‘बस्तर त माटा’ से नक्सलियों के खिलाफ लड़ रही पुलिस, बेनकाब कर रही आदिवासी विरोधी चेहरा

Published by Razak Mohammad on

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर।

Updated Wed, 16 Sep 2020 06:18 AM IST

बस्तर पुलिस की ओर से जारी पोस्टर।
– फोटो : ANI

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में स्थानीय पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ प्रचार अभियान शुरू किया है। इसके तहत नक्सलियों का आदिवासी विरोधी चेहरा उजागर किया जा रहा है। इसके लिए पोस्टर बैनर जारी करने से लेकर सोशल मीडिया तक की पूरी तैयारी पुलिस ने की हुई है।

राज्य के बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। पोस्टर जारी करते हुए उन्होंने बताया कि नक्सलियों के विकास विरोधी और आदिवासी विरोधी चेहरे को उजागर करने के लिए बस्तर पुलिस ने प्रति प्रचार युद्ध छेड़ा है।

अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए गोंडी बोली में ‘बस्तर त माटा’ और हल्बी बोली में ‘बस्तर चो आवाज’ नाम से जन जागरूकता अभियान शुरू किए गए हैं। इनके माध्यम से शीर्ष माओवादी (नक्सली) नेताओं की विकास विरोधी और आदिवासी विरोधी मानसिकता को बेनकाब किया जाएगा। हिंदी में इसका शाब्दिक अर्थ ‘बस्तर की आवाज’ है।

क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद जनसहयोग से नक्सल आतंक को समाप्त करना बस्तर पुलिस की प्राथमिकता रही है। कुछ महीनों से बस्तर में नक्सलियों के आतंक के विरुद्ध यह लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ अंदरूनी क्षेत्र में प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह प्रचार युद्ध शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बैनर, पोस्टर, लघु चल चित्र, ऑडियो क्लिप, नाच-गाना, गीत-संगीत और सोशल मीडिया जैसे प्रचार प्रसार के अन्य माध्यम से नक्सलियों के काले कारनामों को उजागर किया जाएगा।

स्थानीय गोंडी बोली में ‘बस्तर त माटा’ और हल्बी बोली में ‘बस्तर चो आवाज’ के नाम से प्रारंभ इस अभियान के माध्यम से बस्तर वासियों के विचारों को दुनिया तक पहुंचाया जाएगा। इसके माध्यम से स्थानीय नक्सल मिलिशिया कैडर्स और नक्सल सहयोगियों को हिंसा त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में स्थानीय पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ प्रचार अभियान शुरू किया है। इसके तहत नक्सलियों का आदिवासी विरोधी चेहरा उजागर किया जा रहा है। इसके लिए पोस्टर बैनर जारी करने से लेकर सोशल मीडिया तक की पूरी तैयारी पुलिस ने की हुई है।

राज्य के बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। पोस्टर जारी करते हुए उन्होंने बताया कि नक्सलियों के विकास विरोधी और आदिवासी विरोधी चेहरे को उजागर करने के लिए बस्तर पुलिस ने प्रति प्रचार युद्ध छेड़ा है।

अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए गोंडी बोली में ‘बस्तर त माटा’ और हल्बी बोली में ‘बस्तर चो आवाज’ नाम से जन जागरूकता अभियान शुरू किए गए हैं। इनके माध्यम से शीर्ष माओवादी (नक्सली) नेताओं की विकास विरोधी और आदिवासी विरोधी मानसिकता को बेनकाब किया जाएगा। हिंदी में इसका शाब्दिक अर्थ ‘बस्तर की आवाज’ है।

क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद जनसहयोग से नक्सल आतंक को समाप्त करना बस्तर पुलिस की प्राथमिकता रही है। कुछ महीनों से बस्तर में नक्सलियों के आतंक के विरुद्ध यह लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ अंदरूनी क्षेत्र में प्रभावी नक्सल विरोधी अभियान जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह प्रचार युद्ध शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बैनर, पोस्टर, लघु चल चित्र, ऑडियो क्लिप, नाच-गाना, गीत-संगीत और सोशल मीडिया जैसे प्रचार प्रसार के अन्य माध्यम से नक्सलियों के काले कारनामों को उजागर किया जाएगा।

स्थानीय गोंडी बोली में ‘बस्तर त माटा’ और हल्बी बोली में ‘बस्तर चो आवाज’ के नाम से प्रारंभ इस अभियान के माध्यम से बस्तर वासियों के विचारों को दुनिया तक पहुंचाया जाएगा। इसके माध्यम से स्थानीय नक्सल मिलिशिया कैडर्स और नक्सल सहयोगियों को हिंसा त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जाएगा।



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