पंजाब में कृषि अध्यादेशों के विरोध में सड़कों पर किसान, कई राष्ट्रीय राजमार्ग घंटों जाम

Published by Razak Mohammad on

धरने पर बैठे किसान
– फोटो : अमर उजाला

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किसान संगठनों के आह्वान पर आज पंजाब के बठिंडा और होशियारपुर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोष-प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम किया। जिला होशियारपुर में टांडा से श्री हरगोबिंदपुर मार्ग पर बने ब्यास पुल पर कल से किसानों की ओर से धरना लगाया हुआ है। कल सुबह से शुरू हुआ यह धरना सारी रात चला और अभी तक जारी है।

भवानीगढ़ में 11 किसान संगठनों ने संगरूर-चंडीगढ़ हाईवे रोका

कृषि अध्यादेशों के खिलाफ मंगलवार को भवानीगढ़ में 11 किसान संगठनों ने संगरूर-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम लगा दिया। संगरूर, पटियाला, चंडीगढ़, सुनाम और बठिंडा हाईवे पर दोपहर 12 से 2 बजे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। भाकियू एकता सिद्धूपुर के जिला महासचिव रण सिंह चट्ठा ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं। देश का हर वर्ग किसानी पर निर्भर है।

केंद्र सरकार गलत नीतियां बनाकर किसानों समेत देश के अन्य वर्ग के मुंह से निवाला छीनकर पूंजीपतियों को दे रही है। भाकियू राजेवाल के प्रदेश सचिव निरंजन सिंह दोहला, मलकीत सिंह लखमीरवाला और इंडियन फार्मर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव हरदेव सिंह ने कहा कि केंद्रीय अध्यादेश वापस होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

किसान नेताओं ने कहा कि 25 सितंबर को चंडीगढ़ में की जा रही महारैली में 11 किसान संगठन सहित अन्य वर्गों के लाखों लोग इकट्ठा होकर विरोध करेंगे। मौके पर भाकिय सिद्धूपुर के जिलाध्यक्ष सुरजीत सिंह फतेहगढ़ भादसों, भाकियू लक्खोवाल के अध्यक्ष अवतार सिंह गुरबख्शपुरा, भाकियू कादियां के जिलाध्यक्ष भूपिंदर सिंह बनभौरा, भाकियू राजेवाल के अध्यक्ष गुरमीत सिंह कपियाल मौजूद रहे।

नवांशहर-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग पर धरना

किसान संगठनों ने मंगलवार को दो घंटे नवांशहर-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग जाम कर दिया। प्रदर्शन में भाजपा को छोड़ सभी दलों के नेता शामिल हुए। उन्होंने किसान संगठनों का साथ देते हुए इस नीति को रद्द करने की मांग की। गांव सुधामाजरा के पास प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान निर्मल सिंह औजला, लक्खोवाल यूनियन के रणजीत सिंह रटैंडा, अकाली नेता एडवोकेट राजविंदर लक्की, कांग्रेसी नेता हीरा खेपड़, जोगिंदर सिंह अटवाल ने कहा कि केंद्र की ओर से जो नई नीति बनाई जा रही है वह किसान विरोधी है। मोदी सरकार की नई किसान नीति से सिर्फ बड़े औद्योगिक घरानों के हाथ में ही किसान की फसल का मूल्य लगाना रह जाएगा। किसानों की दशा पहले से भी खराब हो जाएगी। 

कृषि अध्यादेशों के विरोध में मलोट हाईवे पर किसानों ने दो घंटे प्रदर्शन कर नारेबाजी की। किसानों ने मलोट-बठिंडा चौक जाम कर दिया। आढ़तियों, पेस्टीसाइड डीलर एसोसिएशन, मुनीम और गल्ला मजदूर यूनियन ने अपनी दुकानें व काम बंद रखकर किसानों को समर्थन दिया। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार किसान विरोधी हैं।

कृषि अध्यादेशों से जहां किसानों की बर्बादी का मार्ग खुलेगा, वहीं मंडीकरण बोर्ड को खत्म करने से लाखों कर्मचारी नौकरी गंवा बैठेंगे। आढ़तियों का कारोबार खत्म होने से लाखों आढ़ती, मुनीम और मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। भाकियू लक्खोवाल के जिला प्रधान गगनदीप सिंह संधू, जुगराज सिंह कबरवाला, इंद्रजीत सिंह असपाल, निर्मल सिंह सिद्धूपुर, सुखदेव सिंह, कारज सिंह मिड्ढा प्रदर्शन में शामिल हुए। 


बठिंडा: किसानों ने बठिंडा-अमृतसर हाईवे किया जाम

केंद्र सरकार की ओर से लाए गए कृषि अध्यादेश के खिलाफ मंगलवार को सैकड़ों किसान बठिंडा-अमृतसर हाईवे पर जाम लगाकर बैठ गए। दोपहर 12 से दो बजे तक आवाजाही बाधित रही। वहीं केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर के गांव बादल की तरफ बढ़ रहे किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने बठिंडा-बादल बॉर्डर को सील कर दिया। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। 

