नौकरियों में एससी-एसटी को आरक्षण न देने पर हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

Published by Razak Mohammad on

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के नौवें दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ। गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने सदन में खड़े होकर अनुसूचित जातियों और जनजातियों को नौकरियों में आरक्षण न मिलने, शोषण होने, एससी, एसटी कंपोनेंट का पैसा खर्च न होने के विषय पर सदन में नियम 67 में चर्चा मांगी।

स्पीकर ने इससे इंकार किया तो सदन में हंगामा हो गया। इस बीच सत्तापक्ष और विपक्ष में नोकझोंक हुई। हंगामा बढ़ता गया तो विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। हालांकि, वॉकआउट के बाद कांग्रेस विधायक अंदर आए।

इसके बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और संसदीय कार्य मंत्री ने भी इसे निंदनीय बताया। इसके बाद विधानसभा में प्रश्नकाल साढ़े 11 बजे ही शुरू हो पाया। इसे विपक्ष की गैर हाजिरी में ही शुरू किया गया। 

कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि सदन में एक तिहाई विधायक एससी और एसटी वर्ग से हैं। हमारे साथ नियम 67 में सारा काम छोड़कर चर्चा की जाए। 32 प्रतिशत प्रदेश में इस वर्ग से हैं। दलितों और आदिवासियों के बारे में सरकार चर्चा नहीं करना चाहती है।

सभी दलित और जनजातीय लोगों का शोषण हो रहा है। बच्चों के साथ बैठने नहीं दिया जाता। स्कॉलरशिप में भी घोटाला हुआ है। एससी और एसटी कंपोनेंट में वाजिब आर्थिक मदद नहीं दी जा रही है। 

इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अभी इस प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाएगी, वह बैठें। इस बीच विपक्ष के सभी सदस्य खड़ेे होकर हंगामा करते रहे और सदन से वॉकआउट कर गए।

विपक्ष के बाहर जाने के बाद स्पीकर विपिन सिंह परमार ने कहा कि जगत सिंह, मोहन लाल ब्राक्टा, नंदलाल और धनीराम शांडिल की ओर से नियम 67 के तहत एसटी को नौकरियों में आरक्षण न देने, शोषण करने, एससी और एसटी कंपोनेंट का पैसा खर्च न करने के बारे में उन्हें नोटिस मिला है।

इस बारे में माकपा विधायक राकेश सिंघा से नियम 130 के तहत चर्चा के लिए भी प्रस्ताव मिला है। इसे सरकार को जवाब के लिए भेजा है। जगत सिंह नेगी अपनी बातों से सनसनी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस चेयर को संबोधित नहीं कर रहे हैं। यह गलत है।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के नौवें दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ। गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने सदन में खड़े होकर अनुसूचित जातियों और जनजातियों को नौकरियों में आरक्षण न मिलने, शोषण होने, एससी, एसटी कंपोनेंट का पैसा खर्च न होने के विषय पर सदन में नियम 67 में चर्चा मांगी।

स्पीकर ने इससे इंकार किया तो सदन में हंगामा हो गया। इस बीच सत्तापक्ष और विपक्ष में नोकझोंक हुई। हंगामा बढ़ता गया तो विपक्ष नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। हालांकि, वॉकआउट के बाद कांग्रेस विधायक अंदर आए।

इसके बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और संसदीय कार्य मंत्री ने भी इसे निंदनीय बताया। इसके बाद विधानसभा में प्रश्नकाल साढ़े 11 बजे ही शुरू हो पाया। इसे विपक्ष की गैर हाजिरी में ही शुरू किया गया। 

कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि सदन में एक तिहाई विधायक एससी और एसटी वर्ग से हैं। हमारे साथ नियम 67 में सारा काम छोड़कर चर्चा की जाए। 32 प्रतिशत प्रदेश में इस वर्ग से हैं। दलितों और आदिवासियों के बारे में सरकार चर्चा नहीं करना चाहती है।

सभी दलित और जनजातीय लोगों का शोषण हो रहा है। बच्चों के साथ बैठने नहीं दिया जाता। स्कॉलरशिप में भी घोटाला हुआ है। एससी और एसटी कंपोनेंट में वाजिब आर्थिक मदद नहीं दी जा रही है। 

इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अभी इस प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाएगी, वह बैठें। इस बीच विपक्ष के सभी सदस्य खड़ेे होकर हंगामा करते रहे और सदन से वॉकआउट कर गए।

विपक्ष के बाहर जाने के बाद स्पीकर विपिन सिंह परमार ने कहा कि जगत सिंह, मोहन लाल ब्राक्टा, नंदलाल और धनीराम शांडिल की ओर से नियम 67 के तहत एसटी को नौकरियों में आरक्षण न देने, शोषण करने, एससी और एसटी कंपोनेंट का पैसा खर्च न करने के बारे में उन्हें नोटिस मिला है।

इस बारे में माकपा विधायक राकेश सिंघा से नियम 130 के तहत चर्चा के लिए भी प्रस्ताव मिला है। इसे सरकार को जवाब के लिए भेजा है। जगत सिंह नेगी अपनी बातों से सनसनी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस चेयर को संबोधित नहीं कर रहे हैं। यह गलत है।

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