तीन माह तक देवी-देवताओं के मदिरों में बंद रहेंगे कपाट

Published by Razak Mohammad on

लाहौल में (लाहौली नव वर्ष) के मौके पर बर्फ की सिल्लियों में तबदील हुई चन्द्रा भागा नदी के संगम में ?

लाहौल में (लाहौली नव वर्ष) के मौके पर बर्फ की सिल्लियों में तबदील हुई चन्द्रा भागा नदी के संगम में ?
– फोटो : Kullu

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रोहतांग (कुल्लू)। शीत मरुस्थल लाहौल-स्पीति की पट्टन घाटी में नववर्ष के उपलक्ष्य पर उत्तना पर्व धूमधाम से मनाया गया। मान्यता है कि इस पर्व के बाद लाहौल की विभिन्न घाटियों में शीत ऋतु में मनाए जाने वाले त्योहार शुरू हो जाते हैं। यहां की विकट भौगोलिक परिस्थितियां, जनजीवन, भाषा, संस्कृति, परंपराएं, खान-पान, रीति-रिवाज और वेशभूषा हरेक त्योहार को आकर्षक और अनुपम बनाती हैं, जबकि उत्तना पर्व के दिन घाटी के लोग सत्तू का बना टोटू बनाकर अपने-अपने ईष्ट देवताओं को चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, चंद्रभागा संगम में लोगों ने शून्य से 18 डिग्री नीचे तापमान में आस्था का डुबकी लगाई तथा एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई दी। गोशाल के ग्रामीणों ने पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का आदान-प्रदान भी किया।
गौरतलब है कि हिंदू बाहुल्य पट्टन घाटी में उत्तना पर्व के बाद सभी देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट तीन महीने के लिए बंद हो गए हैं। अब चैत्र महीना शुरू होने के बाद ही इन मंदिरों के कपाट खुलेंगे। ग्रामीण हरि ठाकुर, राजू, विमल, प्रेमलाल, दोरजे, राम पाल ने कहा कि घाटी वासियों ने उत्तना पर्व को मिलजुल कर मनाया। इस दौरान घाटी में खुशहाली और समृद्धि की देवी-देवताओं से मंगल कामना भी की गई। घाटी के मालंग, मेलिग, शांशा, सिस्सू, उदयपुर मारबल, जालमा, त्रिलोकनाथ, गोंधला और सिस्सू में बागामी दो माह में उत्सवों की धूम रहेगी। घाटी वासी हर्षोल्लास से हालडा, फागली, लोसर तथा योर जैसे उत्सवों को जाड़े के बीच मनाएंगे।

रोहतांग (कुल्लू)। शीत मरुस्थल लाहौल-स्पीति की पट्टन घाटी में नववर्ष के उपलक्ष्य पर उत्तना पर्व धूमधाम से मनाया गया। मान्यता है कि इस पर्व के बाद लाहौल की विभिन्न घाटियों में शीत ऋतु में मनाए जाने वाले त्योहार शुरू हो जाते हैं। यहां की विकट भौगोलिक परिस्थितियां, जनजीवन, भाषा, संस्कृति, परंपराएं, खान-पान, रीति-रिवाज और वेशभूषा हरेक त्योहार को आकर्षक और अनुपम बनाती हैं, जबकि उत्तना पर्व के दिन घाटी के लोग सत्तू का बना टोटू बनाकर अपने-अपने ईष्ट देवताओं को चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं, चंद्रभागा संगम में लोगों ने शून्य से 18 डिग्री नीचे तापमान में आस्था का डुबकी लगाई तथा एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई दी। गोशाल के ग्रामीणों ने पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का आदान-प्रदान भी किया।

गौरतलब है कि हिंदू बाहुल्य पट्टन घाटी में उत्तना पर्व के बाद सभी देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट तीन महीने के लिए बंद हो गए हैं। अब चैत्र महीना शुरू होने के बाद ही इन मंदिरों के कपाट खुलेंगे। ग्रामीण हरि ठाकुर, राजू, विमल, प्रेमलाल, दोरजे, राम पाल ने कहा कि घाटी वासियों ने उत्तना पर्व को मिलजुल कर मनाया। इस दौरान घाटी में खुशहाली और समृद्धि की देवी-देवताओं से मंगल कामना भी की गई। घाटी के मालंग, मेलिग, शांशा, सिस्सू, उदयपुर मारबल, जालमा, त्रिलोकनाथ, गोंधला और सिस्सू में बागामी दो माह में उत्सवों की धूम रहेगी। घाटी वासी हर्षोल्लास से हालडा, फागली, लोसर तथा योर जैसे उत्सवों को जाड़े के बीच मनाएंगे।

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