किसान जगसीर सिंह, अमरीक सिंह, नत्था सिंह, गुलजार सिंह, सुखमंदर सिंह, हरदेव सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश बिना राज्य सरकार की सहमति के पास नहीं हो सकते। शिरोमणि अकाली दल ने हरसिमरत कौर बादल की कुर्सी बचाने के लिए सहमति दी होगी। अकाली दल एवं कांग्रेस किसानों को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करे। 

कृषि अध्यादेशों के खिलाफ सैकड़ों किसानों ने दूसरे दिन भी अमृतसर-दिल्ली हाईवे पर स्थित ब्यास पुल पर प्रदर्शन कर विरोध जताया। किसानों ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक इन बिल को वापस नहीं लेगी ब्यास पुल पर धरना जारी रहेगा। वहीं किसानों के प्रदर्शन के कारण मंगलवार को भी अमृतसर से जालंधर और जालंधर से अमृतसर आने वाले ट्रैफिक को गांवों की सड़कों से निकाला गया। इस कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना पड़ा। 

मंगलवार को किसानों से धरना खत्म करने का आग्रह करने डीसी अमृतसर गुरप्रीत सिंह खैरा और एसएसपी (देहात) ध्रुव दहिया पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसान ट्रैफिक को सुचारु ढंग से चलने में प्रशासन की मदद करें। किसान अपना धरना पुल से हटकर दूसरे स्थान पर लगाएं। किसानों ने दोनों प्रशासनिक अधिकारियों के आग्रह को अस्वीकार कर दिया। 

रोपड़: किसानों ने जाम किया चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग

रोपड़ में किसान जत्थेबंदियों, आढ़ती एसोसिएशन और पल्लेदारों ने इकट्ठा होकर मंगलवार को चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग पर धरना लगा दिया। ढाई घंटे तक प्रदर्शनकारी मौके पर डटे रहे। इस दौरान कैबिनेट मंत्री ओपी सोनी भी ट्रैफिक में फंसे रहे। धरना खत्म होने के बाद उनकी गाड़ी को निकाला गया। किसान नेताओं ने कहा कि सभी नेता दिल्ली में करते कुछ और हैं और पंजाब में आकर कहते कुछ और हैं। 

किसान नेता परमिंदर सिंह ने कहा कि लोकसभा सत्र में यह पता लग जाएगा कि कौन सांसद उनके साथ है और कौन बिल के हक में वोट डालते हैं। उन्होंने कहा कि 25 सितंबर को चंडीगढ़ में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि इस अध्यादेश को लागू न किया जाए। किसान जत्थेबंदियों की एकता के आगे केंद्र सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ेगा। 

पंजाब के नेताओं ने किसानों का साथ नहीं दिया तो चुनाव के समय इन नेताओं को गांवों में आने नहीं दिया जाएगा। किसान नेता मेजर सिंह थेड़ी, कैप्टन मुलतान सिंह, सुरजीत सिंह ढेर ने कहा कि पंजाब के हर हिस्से में किसान इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। मौके पर किसान यूनियन सिद्दूपुर के प्रधान कुलविंदर सिंह, राजेवाल के प्रधान गुरमेल सिंह बाड़ा मौजूद रहे। 

पटियाला में किसानों ने पक्का मोर्चा लगा दिया धरना

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की ओर से मांगों को लेकर मंगलवार को त्रिपड़ी के नजदीक पुडा ग्राउंड में पक्का मोर्चा लगाकर जोरदार धरना दिया गया। इस मौके पंजाब व केंद्र सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कृषि अध्यादेशों को रद्द करने, बिजली संशोधन एक्ट 2020 को वापस लेने समेत और कई मांगें उठाई गईं। 

किसान नेताओं करनैल सिंह लंग, जसविंदर सिंह सोमा आदि ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पास कृषि अध्यादेश से जहां सारे देश के किसानों में बड़े स्तर पर बैचेनी, रोष और असुरक्षा पैदा की है, वहीं विशेष तौर पर इन्हें लेकर पंजाब व हरियाणा के किसानों में जबरदस्त रोष है। जिस कारण किसान बड़ी संख्या में केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। 

उन्होंने कहा कि इन तीनों कृषि अध्यादेशों से पंजाब का मंडी प्रबंध पूरी तरह से तहस-नहस हो जाएगा। राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की सरकारी खरीद एजेंसियां मंडी से बाहर हो जाएंगी और किसानों को अपनी फसल की बिक्री के लिए कारपोरेट घरानों व बड़े प्राइवेट व्यापारियों के रहमो करम पर छोड़ दिया जाएगा। 

11 जत्थेबंदियों के आह्वान पर मंगलवार को फरीदकोट के गांव टहिणा के पास किसानों ने दोपहर 12 से 2 बजे तक अमृतसर-बठिंडा राष्ट्रीय राजमार्ग जाम रखा। इस दौरान सिर्फ आपातकालीन वाहनों का ही आवागमन जारी रहा। किसान नेताओं जगजीत सिंह डल्लेवाला, बिंदर सिंह गोलवाल, बोहड़ सिंह, जसपिंदर सिंह रूपयावाला, बलदीप सिंह रोमाणा, गुरमीत सिंह गोलेवाला ने कहा कि यह अध्यादेश पास होने के बाद किसानों को बड़े घराने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगें। केंद्र सरकार सरकारी मंडियां खत्म करने जा रही है। इसे सहन नहीं किया जा सकता।


