महामारी में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 68 लाख किसानों तक ऐसे पहुंचा रहे अपनी बात, अपनाया ये तरीका

Published by Razak Mohammad on

महज पांच से पंद्रह किसानों के समूह को संभाग स्तर पर बुलाया। वहां सोशल डिस्टेंसिंग एवं कोरोना से बचाव के दूसरे तरीके इस्तेमाल करते हुए बैठक आयोजित की। वहां से संदेश लेकर वे किसान नेता जिला स्तर पर गए। उसके बाद एक टीम ने ब्लॉक स्तर पर दर्जनभर किसानों को बुलाया। वहां से दो किसान प्रतिनिधियों ने गांव में जाकर अपनी बात कही।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप के वरिष्ठ सदस्य एवं किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश, 2020 एवं मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और सुरक्षा) समझौता अध्यादेश, 2020 को वापस लेने के लिए आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि ये अध्यादेश किसान विरोधी है।

केंद्र सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाना चाहिए। रामपाल के मुताबिक केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में इस अध्यादेश को कानून का रूप दे सकती है, इसलिए वे देशभर में किसान जागरण यात्राएं निकाल रहे हैं। राजस्थान में छह सितंबर को जयपुर संभाग के किसान प्रतिनिधियों की बैठक थी। उसी दिन शाम को अजमेर संभाग, सात सितंबर को जोधपुर संभाग, आठ सितंबर को उदयपुर, 9 सितंबर को कोटा संभाग, 11 को भरतपुर और 12 सितंबर को बीकानेर संभाग की बैठक होगी।

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के दौरान हमारे लिए सभी किसानों तक अपनी बात पहुंचाना एक बड़ी चुनौती रही है। यह एक ऐसा समय है कि हम न तो किसानों को रैली या प्रदर्शन के लिए कह सकते हैं, मगर दूसरी ओर हमें सरकार तक अपनी बात भी पहुंचानी है। किसान तो पहले ही गरीबी और कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, ऐसे में हम उसके जीवन को खतरे में नहीं डाल सकते।

वह बताते हैं कि संस्था ने दस पंद्रह किसानों की टीम बना रखी है। हर संभाग में किसान प्रतिनिधि जाते हैं और अपनी बात रखते हैं। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरी बातों का ख्याल रखा जाता है। बैठक का शेड्यूल इस तरह तैयार किया गया है कि वह जल्द से जल्द निपट जाए। यदि कहीं पर दो चार प्रतिनिधि ज्यादा पहुंच जाते हैं तो खुले में बैठक की जाती है।

सभी प्रतिनिधियों को कोरोना से बचाव की जानकारी भी दी जाती है। बैठक के जरूरी बिंदु लेकर प्रतिनिधि जिला स्तर पर जाते हैं। वहां भी दर्जनभर से ज्यादा प्रतिनिधि नहीं बुलाए जाते। उसके बाद विभिन्न स्तरों से गुजरती हुई यह कड़ी गांव के आखिरी किसान तक पहुंच जाती है। इससे न तो सोशल डिस्टेंसिंग का सुरक्षा चक्र टूटता है और न ही किसानों को एक जगह पर भीड़ जुटाने के लिए कहा जाता है। हमारी बात हर किसान तक जा रही है और कोरोना का कोई जोखिम भी नहीं उठाया जा रहा। इस मुहिम में जिन किसानों के पास स्मार्टफोन हैं, उनके पास बैठक के अहम बिंदु और वीडियो भेज दिया जाता है।



Source link

Categories: Rajasthan

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *