बागवानों को नहीं मिल रहे मजदूर, मंडी कैसे पहुंचेगा सेब

Published by Razak Mohammad on

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर


कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹365 & To get 20% off, use code: 20OFF

ख़बर सुनें

रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिले की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाला सेब सीजन शुरू हो चुका है। इन दिनों निचले सेब बहुल क्षेत्रों में सेब सीजन रफ्तार पकड़ने लगा है, लेकिन मजदूरों की कमी के चलते बागवान खासे परेशान हैं। ऊपरी क्षेत्रों में भी सेब सीजन शुरू होना है। ऐसे में बागवानों को मंडियों तक फसल पहुंचाने की चिंता सताने लगी है। बागवानों का कहना है कि यदि सेब सीजन के लिए मजदूर नहीं मिले तो सेब मंडियों तक नहीं पहुंच पाएगा और उन्हें करोड़ों का नुकसान होगा।
सूत्रों के अनुसार लॉकडाऊन एक से चार तक यानी जून, जुलाई और अगस्त में किन्नौर में 7,500 के करीब मजदूर 16 राज्यों से पहुंचे हैं। इनमें से कुछ मजदूर पावर प्रोजेक्टों, सीमा सड़क संगठन, जल शक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के कार्यों के लिए ठेकेदारों की ओर से लाए गए हैं। करीब 2 हजार मजदूर ही बागवानों के पास पहुंचे हैं। किन्नौर में उत्तर प्रदेश से 1796, उत्तराखंड से 271, बिहार से 816, चंडीगढ़ से 37, हरियाणा से 93, जम्मू कश्मीर से 688, पंजाब से 157, दिल्ली से 130, झारखंड से 487, मध्यप्रदेश से 113, वेस्ट बंगाल से 855, मुंबई से 806, ओडिशा से 123, छत्तीसगढ़ से 239 और नेपाल से 678 मजदूर पहुंचे हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमेश नेगी, निर्मल चंद, रिनचिन बिष्ट, चंद्र गोपाल और प्रीतम नेगी ने कहा कि भाजपा सरकार ने कहा था कि सेब सीजन में मजदूरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। नेपाल से मजदूरों को लाया जाएगा, लेकिन अब सरकार चुपचाप बैठी है। सेब सीजन शुरू हो चुका है और लेबर के बिना बागवान परेशान हो रहा है। उन्होंने सरकार से मजदूरों की उपलब्धता करवाने की मांग की है।
प्रशासन से बात करें बागवान : डीसी
उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद ने बताया जिले में अभी तक 7500 मजदूर पहुंचे हैं। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि किसी भी बागवान ने उन्हें मजदूरों के लिए संपर्क नहीं किया। किसी बागवान को मजदूरों की आवश्यकता है तो जिला प्रशासन से बात कर सकता है।

रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिले की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाला सेब सीजन शुरू हो चुका है। इन दिनों निचले सेब बहुल क्षेत्रों में सेब सीजन रफ्तार पकड़ने लगा है, लेकिन मजदूरों की कमी के चलते बागवान खासे परेशान हैं। ऊपरी क्षेत्रों में भी सेब सीजन शुरू होना है। ऐसे में बागवानों को मंडियों तक फसल पहुंचाने की चिंता सताने लगी है। बागवानों का कहना है कि यदि सेब सीजन के लिए मजदूर नहीं मिले तो सेब मंडियों तक नहीं पहुंच पाएगा और उन्हें करोड़ों का नुकसान होगा।

सूत्रों के अनुसार लॉकडाऊन एक से चार तक यानी जून, जुलाई और अगस्त में किन्नौर में 7,500 के करीब मजदूर 16 राज्यों से पहुंचे हैं। इनमें से कुछ मजदूर पावर प्रोजेक्टों, सीमा सड़क संगठन, जल शक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग के कार्यों के लिए ठेकेदारों की ओर से लाए गए हैं। करीब 2 हजार मजदूर ही बागवानों के पास पहुंचे हैं। किन्नौर में उत्तर प्रदेश से 1796, उत्तराखंड से 271, बिहार से 816, चंडीगढ़ से 37, हरियाणा से 93, जम्मू कश्मीर से 688, पंजाब से 157, दिल्ली से 130, झारखंड से 487, मध्यप्रदेश से 113, वेस्ट बंगाल से 855, मुंबई से 806, ओडिशा से 123, छत्तीसगढ़ से 239 और नेपाल से 678 मजदूर पहुंचे हैं।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमेश नेगी, निर्मल चंद, रिनचिन बिष्ट, चंद्र गोपाल और प्रीतम नेगी ने कहा कि भाजपा सरकार ने कहा था कि सेब सीजन में मजदूरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। नेपाल से मजदूरों को लाया जाएगा, लेकिन अब सरकार चुपचाप बैठी है। सेब सीजन शुरू हो चुका है और लेबर के बिना बागवान परेशान हो रहा है। उन्होंने सरकार से मजदूरों की उपलब्धता करवाने की मांग की है।

प्रशासन से बात करें बागवान : डीसी
उपायुक्त किन्नौर गोपाल चंद ने बताया जिले में अभी तक 7500 मजदूर पहुंचे हैं। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि किसी भी बागवान ने उन्हें मजदूरों के लिए संपर्क नहीं किया। किसी बागवान को मजदूरों की आवश्यकता है तो जिला प्रशासन से बात कर सकता है।

Source link

Categories: Rampur Bushahar

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *