दिल्ली में प्लाज्मा बैंक बनने से डॉक्टर्स खुश, मरीजों के घरवालों की ‘जिद’ से हो रहे थे परेशान!

Published by Razak Mohammad on

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प्लाज्मा थेरेपी का कोरोना मरीजों पर कितना कारगर असर होता है, इसे लेकर विशेषज्ञों में अब तक विवाद है। लेकिन कई माइल्ड स्टेज के मरीजों पर इसका सकारात्मक असर देखा गया है।

यही कारण है कि कोरोना मरीजों के रिश्तेदार मामला सामने आते ही अपने मरीज की जान बचाने के लिए उसे प्लाज्मा चढ़ाने की जिद करने लगते हैं। इतना ही नहीं, वे स्वयं प्लाज्मा पाने के लिए दर-दर भटकना शुरू कर देते हैं।

सोशल मीडिया से लोगों से प्लाज्मा दान देने की गुहार लगाने लगते हैं। यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने देश का पहला प्लाज्मा बैंक बनाने को लेकर सभी तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। 

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन भी कोरोना संक्रमित हो गये थे। प्लाज्मा तकनीकी से ही उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिला और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। 
 
बीएल कपूर अस्पताल में इस समय 150 बिस्तरों पर कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर संदीप नायर बताते हैं कि मरीज के भर्ती होते ही उसके परिवार के लोग प्लाज्मा थेरेपी के बारे में पूछताछ करना शुरू कर देते हैं।

लोग स्वयं ही प्लाज्मा डोनर लाकर इलाज कराने की कोशिश करते हैं। 
 
डॉक्टर नायर के मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी कोरोना के ज्यादा गंभीर मरीजों पर कारगर नहीं होती, लेकिन ज्यादातर माइल्ड स्टेज के मरीजों पर इसका अच्छा असर देखने को मिल रहा है।

यही कारण है कि जिन मरीजों को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होने लगती है उन्हें वे प्लाज्मा चढ़ाने का सुझाव देते हैं। लेकिन सामान्य स्थिति के मरीजों को इसकी बिलकुल कोई आवश्यकता नहीं होती है। 

एक हफ्ते में दो बार दान कर सकते हैं प्लाज्मा 

प्लाज्मा हमारे खून का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है। रक्त देने के लिए एक स्वस्थ व्यक्ति को तीन महीने तक का इंतजार करने की सलाह दी जाती है।

लेकिन प्लाज्मा देने के लिए एक स्वस्थ हो चुका मरीज अपनी शारीरिक स्थिति के हिसाब से एक हफ्ते में एक या दो बार प्लाज्मा दान कर सकता है।

इससे उसके शरीर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। 
 
कोरोना बीमारी के संक्रमण के बाद स्वस्थ हुए व्यक्ति के शरीर से एक बार में 450 मिली तक प्लाज्मा निकाला जा सकता है।

एक कोरोना मरीज को 200 मिली तक प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इस प्रकार एक व्यक्ति का प्लाज्मा दो मरीजों के लिए पर्याप्त होता है। 

ट्रायल की मिली इजाजत 

दिल्ली देश के उन चंद राज्यों में शामिल था जिसे केंद्र की ओर से मरीजों पर प्लाज्मा ट्रायल की अनुमति मिली थी। पहले परीक्षण में ही इसके बेहतर परिणाम हासिल हुए थे।

इसे देखते हुए ही दिल्ली को अब 200 अन्य मरीजों पर ट्रायल की अनुमति मिल गई है। 
 
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में 35 में से 34 मरीजों पर इसका ट्रायल सफल रहा है। इसके आलावा प्राइवेट अस्पतालों में 49 में से 46 लोगों पर प्लाज्मा ट्रायल सफल रहा है। 
 
अब पूर्वी दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में इसका एक बैंक बनाया जाएगा, जहां कोई भी मरीज डॉक्टर या अस्पताल की लिखित सलाह के बाद प्लाज्मा प्राप्त कर सकेगा।

यह सेंटर अगले दो दिन में काम करने के लिए तैयार हो जायेगा। प्लाज्मा दानदाताओं को सेंटर तक लाने और उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार उठाएगी। 
 
दिल्ली में अब तक रिकॉर्ड 52,000 मरीज कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। ये सभी लोग प्लाज्मा दान करें तो दिल्ली में प्लाज्मा का एक बड़ा बैंक बन सकता है और इससे लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
 

