मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है, निबंध इतिहास व 2021 शायरी | Labour Day Date, Essay, history, Shayari In Hindi

International Day

कार्यकर्ता का मतलब हमेशा गरीब नहीं होता, श्रमिक वह इकाइयाँ होती हैं जो हर सफलता का अभिन्न अंग होती हैं, चाहे वह ईट-पोषित मानव हो या कार्यालय की फाइलों का बोझ वाला कर्मचारी। हर व्यक्ति जो किसी संस्था के लिए काम करता है और बदले में पैसे लेता है, वह मजदूर है

हमारे समाज में मजदूर वर्ग को हमेशा गरीब इंसान माना जाता है, हम उसे ही मानते हैं जो धूप में मजदूर हैं। इसके विपरीत, कामकाजी समाज एक अभिन्न अंग है,

मजदूर बर्ग समाज को मजबूत और परिपक्त बनता  हैं ,ये बर्ग समाज को सफलता की और ले जाता है।  जो किसी संस्था में या निजी तौर पर किसी के लिए काम करते हैं, बदले में कड़ी मेहनत करते हैं। हर मानव मजदूर जो शारीरिक और मानसिक रूप से मेहनती है, चाहे वह ईंट सीमेंट से सना हुआ व्यक्ति हो या एसी कार्यालय में फाइल के बोझ तले बैठा कर्मचारी। इन सभी मजदूरों और मजदूरों को सम्मान देने के लिए मजदूर दिवस मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस को अंतर्राष्ट्रीय कर्मचारी दिवस और मई दिवस के रूप में भी जाना जाता है। यह पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है, ताकि कार्यकर्ता संघ को बढ़ावा और प्रोत्साहित कर सकें।  यूरोप में इसे पारंपरिक रूप से वसंत की छुट्टी घोषित किया गया है। 1 मई को पूरी दुनिया में मजदूर दिवस मनाया जाता है, दुनिया के लगभग 80 देशों में इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है, कुछ जगहों पर इसे मनाने के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। ये दिवस अमेरिका और कनाडा में सितम्बर के पहले सोमवार को बनाया जाता है।

 भारत में हम इसे मजदूर दिवस कहते हैं।  हमारी सबसे बड़ी भूल है मजदूर को मजबूर समझना।  वह अपनी खून पसीने की मेहनत खाता है।  ये स्वाभिमानी लोग होते हैं।,

जो चंद लोगों में भी खुश रहते हैं और अपनी मेहनत और लगन पर विश्वास करते हैं। वो किसी के आगे हाथ फैलाना पसंद नहीं करते।

मजदूर दिवस

मजदूर दिवस का इतिहास (Labour Day History in Hindi)–

भारत में मजदूर दिवस कामकाजी पुरुषों और महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है। मजदूर दिवस पहली बार भारत में 1 मई 1923 को मद्रास (अब चेन्नई) में मनाया गया था, इसकी शुरुआत लेबर फार्मर्स पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा की गई थी। इस अवसर पर आजादी से पहले भारत में सबसे पहले लाल झंडे का इस्तेमाल किया गया था। इस पार्टी के नेता सिंगारावेलु चेट्टियार ने इस दिन को मनाने के लिए 2 कार्यक्रमों का आयोजन किया। पहली बैठक ट्रिप्लिकेन बीच में और दूसरी मद्रास उच्च न्यायालय के सामने हुई। सिंगारवेलु ने भारत सरकार को एक मई को मजदूरदिवस घोषित करने के साथ-साथ इस दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने का अनुरोध प्रस्तुत किया था। उन्होंने राजनीतिक दलों को अहिंसक होने पर जोर दिया।

विश्व में मजदूर दिवस की उत्पत्ति –

1 मई 1986 को अमेरिका की सभी ट्रेड यूनियनों ने मिलकर फैसला किया कि वे 8 घंटे से अधिक काम नहीं करेंगे, जिसके लिए वे हड़ताल पर जाते हैं। इस दौरान मजदूर वर्ग से 10-16 घंटे काम कराया जाता था, साथ ही उनकी सुरक्षा का भी ध्यान नहीं रखा जाता था। उस समय काम के दौरान मजदूर को कई चोटें भी आई थीं, कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी. काम के दौरान, बच्चों, महिलाओं और पुरुषों की मृत्यु का अनुपात बढ़ रहा था, जिसके कारण यह आवश्यक था कि सभी लोग अपने अधिकारों के हनन का विरोध करने और एक स्वर में विरोध करने के लिए आगे आएं।

इस स्ट्राइक के दौरान 4 मई को शिकागो के हेमार्केट में अचानक एक शख्स ने बम ब्लास्ट कर दिया, जिसके बाद वहां मौजूद पुलिस अंधाधुंध फायरिंग करने लगती है. जिससे कई मजदूरों और आम लोगों की मौत हो जाती है। इसके साथ ही 100 से ज्यादा लोग घायल हो जाते हैं. इस विरोध का अमेरिका में तत्काल परिणाम नहीं मिला, लेकिन कुछ समय बाद कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से भारत और अन्य देशों में 8 घंटे की कार्य प्रणाली को अपनाया गया। तब से लेकर आज तक पूरी दुनिया में मजदूर दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने लगा, इस दिन मजदूर वर्ग तरह-तरह की गाड़ियों को निकाल कर प्रदर्शन करता है।

