मध्यप्रदेश में लागू हुआ धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश, शिवराज सरकार ने जारी की अधिसूचना

Published by Razak Mohammad on


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Updated Sat, 09 Jan 2021 07:27 PM IST

शिवराज सिंह चौहान
– फोटो : यूट्यूब स्क्रीनग्रैब

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मध्यप्रदेश में शनिवार से लव-जिहाद के खिलाफ कानून लागू हो गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 को राजपत्र (Gazette) में इसे अधिसूचित किया है। जिसके बाद से यह कानून प्रभावी हो गया है।

इस विधेयक में शादी या अन्य कपटपूर्ण तरीके से कराया गया धर्मांतरण अपराध माना जाएगा जिसके मामले में अधिकतम 10 साल की कैद और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

कठोर सजा का प्रावधान
धर्म छिपाकर (कथित लव जिहाद) शादी के अपराध में तीन साल से 10 साल तक के कारावास और 50 हजार रुपये के दंड का प्रावधान है। सामूहिक धर्म परिवर्तन का प्रयास करने पर पांच से 10 साल तक की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

नाबालिग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ ऐसा अपराध करने पर दो से 10 साल तक की कैद और कम से कम 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 

यही नहीं विधेयक में अपनी इच्छा से धर्म संपरिवर्तन करने वाले या कराने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला दंडाधिकारी सूचित किया जाना अनिवार्य किया गया है। ऐसा नहीं करने पर कम से कम तीन से पांच साल की कैद और कम से कम 50 हजार रुपए के अर्थदंड का प्रावधान है। 

मध्यप्रदेश में शनिवार से लव-जिहाद के खिलाफ कानून लागू हो गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 को राजपत्र (Gazette) में इसे अधिसूचित किया है। जिसके बाद से यह कानून प्रभावी हो गया है।

इस विधेयक में शादी या अन्य कपटपूर्ण तरीके से कराया गया धर्मांतरण अपराध माना जाएगा जिसके मामले में अधिकतम 10 साल की कैद और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

कठोर सजा का प्रावधान

धर्म छिपाकर (कथित लव जिहाद) शादी के अपराध में तीन साल से 10 साल तक के कारावास और 50 हजार रुपये के दंड का प्रावधान है। सामूहिक धर्म परिवर्तन का प्रयास करने पर पांच से 10 साल तक की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

नाबालिग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ ऐसा अपराध करने पर दो से 10 साल तक की कैद और कम से कम 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 

यही नहीं विधेयक में अपनी इच्छा से धर्म संपरिवर्तन करने वाले या कराने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला दंडाधिकारी सूचित किया जाना अनिवार्य किया गया है। ऐसा नहीं करने पर कम से कम तीन से पांच साल की कैद और कम से कम 50 हजार रुपए के अर्थदंड का प्रावधान है। 





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