गर्म जिले में उगाया हिमालय का औषधीय मशरूम, बाजार में पांच लाख प्रति किलो है कीमत

Published by Razak Mohammad on

सुरेंद्र जम्वाल, अमर उजाला, घुमारवीं (बिलासपुर)
Updated Sat, 09 Jan 2021 02:37 AM IST

बिलासपुर में उगाया औषधीय मशरूम
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं शहर के कहलूर बायोसाइंसेज और रिसर्च सेंटर के दो डाक्टरों ने कॉर्डिसेप्स नामक एक विशेष प्रकार के मशरूम को उगाने की तकनीक विकसित की है। यह मशरूम  सबसे महंगे मशरूमों में से एक है। जिसकी कीमत बाजार में तीन से पांच लाख रुपये तक होती है। इस मशरूम की खासियत यह है कि यह विभिन्न प्रकार के औषधीय गुणों के साथ इसका उपयोग मेडिसिन बनाने के लिए भी होता है। इस मशरूम में एंटी कैंसर, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी एजिंग, एंटी माइक्रोबियल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल, एंटी डायबिटिक, एनर्जी और इम्युनिटी बूस्टिंग गुण होते हैं।

अत्यधिक एंटीवायरल और इम्युनिटी बूस्टिंग गुण होने के कारण यह मशरूम वर्तमान कोरोना काल में लोगों के लिए बहुत लाभदायक है। कॉर्डिसेप्स परजीवी मशरूम की एक प्रजाति है। यह लगभग 400 उप प्रजातियों में से एक हैं। कॉर्डिसेप्स की वाइल्ड वैरायटी कॉर्डिसेप्स सिनेसिस, यार्चा गुम्बा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। जिसे हिंदी में कीड़ा जड़ी कहा जाता है। यार्चा गुम्बा नेपाली नाम है जो समुद्र तल से 3800 मीटर ऊपर नेपाल, भूटान, चीन, तिब्बत  और हिमालय पर्वत पर पाया जाता है। भारत में ये केवल उत्तर भारत के पहाड़ों पर ही पाया जाता है जिसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है।

कहलूर बायोसाइंसेज एंड रिसर्च सेंटर लोगों को इसकी ट्रेनिंग देने और तकनीक सांझा करने को तैयार हैं। डॉ. अमित और डॉ. विकेश इस मशरूम पर पिछले एक साल से काम कर रहे थे और उसके बाद इसे तैयार कर पाए हैं। यह मशरूम आद्र जलवायु और कम तापमान में पनपती हैं। इस मशरूम में  मेडिसिनल वेल्यू वाले  बहुत से बायो मेटाबॉलिट्स होते हैं। मशरूम का मूल्य इसके बायो एक्टिव कम्पोनेंट्स  के स्तर से निर्धारित होता है और इसमें पाए जाने वाले कॉर्डिसेप्सिन, पॉली सक्रीड और एडेनोसीन कई बीमारियों के उपचार में मदद करते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस मशरूम को लैब में उगा सकते हैं। यह हिमाचल के किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इस मशरूम को मात्र एक कमरे में उगाकर साल भर में पांच से दस लाख तक की कमाई की जा सकती है  ।

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं शहर के कहलूर बायोसाइंसेज और रिसर्च सेंटर के दो डाक्टरों ने कॉर्डिसेप्स नामक एक विशेष प्रकार के मशरूम को उगाने की तकनीक विकसित की है। यह मशरूम  सबसे महंगे मशरूमों में से एक है। जिसकी कीमत बाजार में तीन से पांच लाख रुपये तक होती है। इस मशरूम की खासियत यह है कि यह विभिन्न प्रकार के औषधीय गुणों के साथ इसका उपयोग मेडिसिन बनाने के लिए भी होता है। इस मशरूम में एंटी कैंसर, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी एजिंग, एंटी माइक्रोबियल, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल, एंटी डायबिटिक, एनर्जी और इम्युनिटी बूस्टिंग गुण होते हैं।

अत्यधिक एंटीवायरल और इम्युनिटी बूस्टिंग गुण होने के कारण यह मशरूम वर्तमान कोरोना काल में लोगों के लिए बहुत लाभदायक है। कॉर्डिसेप्स परजीवी मशरूम की एक प्रजाति है। यह लगभग 400 उप प्रजातियों में से एक हैं। कॉर्डिसेप्स की वाइल्ड वैरायटी कॉर्डिसेप्स सिनेसिस, यार्चा गुम्बा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। जिसे हिंदी में कीड़ा जड़ी कहा जाता है। यार्चा गुम्बा नेपाली नाम है जो समुद्र तल से 3800 मीटर ऊपर नेपाल, भूटान, चीन, तिब्बत  और हिमालय पर्वत पर पाया जाता है। भारत में ये केवल उत्तर भारत के पहाड़ों पर ही पाया जाता है जिसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है।

कहलूर बायोसाइंसेज एंड रिसर्च सेंटर लोगों को इसकी ट्रेनिंग देने और तकनीक सांझा करने को तैयार हैं। डॉ. अमित और डॉ. विकेश इस मशरूम पर पिछले एक साल से काम कर रहे थे और उसके बाद इसे तैयार कर पाए हैं। यह मशरूम आद्र जलवायु और कम तापमान में पनपती हैं। इस मशरूम में  मेडिसिनल वेल्यू वाले  बहुत से बायो मेटाबॉलिट्स होते हैं। मशरूम का मूल्य इसके बायो एक्टिव कम्पोनेंट्स  के स्तर से निर्धारित होता है और इसमें पाए जाने वाले कॉर्डिसेप्सिन, पॉली सक्रीड और एडेनोसीन कई बीमारियों के उपचार में मदद करते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस मशरूम को लैब में उगा सकते हैं। यह हिमाचल के किसानों और बेरोजगार युवाओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इस मशरूम को मात्र एक कमरे में उगाकर साल भर में पांच से दस लाख तक की कमाई की जा सकती है  ।

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Categories: Shimla

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