जवानों पर भारी पड़े किसान : एडीजीपी, आईजी, पांच एसपी, 19 डीएसपी और 2200 पुलिसकर्मी व्यवस्था में थे तैनात

Published by Razak Mohammad on

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
Updated Sun, 10 Jan 2021 10:28 PM IST

आंसू गैस के गोले दागते पुलिसकर्मी।
– फोटो : अमर उजाला

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एडीजीपी अकील अहमद और आईजी भारती अरोड़ा के साथ कई वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अफसर और हरियाणा के विभिन्न जिलों से आई करीब 2200 पुलिसकर्मियों की फौज पर किसान आंदोलनकारी भारी पड़े। पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा इंतजाम किसानों के आक्रोश में बौने साबित हुए। इसके बाद सुरक्षाकर्मी सिर्फ मूकदर्शक की भूमिका में दिखे। किसान मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थल तहस नहस करके तिरंगा और भाकियू का झंडा लहराते हुए किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाते हुए वापस चले गए। 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की किसान महापंचायत कैमला गांव में विधायक हरविंद्र कल्याण के संयोजन में कई दिन पहले ही तय कर दी गई थी। किसान तभी से इसे नहीं होने देने की चेतावनी दे रहे थे। एक दिन पहले भी जब उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने आंदोलनकारी किसान नेताओं से बातचीत की, तो भी उनके तेवर तीखे थे। 

उन्होंने साफ कहा था कि वह मुख्यमंत्री का कार्यक्रम नहीं होने देंगे। यही कारण रहा कि कार्यक्रम की सुरक्षा की कमान एडीजीपी अकील अहमद को सौंप दी गई थी। एडीजीपी व आईजी करनाल भारती अरोड़ा के अलावा यहां सुरक्षा व्यवस्था में पांच पुलिस अधीक्षक, 19 डीएसपी और 2200 पुलिस कर्मियों को तैनात किया था। इसमें इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल तक 750 पुलिसकर्मी करनाल जिले के थे, शेष पानीपत, नूंह, रोहतक, हिसार, यमुनानगर से बुलाए गए थे। 

सभी को हिदायत दी गई थी कि आंदोलनकारियों को कार्यक्रम स्थल कैमला तक पहुंचने से रोकना और हर हाल में शांति व्यवस्था बनाये रखना है। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए कई चक्र का सुरक्षा घेरा तैयार किया था लेकिन किसानों की रणनीति पुलिस के प्लान पर भारी पड़ गई। 

2200 से अधिक पुलिसकर्मी भी आक्रोशित किसानों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से नहीं रोक पाए। किसानों ने देश का तिरंगा झंडा और भाकियू का झंडा लेकर कूच किया तो सभी सुरक्षा चक्र ध्वस्त होते चले गए और 1.37 बजे कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में सफल हो गए। कुछ ही देर में कार्यक्रम की तस्वीर बदल दी गई। इसके बाद आराम से सभी आंदोलनकारी किसान कैमला गांव होकर वापस भी चले गए। 

एडीजीपी अकील अहमद और आईजी भारती अरोड़ा के साथ कई वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अफसर और हरियाणा के विभिन्न जिलों से आई करीब 2200 पुलिसकर्मियों की फौज पर किसान आंदोलनकारी भारी पड़े। पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा इंतजाम किसानों के आक्रोश में बौने साबित हुए। इसके बाद सुरक्षाकर्मी सिर्फ मूकदर्शक की भूमिका में दिखे। किसान मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थल तहस नहस करके तिरंगा और भाकियू का झंडा लहराते हुए किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाते हुए वापस चले गए। 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की किसान महापंचायत कैमला गांव में विधायक हरविंद्र कल्याण के संयोजन में कई दिन पहले ही तय कर दी गई थी। किसान तभी से इसे नहीं होने देने की चेतावनी दे रहे थे। एक दिन पहले भी जब उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने आंदोलनकारी किसान नेताओं से बातचीत की, तो भी उनके तेवर तीखे थे। 

उन्होंने साफ कहा था कि वह मुख्यमंत्री का कार्यक्रम नहीं होने देंगे। यही कारण रहा कि कार्यक्रम की सुरक्षा की कमान एडीजीपी अकील अहमद को सौंप दी गई थी। एडीजीपी व आईजी करनाल भारती अरोड़ा के अलावा यहां सुरक्षा व्यवस्था में पांच पुलिस अधीक्षक, 19 डीएसपी और 2200 पुलिस कर्मियों को तैनात किया था। इसमें इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल तक 750 पुलिसकर्मी करनाल जिले के थे, शेष पानीपत, नूंह, रोहतक, हिसार, यमुनानगर से बुलाए गए थे। 

सभी को हिदायत दी गई थी कि आंदोलनकारियों को कार्यक्रम स्थल कैमला तक पहुंचने से रोकना और हर हाल में शांति व्यवस्था बनाये रखना है। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए कई चक्र का सुरक्षा घेरा तैयार किया था लेकिन किसानों की रणनीति पुलिस के प्लान पर भारी पड़ गई। 

2200 से अधिक पुलिसकर्मी भी आक्रोशित किसानों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से नहीं रोक पाए। किसानों ने देश का तिरंगा झंडा और भाकियू का झंडा लेकर कूच किया तो सभी सुरक्षा चक्र ध्वस्त होते चले गए और 1.37 बजे कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में सफल हो गए। कुछ ही देर में कार्यक्रम की तस्वीर बदल दी गई। इसके बाद आराम से सभी आंदोलनकारी किसान कैमला गांव होकर वापस भी चले गए। 

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Categories: Haryana

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