नामी आईआईटी में पढ़ाई कर रहा युवा सड़कों पर वॉल पेंटिंग कर संजो रहा हिमाचल की संस्कृति

Published by Razak Mohammad on

हरदेव हरि, अमर उजाला, मंडी
Updated Wed, 13 Jan 2021 04:13 PM IST

युवा अमन सड़कों के किनारे वॉल पेंटिंग बना रहा है।
– फोटो : अमर उजाला

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देश की नामी आईआईटी गोहाटी से मास्टर इन डिजाइन विषय में पढ़ाई कर रहे युवा अमन कोरोना काल में सड़कों के किनारे वॉल पेंटिंग से हिमाचल प्रदेश की संस्कृति के रंग भर रहे हैं। यही नहीं लुप्त हो रही चित्रकला मंडी कलम भी युवा प्रतिभाओं को सीखा रहे हैं। जो उन्हें अपने परिवार से विरासत में मिली है। युवा चित्रकार गर्ल्स स्कूल मंडी के नजदीक मंडी कलम दीवारों पर अन्य नौजवानों के साथ उकेर चुके हैं। न्यू विक्टोरिया ब्रिज के पास पराशर झील और हिमाचल पर्यटन को दर्शाती वॉल पेंटिंग और पुलिस लाइन के नजदीक मंडी की तुंगल नाटी को चित्रित कर चुके हैं। 

अमन ने बताया कि जमा दो के बाद फाइन आर्ट में काम करते हुए वर्ष 2018 में मलयेशिया, यूक्रेन, सलोवेनिया सहित अन्य देशों में ग्रुप प्रदर्शन किए। वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार की ओर से गेयटी थियेटर शिमला में भी सोलो शो किया। उनका मानना है कि कोरोना काल जहां लोगों के लिए मुसीबतें लेकर आया, वहीं लाकडाउन के समय अपनी रुचियों को निखारने का समय भी मिला। उन्होंने जो सीखा था, कोरोना काल में प्रेक्टिस कर उसे और अधिक बेहतर करने की कोशिश की है। अमन ने बताया कि उन्हें यह कला पिता राजेश कुमार से विरासत में मिली है। उनके पिता कैहनवाल स्कूल में सेंटर हेड टीचर हैं। जबकि माता शीला देवी द्रंग स्कूल में बतौर आईटी लेक्चर  है। बड़ा भाई अंशुल मुंबई में बतौर एक्टर कॅरियर बना रहा है।  

आगे पढ़ाई के लिए छोड़ दी नौकरी 
आईआईटी मंडी में बतौर फाइन आर्ट प्रशिक्षक के रूप में अमन को जॉब भी मिली, लेकिन आगे की पढ़ाई के चलते जॉब छोड़ दी। आईआईटी गोहाटी में मास्टर इन डिजाइन में प्रवेश पाया। अब तक अमन ने डेढ़ सौ से अधिक पेंटिंग बनाई हैं। 

देश की नामी आईआईटी गोहाटी से मास्टर इन डिजाइन विषय में पढ़ाई कर रहे युवा अमन कोरोना काल में सड़कों के किनारे वॉल पेंटिंग से हिमाचल प्रदेश की संस्कृति के रंग भर रहे हैं। यही नहीं लुप्त हो रही चित्रकला मंडी कलम भी युवा प्रतिभाओं को सीखा रहे हैं। जो उन्हें अपने परिवार से विरासत में मिली है। युवा चित्रकार गर्ल्स स्कूल मंडी के नजदीक मंडी कलम दीवारों पर अन्य नौजवानों के साथ उकेर चुके हैं। न्यू विक्टोरिया ब्रिज के पास पराशर झील और हिमाचल पर्यटन को दर्शाती वॉल पेंटिंग और पुलिस लाइन के नजदीक मंडी की तुंगल नाटी को चित्रित कर चुके हैं। 

अमन ने बताया कि जमा दो के बाद फाइन आर्ट में काम करते हुए वर्ष 2018 में मलयेशिया, यूक्रेन, सलोवेनिया सहित अन्य देशों में ग्रुप प्रदर्शन किए। वर्ष 2019 में प्रदेश सरकार की ओर से गेयटी थियेटर शिमला में भी सोलो शो किया। उनका मानना है कि कोरोना काल जहां लोगों के लिए मुसीबतें लेकर आया, वहीं लाकडाउन के समय अपनी रुचियों को निखारने का समय भी मिला। उन्होंने जो सीखा था, कोरोना काल में प्रेक्टिस कर उसे और अधिक बेहतर करने की कोशिश की है। अमन ने बताया कि उन्हें यह कला पिता राजेश कुमार से विरासत में मिली है। उनके पिता कैहनवाल स्कूल में सेंटर हेड टीचर हैं। जबकि माता शीला देवी द्रंग स्कूल में बतौर आईटी लेक्चर  है। बड़ा भाई अंशुल मुंबई में बतौर एक्टर कॅरियर बना रहा है।  

आगे पढ़ाई के लिए छोड़ दी नौकरी 

आईआईटी मंडी में बतौर फाइन आर्ट प्रशिक्षक के रूप में अमन को जॉब भी मिली, लेकिन आगे की पढ़ाई के चलते जॉब छोड़ दी। आईआईटी गोहाटी में मास्टर इन डिजाइन में प्रवेश पाया। अब तक अमन ने डेढ़ सौ से अधिक पेंटिंग बनाई हैं। 

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Categories: Shimla

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