फर्जी डिग्री मामले की जांच के लिए सरकार ने गठित की 19 सदस्यीय एसआईटी

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Updated Fri, 11 Sep 2020 02:00 PM IST

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मानव भारती विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री मामले की जांच के लिए सरकार ने 19 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। सीआईडी में गठित की गई इस एसआईटी की अध्यक्षता एडीजीपी वेणुगोपाल करेंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को दी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग से भी संपर्क किया गया है।

सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि आकलन है कि फर्जी डिग्रियां हजारों में नहीं, लाखों में देश-विदेश में बांटी गई हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह बात विपक्ष के विधायक राजेंद्र राणा की ओर से प्रश्नकाल के बाद व्यवस्था के प्रश्न के तहत उठाए गए मामले पर दी। राणा ने सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेने को कहा और इस मामले की जांच सीबीआई को नहीं देने पर अफसोस जताया।

इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वह किसी भी सरकार पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। पूर्व में गलत चीजें हुई हैं। जहां भी यह लग रहा है कि गडबड़ी हुई है, वहां कार्रवाई की जा रही है। टेक्नोमैक मामले का उदाहरण आपके सामने है, आरोपी विदेश चला गया। सरकार ने छोड़ा नहीं। देवभूमि में इस तरह के गलत काम करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्कॉलरशिप घोटाले को भी हमने सीबीआई को सौंपा है। अब यह विषय मानव भारती वाला आया है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति है कि ऐसा भी विश्वविद्यालय है जो फर्जी डिग्रियां बांटता है। सीएम ने विपक्ष पर तंज कसा कि कांग्रेस सरकार अपने समय में इस गड़बड़झाले को पकड़ ही नहीं पाई। वर्तमान सरकार ने पांच लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया। जाली डिग्रियां बांटने से बड़ा पाप यहां कुछ नहीं हो सकता। इस विश्वविद्यालय का मालिक राजकुमार राणा है। केके सिंह रजिस्टार है।

दोनों ही ज्यूडिशियल लॉकअप में हैं, जैसे ही मालूम हुआ तो हमने कार्रवाई की। इस बारे में मामला दर्ज करने के बाद पता लगा कि देश के भीतर और बाहर बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियां दी गईं। छात्रों से ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए भी धन एकत्र किया गया। यह मामला गंभीर है। सरकार ने निर्णय लिया है कि इन मामलों की जांच सीआईडी को दी जाए। अब एडीजी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में एक 19 सदस्य टीम सीआईडी में गठित की गई है। इस तरह का मामला प्रवर्तन निदेशालय को भी दिया गया है। यह संख्या लाखों में हो सकती है। मामला जांच की दिशा में आगे बढऩे वाला है। 

मानव भारती विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री मामले की जांच के लिए सरकार ने 19 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। सीआईडी में गठित की गई इस एसआईटी की अध्यक्षता एडीजीपी वेणुगोपाल करेंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को दी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग से भी संपर्क किया गया है।

सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि आकलन है कि फर्जी डिग्रियां हजारों में नहीं, लाखों में देश-विदेश में बांटी गई हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह बात विपक्ष के विधायक राजेंद्र राणा की ओर से प्रश्नकाल के बाद व्यवस्था के प्रश्न के तहत उठाए गए मामले पर दी। राणा ने सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेने को कहा और इस मामले की जांच सीबीआई को नहीं देने पर अफसोस जताया।

इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि वह किसी भी सरकार पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। पूर्व में गलत चीजें हुई हैं। जहां भी यह लग रहा है कि गडबड़ी हुई है, वहां कार्रवाई की जा रही है। टेक्नोमैक मामले का उदाहरण आपके सामने है, आरोपी विदेश चला गया। सरकार ने छोड़ा नहीं। देवभूमि में इस तरह के गलत काम करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्कॉलरशिप घोटाले को भी हमने सीबीआई को सौंपा है। अब यह विषय मानव भारती वाला आया है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थिति है कि ऐसा भी विश्वविद्यालय है जो फर्जी डिग्रियां बांटता है। सीएम ने विपक्ष पर तंज कसा कि कांग्रेस सरकार अपने समय में इस गड़बड़झाले को पकड़ ही नहीं पाई। वर्तमान सरकार ने पांच लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया। जाली डिग्रियां बांटने से बड़ा पाप यहां कुछ नहीं हो सकता। इस विश्वविद्यालय का मालिक राजकुमार राणा है। केके सिंह रजिस्टार है।

दोनों ही ज्यूडिशियल लॉकअप में हैं, जैसे ही मालूम हुआ तो हमने कार्रवाई की। इस बारे में मामला दर्ज करने के बाद पता लगा कि देश के भीतर और बाहर बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियां दी गईं। छात्रों से ऐसे पाठ्यक्रमों के लिए भी धन एकत्र किया गया। यह मामला गंभीर है। सरकार ने निर्णय लिया है कि इन मामलों की जांच सीआईडी को दी जाए। अब एडीजी वेणुगोपाल की अध्यक्षता में एक 19 सदस्य टीम सीआईडी में गठित की गई है। इस तरह का मामला प्रवर्तन निदेशालय को भी दिया गया है। यह संख्या लाखों में हो सकती है। मामला जांच की दिशा में आगे बढऩे वाला है। 

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