मुक्तसर में गांव उदेकरन के पास दो घंटे जाम

किसान यूनियनों, आढ़तियों, आम आदमी पार्टी और अन्य यूनियनों ने मंगलवार को गांव उदेकरन के पास जाम लगाकर कृषि अध्यादेशों का विरोध किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। यूनियनों ने 12 से दो बजे तक कोटकपूरा-मुक्तसर रोड जाम भी किया।

भारतीय किसान यूनियन कादियां से जगदेव सिंह कानियांवाली, भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुरा से सुखदेव सिंह बूड़ा गुज्जर, जरनैल सिंह सिद्धूपुरा, ब्लॉक प्रधान पाला सिंह हरिकलां, आम आदमी पार्टी से जगदीप संधू काका बराड़, आढ़तिया एसोसिएशन के प्रधान तेजेंद्र बब्बू ने कहा कि केंद्र और शिअद साझे तौर पर किसानों के खिलाफ अध्यादेश ला रही है।

किसान पहले से ही कर्ज से परेशान है और आत्महत्याएं कर रहे हैं। ये अध्यादेश रद्द न किए गए तो माहौल खराब हो जाएगा। उधर, संगठनों ने गांव बादल में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर सिंह बादल के घर के सामने भी प्रदर्शन किया। 

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब ने पठानकोट-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग बरियार बाईपास जाम कर केंद्र सरकार के खिलाफ डेढ़ घंटा धरना दिया। किसानों ने कहा कि खेती अध्यादेश व बिजली संशोधन बिल रद्द करवाने के की मांग को लेकर उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा। धरने के कारण यातायात में भी बाधित रहा।

राजपुरा: किसान जत्थेबंदियों ने राजमार्ग किया जाम

किसान जत्थेबंदियों ने मंगलवार को लुधियाना-दिल्ली राजमार्ग जाम कर प्रदर्शन किया। किसान कोआर्डिनेटर कमेटी के नेता सतनाम सिंह, बूटा सिंह शादीपुर ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान विरोधी फैसले ले रहे हैं। किसानों पर थोपे जा रहे अध्यादेश किसानों की मौत का कारण बनेंगे। किसानों के वोट लेकर सत्ता पर काबिज होने वाले नेता आज किसानों के साथ खडे़ होने की बजाय सत्ता सुख भोग रहे हैं। किसान नेताओं ने कहा कि अध्यादेश वापस न लिए गए तो काले कपडे़ पहनकर प्रदर्शन किया जाएगा। 

टांडा उड़मुड़: किसानों और मजदूरों ने खोला मोर्चा

पूरी रात धरने वाले स्थान पर गुजारने के बाद मंगलवार को दूसरे दिन भी किसान जत्थेबंदियों के साथ सैकड़ों किसानों और मजदूरों ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोला। दूसरे दिन के धरने की अगुवाई हरविंदर सिंह खुजाला, बख्शीश सिंह मुल्तानी, सोहन सिंह गिल, निशान सिंह नडाला ने की। सीनियर उपप्रधान सविंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह खानपुर, रणबीर सिंह डुगरी ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के हितों को कुचलते हुए खेती अध्यादेश संसद में पेश कर दिया है। किसान दिन रात इन बिलों का विरोध करते हुए सड़कों पर हैं। उनकी लड़ाई खेती अध्यादेश और बिजली संशोधन एक्ट को रद्द करवाने तक जारी रहेगी।

किसान संगठनों के आह्वान पर आज पंजाब के बठिंडा और होशियारपुर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर रोष-प्रदर्शन करते हुए चक्का जाम किया। जिला होशियारपुर में टांडा से श्री हरगोबिंदपुर मार्ग पर बने ब्यास पुल पर कल से किसानों की ओर से धरना लगाया हुआ है। कल सुबह से शुरू हुआ यह धरना सारी रात चला और अभी तक जारी है।

भवानीगढ़ में 11 किसान संगठनों ने संगरूर-चंडीगढ़ हाईवे रोका

कृषि अध्यादेशों के खिलाफ मंगलवार को भवानीगढ़ में 11 किसान संगठनों ने संगरूर-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम लगा दिया। संगरूर, पटियाला, चंडीगढ़, सुनाम और बठिंडा हाईवे पर दोपहर 12 से 2 बजे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। भाकियू एकता सिद्धूपुर के जिला महासचिव रण सिंह चट्ठा ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं। देश का हर वर्ग किसानी पर निर्भर है।

केंद्र सरकार गलत नीतियां बनाकर किसानों समेत देश के अन्य वर्ग के मुंह से निवाला छीनकर पूंजीपतियों को दे रही है। भाकियू राजेवाल के प्रदेश सचिव निरंजन सिंह दोहला, मलकीत सिंह लखमीरवाला और इंडियन फार्मर एसोसिएशन के प्रदेश सचिव हरदेव सिंह ने कहा कि केंद्रीय अध्यादेश वापस होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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