छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी हितेश गांधी की जमानत याचिका खारिज

Published by Razak Mohammad on

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Updated Mon, 29 Jun 2020 09:38 PM IST

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250 करोड़ रुपये से ज्यादा के छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी और ऊना के केसी ग्रुप आफ  इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी की प्रदेश उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी। 4 जनवरी को हिमाचल में 250 करोड़ के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई ने पहली बार तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार लोगों में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक अरविंद राज्टा, सेंट्रल बैंक ऑफ  इंडिया की नवांशहर शाखा के हेड कैशियर एसपी सिंह और ऊना के केसी ग्रुप आफ  इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी के नाम शामिल हैं। जांच में राज्टा की भूमिका संदिग्ध मिली है। आरोप हैं कि वह घोटाले वाले समय के दौरान शिक्षा मुख्यालय में उस सीट पर तैनात रहा है जहां से छात्रवृत्ति वितरण का काम संचालित होता था।

पिछले कुछ समय में सीबीआई ने ऊना के केसी इंस्टीट्यूट पर छापा मारकर भी दस्तावेज सीज किए थे। वहीं बैंक के हेड कैशियर के लिए कहा जा रहा है कि वह बैंक खातों में मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियों को लेकर फर्जीवाड़े में शामिल था। सीबीआई ने जमानत याचिका के विरोध में जो तथ्य पेश किए उससे कोर्ट ने संतोष जताते हुए याचिका खारिज कर दी। मंत्री रामलाल मारकंडा की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच की थी।

इसमें साल 2013-14 से 2016-17 तक 2.38 लाख एससीए एसटी और ओबीसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी करने के दौरान हुई गड़बड़ी की बात सामने आई थी। 266 निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई। इसमें बड़ी धांधली की बात सामने आने पर हिमाचल सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी और सीबीआई ने 9 मई 2019 को एफआईआर दर्ज कर ली।

पांच दिन बाद ही हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 22 शैक्षणिक संस्थानों के ठिकानों पर छापे मारे गए। यह कार्रवाई हिमाचल में शिमला, सिरमौर, ऊना, बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा के अलावा करनाल, मोहाली, नवांशहर, अंबाला और गुरदासपुर स्थित कई शैक्षणिक संस्थानों पर की गई। साथ ही बैंकों में भी छापा मारा था।

250 करोड़ रुपये से ज्यादा के छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी और ऊना के केसी ग्रुप आफ  इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी की प्रदेश उच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी। 4 जनवरी को हिमाचल में 250 करोड़ के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में जुटी सीबीआई ने पहली बार तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार लोगों में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अधीक्षक अरविंद राज्टा, सेंट्रल बैंक ऑफ  इंडिया की नवांशहर शाखा के हेड कैशियर एसपी सिंह और ऊना के केसी ग्रुप आफ  इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी के नाम शामिल हैं। जांच में राज्टा की भूमिका संदिग्ध मिली है। आरोप हैं कि वह घोटाले वाले समय के दौरान शिक्षा मुख्यालय में उस सीट पर तैनात रहा है जहां से छात्रवृत्ति वितरण का काम संचालित होता था।

पिछले कुछ समय में सीबीआई ने ऊना के केसी इंस्टीट्यूट पर छापा मारकर भी दस्तावेज सीज किए थे। वहीं बैंक के हेड कैशियर के लिए कहा जा रहा है कि वह बैंक खातों में मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियों को लेकर फर्जीवाड़े में शामिल था। सीबीआई ने जमानत याचिका के विरोध में जो तथ्य पेश किए उससे कोर्ट ने संतोष जताते हुए याचिका खारिज कर दी। मंत्री रामलाल मारकंडा की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच की थी।

इसमें साल 2013-14 से 2016-17 तक 2.38 लाख एससीए एसटी और ओबीसी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी करने के दौरान हुई गड़बड़ी की बात सामने आई थी। 266 निजी संस्थानों को 210 करोड़ और सरकारी संस्थानों को 56 करोड़ की राशि दी गई। इसमें बड़ी धांधली की बात सामने आने पर हिमाचल सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी और सीबीआई ने 9 मई 2019 को एफआईआर दर्ज कर ली।

पांच दिन बाद ही हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 22 शैक्षणिक संस्थानों के ठिकानों पर छापे मारे गए। यह कार्रवाई हिमाचल में शिमला, सिरमौर, ऊना, बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा के अलावा करनाल, मोहाली, नवांशहर, अंबाला और गुरदासपुर स्थित कई शैक्षणिक संस्थानों पर की गई। साथ ही बैंकों में भी छापा मारा था।



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