निजी बसों को लगा ब्रेक, निगम में ओवरलोड होने वाली सवारियां

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हमीरपुर। जिले में निजी बस चालकों ने सोमवार को प्रदेशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर सभी बसों को बंद रखा। जिले में एक भी निजी बस नहीं गई। जबकि एचआरओएम ने निजी बसों की जगह अपना लगभग एक दर्जन अतिरिक्त बसें चलाई। लेकिन इसके बावजूद लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुईं। लोगों को अपने कष्ट तक पहुंचने के लिए एक से डेढ़ घंटे तक बसों का इंतजार करना पड़ा। हमीरपुर बस स्टैंड में भोरंज, टौणीदेवी, बड़सर, नादौन या गलोड़ के लिए बस लेता ही इंतजार में बैठे यात्री एक-दूसरे को पीछे धकेलते हुए बसों में घुस रहे थे। सरकार ने कोरोना संक्रमण से बचने के लिए निपटारा करने के लिए 50 प्रति क्षमता के साथ ही सवारियां बिठाने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन हमीरपुर में निजी बसों की हड़ताल के कारण यह नियम टूट गया।
42 सीटर बसों में 50 से 60 यात्री सवार थे। कई जगह बस चालक और परिचालक के इंकार करने पर यात्री झगड़ा करने पर उतारू हो गए। यात्रियों श्वेता, प्रियंका, विनोद कुमार, बिहारी लाल, कमोत्तम लाल और विवेक ने कहा कि निजी बसें न चलना से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। सुबह घर से हमीरपुर आते समय भी देरी से पहुंचे और शाम को घर वापसी भी देरी से हुई।
उधर, एचआरओटी के उपमंदलीय प्रबंधक विवेक लालपाल ने कहा कि निजी बसों की हड़ताल के कारण लगभग एक दर्जन अतिरिक्त बसें चनों पर चलाई गई हैं। उधर, निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि कोरोना के चलते पिछले दो सालों से निजी बस ऑपरेटर कारोबार से जूझ रहे हैं। बैंक लोन की किस्तें और इंश्योरेंस की किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है। सरकार को लोगों और निजी बसों की सुविधा के लिए विशेष रोड टैक्स और टोकन सहित अन्य कर माफ करना चाहिए। पिछले साल सभी बसंत श्रमिकों को दो-दो लाख रुपये आर्थिक पैकेज के रूप में देने की घोषणा की गई थी, जो अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाए हैं।]

हमीरपुर। जिले में निजी बस चालकों ने सोमवार को प्रदेशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर सभी बसों को बंद रखा। जिले में एक भी निजी बस नहीं गई। जबकि एचआरओएम ने निजी बसों की जगह अपना लगभग एक दर्जन अतिरिक्त बसें चलाई। लेकिन इसके बावजूद लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुईं। लोगों को अपने कष्ट तक पहुंचने के लिए एक से डेढ़ घंटे तक बसों का इंतजार करना पड़ा। हमीरपुर बस स्टैंड में भोरंज, टौणीदेवी, बड़सर, नादौन या गलोड़ के लिए बस लेता ही इंतजार में बैठे यात्री एक-दूसरे को पीछे धकेलते हुए बसों में घुस रहे थे। सरकार ने कोरोना संक्रमण से बचने के लिए निपटारा करने के लिए 50 प्रति क्षमता के साथ ही सवारियां बिठाने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन हमीरपुर में निजी बसों की हड़ताल के कारण यह नियम टूट गया।

42 सीटर बसों में 50 से 60 यात्री सवार थे। कई जगह बस चालक और परिचालक के इंकार करने पर यात्री झगड़ा करने पर उतारू हो गए। यात्रियों श्वेता, प्रियंका, विनोद कुमार, बिहारी लाल, कमोत्तम लाल और विवेक ने कहा कि निजी बसें न चलना से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। सुबह घर से हमीरपुर आते समय भी देरी से पहुंचे और शाम को घर वापसी भी देरी से हुई।

उधर, एचआरओटी के उपमंदलीय प्रबंधक विवेक लालपाल ने कहा कि निजी बसों की हड़ताल के कारण लगभग एक दर्जन अतिरिक्त बसें चनों पर चलाई गई हैं। उधर, निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि कोरोना के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों से निजी बस ऑपरेटर कारोबार से जूझ रहे हैं। बैंक लोन की किस्तें और इंश्योरेंस की किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है। सरकार को लोगों और निजी बसों की सुविधा के लिए विशेष रोड टैक्स और टोकन सहित अन्य कर माफ करना चाहिए। पिछले साल सभी बसंत श्रमिकों को दो-दो लाख रुपये आर्थिक पैकेज के रूप में देने की घोषणा की गई थी, जो अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाए हैं।]





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