गूण टूटते ही अश्लील जुमले,भक्तिमय गीतों में बदले

Published by Razak Mohammad on

गड़सा घाटी में हाथों में मशालें लेकर दियाली उत्सव का मनाते ग्रामीण।

गड़सा घाटी में हाथों में मशालें लेकर दियाली उत्सव का मनाते ग्रामीण।
– फोटो : Kullu

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

कुल्लू/खराहल। आराध्य देवता जुआणी महादेव और थान देवता के मंदिरों में पौ फटने से पहले पहली परिक्रमा वीरवार को आरंभ हुई। यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा है। हालांकि कोराना के कारण देव परंपरा को सूक्ष्म रूप से निभाया गया।
इस दौरान लोगों ने देवता के देवलुओं के ऊपर जगह-जगह अखरोट भी फेंके। दोपहर के बाद थान देवता के हारियान और देवलु ढोल, नगाड़ों और करनाल की स्वरलहरियों के बीच न्योली स्थित जुआणी महादेव के मंदिर में पहुंचे। यहां पर देवलु एक दूसरे के पर अश्लील जुमले कसते गए। इससे पहले गूण बनाने के लिए हर घर से पराल एकत्रित किया गया। विशेष घास और पराल को जुआणी महादेव के प्रांगण स्थित जुआणी में सौंपा। यहां पर गूर और देवलुओं ने देव विधि के साथ गूण को बनाया। शाम को गूण को ढोल, नगाड़ों और करनाल की मंगलमय ध्वनि के बीच न्योली स्थित लाया गया और अंगु के पेड़ में लपेट दिया गया। इस दौरान परंपरानुसार अश्लील जुमलों को एक दूसरे पर कसते रहे। उसके बाद दोनों देवताओं के देवलुओं के बीच गूण तोड़ने के लिए जद्दोजहद हुई। गुण दो हिस्सों में टूट गई। जो घाटी के लिए सुख और समृद्धि प्रतीक माना जाता है। वहीं, गूण टूटने के बाद दिन भर अश्लील गालियों से गूंज रही घाटी का माहौल तुरंत भक्तिमय हो उठा। कारदार ओम प्रकाश महंत ने कहा कि कोविड-19 के चलते देव परंपरा का निर्वहन सूक्ष्म तरीके से किया गया। उन्होंने कहा कि गूण दो हिस्सों में टूट गया, जो घाटी के लिए शुभ माना जाता है। कहा कि इस परंपरा का निर्वहन सदियों से हो रहा है और देव रस्म को मर्यादा में रह कर निभाया जाता है।

कुल्लू/खराहल। आराध्य देवता जुआणी महादेव और थान देवता के मंदिरों में पौ फटने से पहले पहली परिक्रमा वीरवार को आरंभ हुई। यह सिलसिला दोपहर तक चलता रहा है। हालांकि कोराना के कारण देव परंपरा को सूक्ष्म रूप से निभाया गया।

इस दौरान लोगों ने देवता के देवलुओं के ऊपर जगह-जगह अखरोट भी फेंके। दोपहर के बाद थान देवता के हारियान और देवलु ढोल, नगाड़ों और करनाल की स्वरलहरियों के बीच न्योली स्थित जुआणी महादेव के मंदिर में पहुंचे। यहां पर देवलु एक दूसरे के पर अश्लील जुमले कसते गए। इससे पहले गूण बनाने के लिए हर घर से पराल एकत्रित किया गया। विशेष घास और पराल को जुआणी महादेव के प्रांगण स्थित जुआणी में सौंपा। यहां पर गूर और देवलुओं ने देव विधि के साथ गूण को बनाया। शाम को गूण को ढोल, नगाड़ों और करनाल की मंगलमय ध्वनि के बीच न्योली स्थित लाया गया और अंगु के पेड़ में लपेट दिया गया। इस दौरान परंपरानुसार अश्लील जुमलों को एक दूसरे पर कसते रहे। उसके बाद दोनों देवताओं के देवलुओं के बीच गूण तोड़ने के लिए जद्दोजहद हुई। गुण दो हिस्सों में टूट गई। जो घाटी के लिए सुख और समृद्धि प्रतीक माना जाता है। वहीं, गूण टूटने के बाद दिन भर अश्लील गालियों से गूंज रही घाटी का माहौल तुरंत भक्तिमय हो उठा। कारदार ओम प्रकाश महंत ने कहा कि कोविड-19 के चलते देव परंपरा का निर्वहन सूक्ष्म तरीके से किया गया। उन्होंने कहा कि गूण दो हिस्सों में टूट गया, जो घाटी के लिए शुभ माना जाता है। कहा कि इस परंपरा का निर्वहन सदियों से हो रहा है और देव रस्म को मर्यादा में रह कर निभाया जाता है।

Source link

Categories: Kullu

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *