महाराष्ट्र : औरंगाबाद के कोरोना प्रभावित 341 में से 206 गांव संक्रमण से मुक्त हुए

Published by Razak Mohammad on


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Updated Fri, 11 Sep 2020 04:49 PM IST

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : पिक्साबे

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महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में कोरोना वायरस से प्रभावित 341 गांवों में से कम से कम 206 गांव महामारी को हराने में कामयाब साबित हुए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि इन गांवों में शुक्रवार तक कोरोना वायरस का एक भी मरीज नहीं है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंगेश गोंडवले ने कहा कि कंटेनमेंट जोन की निगरानी और बुजुर्ग ग्रामीणों की लगातार जांच ने संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद की। 

उन्होंने कहा कि जिले के 1368 गांवों में से 341 में कोविड-19 के मामले सामने आए थे। इनमें से 206 गांवों में संक्रमण के प्रसार पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि 67 गांवों में पिछले 28 दिनों से कोविड-19 का एक भी मामला सामने नहीं आया है। 63 गांवों में पिछले 14 दिन से एक भी मरीज नहीं मिला है और 76 अन्य गांवों में शुक्रवार को कोरोना वायरस का कोई मरीज नहीं था।

मंगेश ने बताया कि कोरोना वायरस से प्रभावित 341 गांवों में से 289 में एक से 10 तक संक्रमण के मामले थे। जबकि 39 गांवों में मामलों की संख्या 10 से 50 के बीच थी। वहीं, 13 गावों में हर गांव में मरीजों की संख्या 50 से ज्यादा थी। उन्होंने कहा, हमने लगातार कंटेनमेंट जोन की निगरानी की और बफर जोन में बुजुर्गों पर नजर रखी। इससे मामलों के जल्दी पता चलने में और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिली। 

हालांकि, उन्होंने कहा कि जिले के ग्रामीण इलाकों में रैपिड एंटिजेन टेस्ट किट की कमी बड़ा मामला बन गया है। उन्होंने कहा, ‘हमने 30 हजार टेस्टिंग किट का ऑर्डर दे रखा है। एंटीजेन किट की सप्लाई सीमित है और इसलिए कभी-कभी हम अन्य स्थानीय प्रशासनिक निकायों से ये किट उधार लेते हैं।’ उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने की दर (रिकवरी रेट) अब 77 फीसदी हो गई है। 

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में कोरोना वायरस से प्रभावित 341 गांवों में से कम से कम 206 गांव महामारी को हराने में कामयाब साबित हुए हैं। एक अधिकारी ने बताया कि इन गांवों में शुक्रवार तक कोरोना वायरस का एक भी मरीज नहीं है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंगेश गोंडवले ने कहा कि कंटेनमेंट जोन की निगरानी और बुजुर्ग ग्रामीणों की लगातार जांच ने संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद की। 

उन्होंने कहा कि जिले के 1368 गांवों में से 341 में कोविड-19 के मामले सामने आए थे। इनमें से 206 गांवों में संक्रमण के प्रसार पर काबू पा लिया गया है। उन्होंने कहा कि 67 गांवों में पिछले 28 दिनों से कोविड-19 का एक भी मामला सामने नहीं आया है। 63 गांवों में पिछले 14 दिन से एक भी मरीज नहीं मिला है और 76 अन्य गांवों में शुक्रवार को कोरोना वायरस का कोई मरीज नहीं था।

मंगेश ने बताया कि कोरोना वायरस से प्रभावित 341 गांवों में से 289 में एक से 10 तक संक्रमण के मामले थे। जबकि 39 गांवों में मामलों की संख्या 10 से 50 के बीच थी। वहीं, 13 गावों में हर गांव में मरीजों की संख्या 50 से ज्यादा थी। उन्होंने कहा, हमने लगातार कंटेनमेंट जोन की निगरानी की और बफर जोन में बुजुर्गों पर नजर रखी। इससे मामलों के जल्दी पता चलने में और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिली। 

हालांकि, उन्होंने कहा कि जिले के ग्रामीण इलाकों में रैपिड एंटिजेन टेस्ट किट की कमी बड़ा मामला बन गया है। उन्होंने कहा, ‘हमने 30 हजार टेस्टिंग किट का ऑर्डर दे रखा है। एंटीजेन किट की सप्लाई सीमित है और इसलिए कभी-कभी हम अन्य स्थानीय प्रशासनिक निकायों से ये किट उधार लेते हैं।’ उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने की दर (रिकवरी रेट) अब 77 फीसदी हो गई है। 



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