भूगोल और जलवायु के लिहाज से एलएसी पर की जाए लद्दाखी सैनिकों की तैनातीः सांसद नामग्याल

Published by Razak Mohammad on


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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दिया गया ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा एलएसी पर तनाव के बीच लद्दाख में भी जोर पकड़ने लगा है। यहां इसे सरहद पर लद्दाखी सैनिकों की तैनाती से भी जोड़ा जा रहा है। लद्दाख के पूर्व सैनिकों से लेकर जनप्रतिनिधियों की तरफ से एलएसी पर लद्दाखी सैनिकों की तैनाती की मांग तेज हो रही है। 

लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने कहा कि ‘वोकल फार लोकल’ से चीन को करारा जवाब दिया जा सकता है। अग्रिम इलाकों में लोकल यानी लद्दाखी सैनिकों की तैनाती की जानी चाहिए। सांसद ने कहा कि गलवां में 20 सैनिक शहीद हो गए। भविष्य में अपनी तैयारी को और बेहतर करने के लिए लद्दाख के भूगोल और जलवायु के लिहाज से ज्यादा अनुकूल लद्दाखी सैनिकों की तैनाती होनी चाहिए। 

यह भी पढ़ेंः त्राल के बाद डोडा हुआ आतंक मुक्त, जानिए 1999 से 2019 तक जम्मू-कश्मीर में कब-कब हुए आतंकी हमले

कारगिल हीरो भी कर चुके हैं पैरवी
कारगिल युद्ध के हीरो और लद्दाख के शेर कहे जाने वाले महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल (रि) सोनम वांगचुक भी एलएसी पर लद्दाख स्काउट्स के जवानों की तैनाती पर जोर दे चुके हैं। कर्नल सोनम के अनुसार लद्दाख स्काउट्स की अब और बटालियनें खड़ी करने की जरूरत है।
 

लद्दाख की जलवायु में ढलने के लिए मैदानी इलाकों के जवानों को समय लगता है। लद्दाख में 12 हजार फुट तक की ऊंचाई पर तैनाती से पूर्व बाहरी सैनिकों को 6 दिन के लिए एक्लेमेटाइज (जलवायु के लिए अभ्यस्त बनाना) होना पड़ता है। इसी तरह से 12 से 15 हजार फुट की ऊंचाई पर अतिरिक्त चार दिन और 15 हजार फुट से ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्र में और चार दिन गुजारने के बाद ही तैनाती मिलती है।

यानी निचले इलाकों से लाए गए सैनिकों को 15 हजार फुट की ऊंचाई पर तैनाती से पहले 14 दिन तक अनिवार्य रूप से जलवायु अभ्यस्त होना पड़ता है। गलवां घाटी में जिस जगह 15 जून को हिंसक झड़प हुई थी, उस स्थान की समुद्रतल से ऊंचाई 14 हजार फुट बताई जा रही है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत दिया गया ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा एलएसी पर तनाव के बीच लद्दाख में भी जोर पकड़ने लगा है। यहां इसे सरहद पर लद्दाखी सैनिकों की तैनाती से भी जोड़ा जा रहा है। लद्दाख के पूर्व सैनिकों से लेकर जनप्रतिनिधियों की तरफ से एलएसी पर लद्दाखी सैनिकों की तैनाती की मांग तेज हो रही है। 

लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने कहा कि ‘वोकल फार लोकल’ से चीन को करारा जवाब दिया जा सकता है। अग्रिम इलाकों में लोकल यानी लद्दाखी सैनिकों की तैनाती की जानी चाहिए। सांसद ने कहा कि गलवां में 20 सैनिक शहीद हो गए। भविष्य में अपनी तैयारी को और बेहतर करने के लिए लद्दाख के भूगोल और जलवायु के लिहाज से ज्यादा अनुकूल लद्दाखी सैनिकों की तैनाती होनी चाहिए। 

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कारगिल हीरो भी कर चुके हैं पैरवी
कारगिल युद्ध के हीरो और लद्दाख के शेर कहे जाने वाले महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल (रि) सोनम वांगचुक भी एलएसी पर लद्दाख स्काउट्स के जवानों की तैनाती पर जोर दे चुके हैं। कर्नल सोनम के अनुसार लद्दाख स्काउट्स की अब और बटालियनें खड़ी करने की जरूरत है।
 


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क्यों जरूरी है लद्दाखियों की तैनाती

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