दिल्ली: आत्महत्या को लेकर आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों ने रखी अपनी राय

Published by Razak Mohammad on

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आजकल लोगों में अवसाद लगातार बढ़ रहा है, इसी वजह से कई लोग आत्महत्या कर लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ही नहीं दुनिया भर में खुदकुशी की घटनाएं तेजी से बढ़ीं हैं। कोरोना काल में आत्महत्या का रेट लगातार बढ़ रहा है, लोगों में हताशा और निराशा बढ़ रही है।

आजकल हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। इन्हीं सब मुद्दों को समझने के लिए  जेम सेलेक्शन के साथ 750एडी हेल्थकेयर ने सुसाइड प्रिवेंशन पर एक सूचनात्मक पैनल डिस्कशन – “टुगेदर वी कैन हेल्प प्रिवेंट सुसाइड” (साथ मिलकर हम आत्महत्या को रोक सकते हैं) का आयोजन किया। 

इसमें पैनलिस्ट वोकहार्ट अस्पताल कंसल्टेंट साइक्राइटिस्ट डॉ. राहुल ललित खेमानी, अनलीश यू एक्सीलेंस एकेडमी के संस्थापक और सीईओ फराह अख्तर, फोर्टिस अस्पताल के कंसल्टेंट साइक्राइटिस्ट डॉ. केदार तिलवे, नानावटी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कंसल्टिंग क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. शर्मिला बनवट और डीमेटरली लीगल के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वरिष्ठ वकील जयकुश हून शामिल थे। 

यह एक एगेंजिंग और पॉवर-पैक्ड चर्चा थी, जिसमें जेम सिलेक्शंस, खन्ना जेम्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और एमडी, पंकज खन्ना ने सकारात्मक संबोधन से शुरुआत की। इसमें उन्होंने इस पहल की सराहना की और कहा कि कैसे जेम सिलेक्शंस इस संवेदनशील और जीवन बचाने वाले मुद्दे पर जागरुकता फैलाने के लिए उत्सुक है।  

पैनलिस्ट ने आत्महत्या की रोकथाम के लिए परिवार की देखभाल और समझ की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जीवन को बचाने के लिए सार्वजनिक जागरुकता कैसे महत्वपूर्ण है। 

आत्महत्या की वजह से प्रियजनों को किसी भी हानि से बचाने के लिए, आत्महत्या के पीछे के कारणों को समझना होगा। डॉ. शर्मिला ने कहा, “हर आत्महत्या को रोका जा सकता है। डिप्रेशन आत्महत्या का एकमात्र कारण नहीं है। नौकरी गंवाने की वजह से आर्थिक परेशानी, बीमारी, पुरानी बीमारी, मादक द्रव्यों का सेवन कुछ और कारण हैं जो आत्महत्या की ओर ले जाते हैं।”

आत्महत्या रोकने के तरीकों को रेखांकित करते हुए, डॉ. राहुल ललित खेमानी ने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि हम साइक्राइटिक मदद और आत्महत्या के विचारों, चिंता और अवसाद के बारे में चर्चा को सामान्य बनाएं। यह एक पूरी तरह से अलग अनुभव है। एक व्यक्ति अपनी उथल-पुथल और भावनाओं को अपने दोस्त के साथ शेयर करता है और इन्हीं बातों को किसी प्रोफेशनल साइकोलॉजिस्ट के साथ शेयर करना बिल्कुल ही अलग अनुभव है। एक साइकोलॉजिस्ट जो सहायता प्रदान करता है, उससे ही उस व्यक्ति का दीर्घकालिक उपचार हो सकता है।”

 

आजकल लोगों में अवसाद लगातार बढ़ रहा है, इसी वजह से कई लोग आत्महत्या कर लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ही नहीं दुनिया भर में खुदकुशी की घटनाएं तेजी से बढ़ीं हैं। कोरोना काल में आत्महत्या का रेट लगातार बढ़ रहा है, लोगों में हताशा और निराशा बढ़ रही है।

आजकल हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। इन्हीं सब मुद्दों को समझने के लिए  जेम सेलेक्शन के साथ 750एडी हेल्थकेयर ने सुसाइड प्रिवेंशन पर एक सूचनात्मक पैनल डिस्कशन – “टुगेदर वी कैन हेल्प प्रिवेंट सुसाइड” (साथ मिलकर हम आत्महत्या को रोक सकते हैं) का आयोजन किया। 

इसमें पैनलिस्ट वोकहार्ट अस्पताल कंसल्टेंट साइक्राइटिस्ट डॉ. राहुल ललित खेमानी, अनलीश यू एक्सीलेंस एकेडमी के संस्थापक और सीईओ फराह अख्तर, फोर्टिस अस्पताल के कंसल्टेंट साइक्राइटिस्ट डॉ. केदार तिलवे, नानावटी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कंसल्टिंग क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. शर्मिला बनवट और डीमेटरली लीगल के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वरिष्ठ वकील जयकुश हून शामिल थे। 

यह एक एगेंजिंग और पॉवर-पैक्ड चर्चा थी, जिसमें जेम सिलेक्शंस, खन्ना जेम्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और एमडी, पंकज खन्ना ने सकारात्मक संबोधन से शुरुआत की। इसमें उन्होंने इस पहल की सराहना की और कहा कि कैसे जेम सिलेक्शंस इस संवेदनशील और जीवन बचाने वाले मुद्दे पर जागरुकता फैलाने के लिए उत्सुक है।  

पैनलिस्ट ने आत्महत्या की रोकथाम के लिए परिवार की देखभाल और समझ की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जीवन को बचाने के लिए सार्वजनिक जागरुकता कैसे महत्वपूर्ण है। 

आत्महत्या की वजह से प्रियजनों को किसी भी हानि से बचाने के लिए, आत्महत्या के पीछे के कारणों को समझना होगा। डॉ. शर्मिला ने कहा, “हर आत्महत्या को रोका जा सकता है। डिप्रेशन आत्महत्या का एकमात्र कारण नहीं है। नौकरी गंवाने की वजह से आर्थिक परेशानी, बीमारी, पुरानी बीमारी, मादक द्रव्यों का सेवन कुछ और कारण हैं जो आत्महत्या की ओर ले जाते हैं।”

आत्महत्या रोकने के तरीकों को रेखांकित करते हुए, डॉ. राहुल ललित खेमानी ने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि हम साइक्राइटिक मदद और आत्महत्या के विचारों, चिंता और अवसाद के बारे में चर्चा को सामान्य बनाएं। यह एक पूरी तरह से अलग अनुभव है। एक व्यक्ति अपनी उथल-पुथल और भावनाओं को अपने दोस्त के साथ शेयर करता है और इन्हीं बातों को किसी प्रोफेशनल साइकोलॉजिस्ट के साथ शेयर करना बिल्कुल ही अलग अनुभव है। एक साइकोलॉजिस्ट जो सहायता प्रदान करता है, उससे ही उस व्यक्ति का दीर्घकालिक उपचार हो सकता है।”

 



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