताई। बीते पांच सितंबर को महाराष्ट्र के राज्यपाल के तौर पर एक साल का कार्यकाल पूरा करने वाले राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि इन एक सालों के दौरान मैंने राज्य के हर कोने में जाने का प्रयास किया।

महाराष्ट्र के 35 जिलों में से 20 जिलों का दौरा किया। महाराष्ट्र में राज्यपाल के रूप में आने पर देखा कि यहां अतिवृष्टि से किसानों का भारी नुकसान हुआ था। विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई जिसकी वजह से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। मेरी हालत सिर मुंडाते ही ओले पड़ने वाली हो गई। इस दौरान सरकारी खजाने की हालत ठीक होने के बावजूद मैंने किसानों के लिए 8 हजार करोड़ की राहत राशि घोषित की और किसानों को तुरंत राहत राशि बांटने का निर्देश दिया।

‘मुद्दई चुस्त, गवाह सुस्त’

शुक्रवार को राजभवन में पत्रकारों से बातचीत में राज्यपाल कोश्यारी ने विधान परिषद की राज्यपाल मनोनित रिक्त 12 सीटों पर नियुक्ति में हो रहे देरी के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यहां तो स्थिति ‘मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त’ वाली है। जिनको नाम भेजना है, वे नाम ही नहीं भेज रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना कहा कि मैं दो महीने से नाम आने का इंतजार कर रहा हूं।

मुझे लोगों से मिलना-जुलना पसंद है

राज्यपाल ने कहा कि मुझे लोगों से मिलना-जुलना अच्छा लगता है। मैं घूमंतू प्रवृत्ति का आदमी हूं। एक साल में 225 से अधिक कार्यक्रमों में शामिल हुआ। जब मैं कोल्हापुर विश्वविद्यालय में गया तो वहां के लोगों ने मुझे बताया कि आप 16 साल बाद यहां आने वाले राज्यपाल हैं। मुझे आश्चर्य हुआ कि इतने वर्षों तक इस विश्वविद्यालय का कोई कुलाधिपति यहां आया ही नहीं। इस दौरान मैं गड़चिरौली व  नंदुरबार के दूरदराज के गांवों में गया और गांव में ही रात्रि विश्राम किया। मुझे गांव के लोगों से मिल कर अच्छा लगा।



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