तकनीक: न्यूरो की बीमारियों के जल्द दूर होने का पता, समय रहते इलाज संभव है

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अमर उजाला नेटवर्क, मंडी

द्वारा प्रकाशित: कृष्ण सिंह
अद्यतित Tue, 04 मई 2021 05:00 AM IST

सार

इसकी मदद से इस्केमिक स्ट्रोक जैसी मस्तिष्क समस्याओं में नसों के कार्यों और मस्तिष्क के रक्त प्रवाह में परिवर्तन का अध्ययन आसान होगा।

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दिमागी बीमारियों का अब जल्द पता चलेगा और इलाज भी समय पर संभव होगा। मानसिक विकारों के अध्ययन के लिए हिमाचल प्रदेश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक ईजाद की है। इसमें एक विशेष उपकरण की मदद से नसों के कार्य और मस्तिष्क के रक्त संचार का एक साथ आकलन किया जा सकेगा। इसकी मदद से इस्केमिक स्ट्रोक जैसी मस्तिष्क समस्याओं में नसों के कार्यों और मस्तिष्क के रक्त प्रवाह में परिवर्तन का अध्ययन आसान होगा। मस्तिष्क के लक्ष्य भागों (घावों) का पता लगाने और वर्गीकृत करने में मदद मिलेगी। ये समस्याएं तंत्रिका संबंधी बीमारियों से होती हैं।

इस प्राप्तकर्ता के लिए हाल में यूएस दिशानिर्देश भी मिल गया है। भारत में लगभग 30 मिलियन लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें मिर्गी, स्ट्रोक, पार्किंसंस डिजीज, मस्तिष्क आघात और तंत्रिका संक्रमण शामिल हैं। यह रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटिंग और लीटर, आईआईटी मंडी डॉ। शुभजीत रॉय चौधरी के नेतृत्व में किया गया है। इसके परिणाम आईईईई जर्नल ऑफ ट्रांसलेशनल कंपनी इन स्वास्थ्य और मेडिसिन में प्रकाशित किए गए हैं। इस शोध में डॉ। अभिजीत दास, न्यूरोलॉजिस्ट, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज, कोलकाता और डॉ। अनिर्बन दत्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, इनसेंटिव न्यूरोमहैबलिटेशन, बायोमेडिकल कंप्यूटर विभाग, बफ़्लो विश्वविद्यालय, अमेरिका ने भी मदद की है।

इसकी तकनीक है
शोधकर्ताओं ने बताया कि नसों के कार्य और मस्तिष्क के रक्त संचार का एक साथ आकलन करने से स्ट्रोक और उच्च रक्त के मामलों में तुरंत उपचार का निर्णय आसान होगा। यह डिवाइस पार्किंसंस जैसी बीमारियों के बढ़ने की गति समझने में भी मदद करेगा और लक्षण प्रकट होने से पहले इन बीमारियों के होने का पूर्वानुमान भी है। इस विधि में मल्टी मोडल ब्रेन स्टिमुलेशन सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे न्यूरोवास्कुलर यूनिट (एनवीयू) के विभिन्न कंपोनेंट को अलग-अलग स्टिमुलेट किया जाएगा और ईजेस (इलेक्ट्रोएन्सेफालोग्राफी) से इसके परिणाम स्वरूप विद्युत तंत्रिका संकेतों को और नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनआईआरआरएस) । रक्त प्रवाह को देखा जा सकता है। आसान शब्दों में इलेक्ट्रोड के जरिये मस्तिष्क में गैर हानिकारक विद्युत प्रवाह किया जाता है और नर्व्स की प्रतिक्रिया और रक्त प्रवाह के संदर्भ में मस्तिष्क की मांसपेशियों को एक साथ इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफी (ईजेस) और नियर-इन्फ्ररेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनआईआरएस) की मदद से स्वास्थ्य हो जाता है।

विस्तार

दिमागी बीमारियों का अब जल्द पता चलेगा और इलाज भी समय पर संभव होगा। मानसिक विकारों के अध्ययन के लिए हिमाचल प्रदेश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक ईजाद की है। इसमें एक विशेष उपकरण की मदद से नसों के कार्य और मस्तिष्क के रक्त संचार का एक साथ आकलन किया जा सकेगा। इसकी मदद से इस्केमिक स्ट्रोक जैसी मस्तिष्क समस्याओं में नसों के कार्यों और मस्तिष्क के रक्त प्रवाह में परिवर्तन का अध्ययन आसान होगा। मस्तिष्क के लक्ष्य भागों (घावों) का पता लगाने और वर्गीकृत करने में मदद मिलेगी। ये समस्याएं तंत्रिका संबंधी बीमारियों से होती हैं।

इस प्राप्तकर्ता के लिए हाल में यूएस दिशानिर्देश भी मिल गया है। भारत में लगभग 30 मिलियन लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें मिर्गी, स्ट्रोक, पार्किंसंस डिजीज, मस्तिष्क आघात और तंत्रिका संक्रमण शामिल हैं। यह रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटिंग और लीटर, आईआईटी मंडी डॉ। शुभजीत रॉय चौधरी के नेतृत्व में किया गया है। इसके परिणाम आईईईई जर्नल ऑफ ट्रांसलेशनल कंपनी इन स्वास्थ्य और मेडिसिन में प्रकाशित किए गए हैं। इस शोध में डॉ। अभिजीत दास, न्यूरोलॉजिस्ट, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज, कोलकाता और डॉ। अनिर्बन दत्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, इनसेंटिव न्यूरोमहैबलिटेशन, बायोमेडिकल कंप्यूटर विभाग, बफ़्लो विश्वविद्यालय, अमेरिका ने भी मदद की है।

इसकी तकनीक है

शोधकर्ताओं ने बताया कि नसों के कार्य और मस्तिष्क के रक्त संचार का एक साथ आकलन करने से स्ट्रोक और उच्च रक्त के मामलों में तुरंत उपचार का निर्णय आसान होगा। यह डिवाइस पार्किंसंस जैसी बीमारियों के बढ़ने की गति समझने में भी मदद करेगा और लक्षण प्रकट होने से पहले इन बीमारियों के होने का पूर्वानुमान भी है। इस विधि में मल्टी मोडल ब्रेन स्टिमुलेशन सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिससे न्यूरोवास्कुलर यूनिट (एनवीयू) के विभिन्न कंपोनेंट को अलग-अलग स्टिमुलेट किया जाएगा और ईजीएस (इलेक्ट्रोएन्सेफालोग्राफी) से इसके परिणाम स्वरूप विद्युत तंत्रिका संकेतों को और नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनआईआरआरएस) । रक्त प्रवाह को देखा जा सकता है। आसान शब्दों में इलेक्ट्रोड के जरिये मस्तिष्क में गैर हानिकारक विद्युत प्रवाह किया जाता है और नर्व्स की प्रतिक्रिया और रक्त प्रवाह के संदर्भ में मस्तिष्क की मांसपेशियों को एक साथ इलेक्ट्रोएन्सेफ्लोग्राफी (ईजेस) और नियर-इन्फ्ररेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनआईआरएस) की मदद से स्वास्थ्य हो जाता है।





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