सार

  • प्लाज्मा बैंक बनाकर अरविंद केजरीवाल ने दूर की बड़ी समस्या  
  • सरकारी अस्पतालों में 35 में से 34 मरीजों पर इसका ट्रायल सफल रहा है
  • एक कोरोना मरीज को 200 मिली तक प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत पड़ती है
  • दिल्ली को अब 200 अन्य मरीजों पर ट्रायल की अनुमति मिली

विस्तार

प्लाज्मा थेरेपी का कोरोना मरीजों पर कितना कारगर असर होता है, इसे लेकर विशेषज्ञों में अब तक विवाद है। लेकिन कई माइल्ड स्टेज के मरीजों पर इसका सकारात्मक असर देखा गया है।

यही कारण है कि कोरोना मरीजों के रिश्तेदार मामला सामने आते ही अपने मरीज की जान बचाने के लिए उसे प्लाज्मा चढ़ाने की जिद करने लगते हैं। इतना ही नहीं, वे स्वयं प्लाज्मा पाने के लिए दर-दर भटकना शुरू कर देते हैं।

सोशल मीडिया से लोगों से प्लाज्मा दान देने की गुहार लगाने लगते हैं। यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने देश का पहला प्लाज्मा बैंक बनाने को लेकर सभी तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। 

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन भी कोरोना संक्रमित हो गये थे। प्लाज्मा तकनीकी से ही उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिला और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। 
 
बीएल कपूर अस्पताल में इस समय 150 बिस्तरों पर कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर संदीप नायर बताते हैं कि मरीज के भर्ती होते ही उसके परिवार के लोग प्लाज्मा थेरेपी के बारे में पूछताछ करना शुरू कर देते हैं।

लोग स्वयं ही प्लाज्मा डोनर लाकर इलाज कराने की कोशिश करते हैं। 
 
डॉक्टर नायर के मुताबिक प्लाज्मा थेरेपी कोरोना के ज्यादा गंभीर मरीजों पर कारगर नहीं होती, लेकिन ज्यादातर माइल्ड स्टेज के मरीजों पर इसका अच्छा असर देखने को मिल रहा है।

यही कारण है कि जिन मरीजों को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होने लगती है उन्हें वे प्लाज्मा चढ़ाने का सुझाव देते हैं। लेकिन सामान्य स्थिति के मरीजों को इसकी बिलकुल कोई आवश्यकता नहीं होती है। 

एक हफ्ते में दो बार दान कर सकते हैं प्लाज्मा 

प्लाज्मा हमारे खून का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है। रक्त देने के लिए एक स्वस्थ व्यक्ति को तीन महीने तक का इंतजार करने की सलाह दी जाती है।

लेकिन प्लाज्मा देने के लिए एक स्वस्थ हो चुका मरीज अपनी शारीरिक स्थिति के हिसाब से एक हफ्ते में एक या दो बार प्लाज्मा दान कर सकता है।

इससे उसके शरीर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। 
 
कोरोना बीमारी के संक्रमण के बाद स्वस्थ हुए व्यक्ति के शरीर से एक बार में 450 मिली तक प्लाज्मा निकाला जा सकता है।

एक कोरोना मरीज को 200 मिली तक प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इस प्रकार एक व्यक्ति का प्लाज्मा दो मरीजों के लिए पर्याप्त होता है। 

ट्रायल की मिली इजाजत 

दिल्ली देश के उन चंद राज्यों में शामिल था जिसे केंद्र की ओर से मरीजों पर प्लाज्मा ट्रायल की अनुमति मिली थी। पहले परीक्षण में ही इसके बेहतर परिणाम हासिल हुए थे।

इसे देखते हुए ही दिल्ली को अब 200 अन्य मरीजों पर ट्रायल की अनुमति मिल गई है। 
 
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में 35 में से 34 मरीजों पर इसका ट्रायल सफल रहा है। इसके आलावा प्राइवेट अस्पतालों में 49 में से 46 लोगों पर प्लाज्मा ट्रायल सफल रहा है। 
 
अब पूर्वी दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में इसका एक बैंक बनाया जाएगा, जहां कोई भी मरीज डॉक्टर या अस्पताल की लिखित सलाह के बाद प्लाज्मा प्राप्त कर सकेगा।

यह सेंटर अगले दो दिन में काम करने के लिए तैयार हो जायेगा। प्लाज्मा दानदाताओं को सेंटर तक लाने और उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार उठाएगी। 
 
दिल्ली में अब तक रिकॉर्ड 52,000 मरीज कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। ये सभी लोग प्लाज्मा दान करें तो दिल्ली में प्लाज्मा का एक बड़ा बैंक बन सकता है और इससे लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
 



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