भारत में मजदूर दिवस समारोह (Labour Day Celebration)–

मजदूर दिवस न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में विरोध के रूप में मनाया जाता है। ऐसा तब होता है जब कामकाजी पुरुष और महिलाएं अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सड़क पर जुलूस निकालते हैं। विभिन्न व्यापार संगठन और ट्रेड यूनियन अपने लोगों के साथ जुलूस, रैली और परेड निकालते हैं। जुलूसों के अलावा, बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं होती हैं, ताकि वे इसमें भाग ले सकें और एकजुटता का सही अर्थ समझ सकें। इस तरह बच्चे एकता की ताकत को समझ सकते हैं, जो मजदूर दिवस मनाने का सही जरिया है। इस दिन सभी न्यूज चैनल्स, रेडियो और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हैप्पी लेबर डे के मैसेज दिखाए जाते हैं, कर्मचारी भी एक-दूसरे को मैसेज कर शुभकामनाएं देते हैं. ऐसा करने से लोगों में मजदूर दिवस के प्रति सामाजिक जागरूकता भी बढ़ती है।

मजदूर दिवस

इन सबके अलावा, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता जनता के सामने भाषण देते हैं, वे सभी ऐसे मौकों का पूरा फायदा उठाते हैं ताकि अगला चुनाव जीत सकें। १९६० में भाषा के आधार पर बंबई को दो भागों में बाँटा गया, जिससे इस दिन (१ मई) को गुजरात और महाराष्ट्र को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिला।इसलिए  इस  दिवस को महाराष्ट्र और गुजरात में  बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।  ये दिवस एक ऐसा अवसर है जब पूरी दुनिया मजदूर बर्ग की भाबना को समझते हैं और जश्न मनाते है।

 ये एक ऐसा दिन है जब सभी मजदूरों को अपनी ताक़त और एकता दिखाने का मौका मिलता है , जो दर्शाता है कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों के लिए सकारात्मक तरीके से कितनी प्रभावी ढंग से लड़ सकता है।यह उन लोगों के प्रति मेरी भावना है जो नौकरों को गुलाम समझते हैं, उनके अधिकारों को मारते हैं और उनका शोषण करते हैं। श्रमिक महत्वहीन नहीं है, श्रम समाज की एक महत्वपूर्ण इकाई है।

भारतमें 2021 में मजदूर दिवस कब मनाया जायेगा?  (Labour Day 2021 Date )–

हर साल की तरह इस साल भी 1 मई को मजदूर दिवस (Labor Day) के तौर पर मनाया जायेगा और इस दिन सभी का अन्तराष्ट्रीय अवकाश होता हैं .

मजदूर दिवस के दिन स्कूलों में क्या किया जाता है ?

वैसे तो 1 मई यानी 1 मई को लगभग सभी कंपनियों और विभागों में छुट्टी होती है, लेकिन स्कूल में इसका खास महत्व होता है. इस दिन बच्चे स्कूलों में मजदूरों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। वह तरह-तरह के नाटक करता है। इतना ही नहीं, स्कूल के प्राचार्य अपने सह-शिक्षकों का सम्मान करते हैं। कुछ बच्चे मजदूर दिवस पर भाषण भी लिखते हैं और उन्हें मंच पर पढ़ते हैं। कुल मिलाकर बच्चों को स्कूल में श्रमिकों के सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है।

मजदूर दिवस पर शायरी (Labour Day Shayari / SMS / Poem)

  • मैं मजदूर हूँ मजबूर नहीं यह कहने मैं मुझे शर्म नहीं

अपने पसीने की खाता हूँ मैं मिट्टी को सोना बनाता हूँ

  • हर कोई यहाँ मजदूर हैं चाहे पहने सूट बूट या मैला

मेहनत करके कमाता हैं

कोई सैकड़ा कोई  देहला

हर कोई मजदूर ही कहलाता हैं

चाहे अनपढ़ या पढ़ा लिखा

  • जिसके कंधो पर बोझ बढ़ा वो भारत माँ का बेटा कौन

जिसने पसीने से भूमि को सींचा

वो भारत माँ का बेटा कौन

वह किसी का गुलाम नहीं

अपने दम पर जीता हैं

सफलता का एक कण ही सही

लेकिन हैं अनमोल जो मजदूर कहलाता हैं..

मजदूर दिवस

जिसके कंधो पर बोझ बढ़ा
वो भारत माँ का बेटा कौन।
जिसने पसीने से भूमि को सींचा
वो भारत माँ का बेटा कौन।
वह किसी का गुलाम नहीं
अपने दम पर जीता हैं।
सफलता एक एक कण ही सही
लेकिन है अनमोल जो मज़दूर कहलाता हैं।

       मज़दूर दिवस  🙂

  • हर इमारत की नींव हैं अमीरों की तक़दीर हैं

खून पसीना बहाकर अपना

पूरा करते वो अमीरों का सपना

दो वक्त की उसे मिले ना मिले

पर उसी के हाथो करोड़ो की तक़दीर लिखे

माना उसकी किस्मत हैं

अभी नहीं हैं एशो आराम

पर उसको ना भुलाना तुम

ना बनाना बैगाना तुम

देना उसे उसका हक़

मजदूर हैं वह मेहनती शख्स

  • मेहनत उसकी लाठी हैं मजबूती उसकी काठी हैं

बुलंदी नहीं पर नीव हैं

यही मजदूरी जीव हैं.

  • सफलता के मार्ग में योगदान अनमोल हैं चाहे हो मालिक या कोई नौकर

कोई ईकाई तुच्छ नहीं

सबका अपना मान हैं

कहने को एक छोटा लेबर ही सही

पर उसी को रास्ते का ज्ञान हैं

घमंड ना करना इस ऊंचाई का कभी

तेरे कंधो पर इनके पसीने का भार हैं

  • मजदूर ऊँचाई की नींव हैं गहराई में हैं पर अंधकार में क्यूँ

उसे तुच्छ ना समझाना

वो देश का गुरुर हैं