मंत्री को पसंद नहीं आए अधिकारी, कंपनी ने दफ्तर में बिठा दिया खाली

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Updated Sat, 09 Jan 2021 02:38 AM IST

शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड
– फोटो : अमर उजाला

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राजधानी में पेयजल व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही कंपनी का एक अधिकारी, मंत्री जी को पसंद नहीं आया है। कंपनी की कमान संभालने के लिए तीन महीने पहले अधीक्षण अभियंता रैंक के इस अधिकारी की तैनाती की थी। लेकिन मंत्री के दबाव में अधिकारी को एमडी की शक्तियां देना तो दूर, एक फाइल तक साइन करने के लिए नहीं दी जा रही। हालत यह है कि 8 अक्तूबर 2020 को कंपनी में ज्वाइनिंग देने वाले अधीक्षण अभियंता विनोद ठाकुर अब तक खाली बैठे हैं।

तीन महीने में इन्होंने एक कागज तक साइन नहीं किया। हां, इतना जरूर है कि कंपनी ने इनकी सहूलियत के लिए एक गाड़ी, कर्मचारी और दफ्तर की सुविधा जरूर दे दी है। साथ ही हर महीने सैलरी भी दी जा रही है। महीनों से खाली बैठे अधीक्षण अभियंता कंपनी के लिए कोई भी काम करने को तैयार है।

बाकायदा कंपनी से काम देने को भी कहा लेकिन नहीं मिला। इन्हें एमडी की जगह जीएम का पद भी मंजूर है, लेकिन कंपनी उस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही। भाजपा के कई पार्षद भी अधिकारी की तैनाती के लिए मंत्री के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन बात नहीं बन रही। मजबूरन अब अधीक्षण अभियंता को वापस अपने आईपीएच महकमे में जाना पड़ रहा है। 

आईपीएच महकमा नाराज, मंत्री तक शिकायत
पेयजल कंपनी के एमडी धर्मेंद्र गिल के चीफ इंजीनियर बनने के बाद से यह पद खाली पड़ा है। इनका मंडी के लिए तबादला हो चुका है लेकिन वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट में उनकी अहमियत को देखते हुए सरकार उन्हें कंपनी एमडी का अतिरिक्त कार्यभार भी दिया है। प्रोजेक्ट शुरू होने तक वह कंपनी की कमान संभाले रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार कंपनी की मांग पर ही बीते साल सितंबर में आईपीएच ने एमडी पद के लिए अधीक्षण अभियंता विनोद ठाकुर को भेजा था। इन्हें एमडी के पद के लिए तैयार करने को कहा था। लेकिन अब तक कंपनी ने उन्हें कोई पद नहीं दिया। इससे आईपीएच महकमा भी नाराज है। मामला आईपीएच मंत्री के दरबार तक पहुंचा है। अब चर्चा है कि अधिकारी को वापस बुलाया जा रहा है।

यह मेरे अधिकारों का हनन : विनोद ठाकुर
पेयजल कंपनी के अधीक्षण अभियंता विनोद ठाकुर ने कहा कि पेयजल कंपनी में प्रबंध निदेशक पद के लिए मुझे आईपीएच से भेजा था। इस पद के लिए 15 साल का अनुभव चाहिए जबकि मेरा 24 साल का अनुभव है। मैं इस पद के काबिल हूं। लेकिन अक्तूबर से लेकर अब तक कंपनी ने मुझे एक भी काम नहीं दिया। मैं कोई भी काम करने को तैयार हूं। काम न देकर मेरे अधिकारों का हनन हुआ है।

राजधानी में पेयजल व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही कंपनी का एक अधिकारी, मंत्री जी को पसंद नहीं आया है। कंपनी की कमान संभालने के लिए तीन महीने पहले अधीक्षण अभियंता रैंक के इस अधिकारी की तैनाती की थी। लेकिन मंत्री के दबाव में अधिकारी को एमडी की शक्तियां देना तो दूर, एक फाइल तक साइन करने के लिए नहीं दी जा रही। हालत यह है कि 8 अक्तूबर 2020 को कंपनी में ज्वाइनिंग देने वाले अधीक्षण अभियंता विनोद ठाकुर अब तक खाली बैठे हैं।

तीन महीने में इन्होंने एक कागज तक साइन नहीं किया। हां, इतना जरूर है कि कंपनी ने इनकी सहूलियत के लिए एक गाड़ी, कर्मचारी और दफ्तर की सुविधा जरूर दे दी है। साथ ही हर महीने सैलरी भी दी जा रही है। महीनों से खाली बैठे अधीक्षण अभियंता कंपनी के लिए कोई भी काम करने को तैयार है।

बाकायदा कंपनी से काम देने को भी कहा लेकिन नहीं मिला। इन्हें एमडी की जगह जीएम का पद भी मंजूर है, लेकिन कंपनी उस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही। भाजपा के कई पार्षद भी अधिकारी की तैनाती के लिए मंत्री के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन बात नहीं बन रही। मजबूरन अब अधीक्षण अभियंता को वापस अपने आईपीएच महकमे में जाना पड़ रहा है। 

आईपीएच महकमा नाराज, मंत्री तक शिकायत

पेयजल कंपनी के एमडी धर्मेंद्र गिल के चीफ इंजीनियर बनने के बाद से यह पद खाली पड़ा है। इनका मंडी के लिए तबादला हो चुका है लेकिन वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट में उनकी अहमियत को देखते हुए सरकार उन्हें कंपनी एमडी का अतिरिक्त कार्यभार भी दिया है। प्रोजेक्ट शुरू होने तक वह कंपनी की कमान संभाले रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार कंपनी की मांग पर ही बीते साल सितंबर में आईपीएच ने एमडी पद के लिए अधीक्षण अभियंता विनोद ठाकुर को भेजा था। इन्हें एमडी के पद के लिए तैयार करने को कहा था। लेकिन अब तक कंपनी ने उन्हें कोई पद नहीं दिया। इससे आईपीएच महकमा भी नाराज है। मामला आईपीएच मंत्री के दरबार तक पहुंचा है। अब चर्चा है कि अधिकारी को वापस बुलाया जा रहा है।

यह मेरे अधिकारों का हनन : विनोद ठाकुर

पेयजल कंपनी के अधीक्षण अभियंता विनोद ठाकुर ने कहा कि पेयजल कंपनी में प्रबंध निदेशक पद के लिए मुझे आईपीएच से भेजा था। इस पद के लिए 15 साल का अनुभव चाहिए जबकि मेरा 24 साल का अनुभव है। मैं इस पद के काबिल हूं। लेकिन अक्तूबर से लेकर अब तक कंपनी ने मुझे एक भी काम नहीं दिया। मैं कोई भी काम करने को तैयार हूं। काम न देकर मेरे अधिकारों का हनन हुआ है।

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